भारत सहित इन देशों पर बड़ रहा जलवायु परिवर्तन का खतरा - एंतोनियो गुतारेस

भारत सहित इन देशों पर बड़ रहा जलवायु परिवर्तन का खतरा - एंतोनियो गुतारेस
भारत, बांग्लादेश, चीन, जापान पर जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक खतरा

एंतोनियो गुतारेस (Antonio Guterres) ने कहा कि भारत, बांग्लादेश, चीन और जापान पर समुद्र का जलस्तर बढ़ने का सबसे अधिक जोखिम है. बढ़ते प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग पर हम सभी को जागरुक होना बहुत जरूरी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 5, 2019, 10:14 AM IST
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बैंकाक. संयुक्त राष्ट्र (United Nations) महासचिव एंतोनियो गुतारेस (Antonio Guterres) सोमवार को आसियान सम्मेलन में शामिल होने बैंकॉक पहुंचे. उन्होंने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए जलवायु परिवर्तन को जीवन की सबसे बड़ी समस्या बताते हुए समुद्र के बढ़ते जलस्तर पर गहरी चिंता जताई है. गुतारेस ने कहा कि यदि इस समस्या से निपटने के लिए जल्द ही कोई कदम नही उठाए गये तो यह एक बहुत बड़ी समस्या बनकर सामने आने वाली है.

2050 तक उठाएं उचित कदम
गुतारेस ने कहा कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) पर लगाम लगाने के उचित प्रयास नहीं किये गए तो 2050 तक दुनियाभर में 30 करोड़ लोग समुद्र में बह जाएंगे. उन्होंने कहा कि भारत, बांग्लादेश, चीन और जापान पर समुद्र का जलस्तर बढ़ने का सबसे अधिक जोखिम है. आसियान शिखर सम्मेलन में शामिल होने बैंकाक आए गुतारेस ने संवाददाताओं से कहा कि आज दुनिया में जीवन की निरंतरता यानी वर्तमान अवस्था में खुद को बनाए रखने की क्षमता के आगे सबसे बड़ा जोखिम जलवायु परिवर्तन है.

ग्लोबल वार्मिंग को बताया बहुत बड़ी समस्या
गुतारेस ने बताया कि पिछले 2-3 सालों से बढ़ते प्रदूषण और ग्‍लोबल वार्मिंग (Global Warming) के कारण पूरी दुनिया को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. धरती को प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्याओँ से बचाने के लिए विश्व के कई देश एक साथ आगे आये हैं. अगर इस प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग पर अभी से हम लोग जागरुक नहीं हुए तो आने वाली पीढ़ियों को शुद्ध हवा और साफ पानी के लिए भी तरसना पड़ सकता है.



रिपोर्ट का दिया हवाला
उन्होंने हाल में आई एक शोध केंद्र की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन के चलते समुद्र का स्तर हमारे अनुमान के मुकाबले कहीं अधिक तेजी से बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि थाईलैंड की 10 फीसदी आबादी के डूबने की आशंका है. आश्चर्यजनक रूप से इससे सबसे अधिक प्रभावित होने वाला क्षेत्र दक्षिण-पूर्वी एशिया है. जिसमें जापान, चीन, बांग्लादेश और भारत शामिल हैं. यदि बढ़ते तापमान को कम नही किया गया तो यह समस्या भीषण रूप लेगी. संयुक्त राष्ट्र सरकारों, व्यापार समुदाय, नागरिक समाज और स्थानीय अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकर्षित करना जरूरी है.

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