जापानी मैगजीन ने की विमेंस यूनिवर्सिटी की 'Ease of Sex' रैंकिंग, बवाल बढ़ने पर मांगी माफी

मैगजीन के एडिटोरियल डिपार्टमेंट ने इस मामले पर माफी मांगते हुए कहा कि हमने पाठकों के बीच अपील बढ़ाने के लिए सनसनीखेज भाषा का इस्तेमाल किया, इसके लिए हम माफी चाहते हैं.

फर्स्टपोस्ट.कॉम
Updated: January 8, 2019, 6:03 PM IST
जापानी मैगजीन ने की विमेंस यूनिवर्सिटी की 'Ease of Sex' रैंकिंग, बवाल बढ़ने पर मांगी माफी
जापानी मैगजीन 'स्पा' की फाइल फोटो
फर्स्टपोस्ट.कॉम
Updated: January 8, 2019, 6:03 PM IST
जापान की एक मैगजीन ने कुछ विमेंस यूनिवर्सिटी को रैंक करते हुए आर्टिकल छापा था कि किस यूनिवर्सिटी की स्टूडेंट्स को ड्रिंक पार्टी के दौरान सेक्स के लिए राजी करना कितना आसान है. लेकिन इस आर्टिकल पर विवाद बढ़ने के बाद मैगजीन ने अब माफी मांग ली है. इस मैगजीन का नाम स्पा है.

महिला यूनिवर्सिटीज़ की रैंकिंग की ये लिस्ट 25 दिसंबर को एक आर्टिकल में छापी गई थी. इस आर्टिकल को देखने के बाद कई लोगों ने अपना गुस्सा जाहिर किया. एक महिला ने सोशल मीडिया पर कैपेंन भी चलाया और मैगजीन से माफी मांगने की मांग करते हुए इसकी बिक्री रोकने की भी मांग की गई.

महिला ने अपनी ऑनलाइन याचिका में आरोप लगाया कि इस आर्टिकल में महिलाओं का अपमान किया गया है और हमने इस मामले में मंगलवार तक 28 हजार लोगों का समर्थन हासिल किया है. ये कैंपेन Change.org नाम के प्लैटफॉर्म पर शुरू किया गया था.

मैगजीन की तरफ से क्या कहा गया?

मैगजीन के एडिटोरियल डिपार्टमेंट ने इस मामले पर माफी मांगते हुए कहा कि हमने पाठकों के बीच अपील बढ़ाने के लिए सनसनीखेज भाषा का इस्तेमाल किया, इसके लिए हम माफी चाहते हैं. साथ ही हम इस बात के लिए भी माफी चाहते हैं कि हमने असली यूनिवर्सिटी के नामों की लिस्ट इस आर्टिकल में छापी.

क्या था आर्टिकल में?
NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, यह आर्टिकल एक तरह की प्रैक्टिस पर लिखा गया था, जिसे 'ग्यारानोमी' कहते हैं. इस प्रैक्टिस का मतलब है ऐसी पार्टियां जहां पुरुष महिलाओं को शामिल होने के लिए पैसे दते हैं. इस आर्टिकल में लिखा गया था कि ऐसी पार्टियां कॉलेज जाने वाली छात्राओं के बीच काफी फेमस हैं.
Loading...

इस आर्टिकल को एक ऐप डेवलपर के इंटरव्यू के साथ छापा गया था. महिला और पुरुषों को उनके पार्टनर तलाशने में मदद करने के लिए इस ऐप को डेवलप किया गया था. मैगजीन की तरफ से कहा गया कि यूनिवर्सिटीज की ये लिस्ट डेवलपर के इंटरव्यू पर आधारित थी.

ये भी पढ़ें: भारत ने संभाला चाबहार का कामकाज, देश के बाहर पहली बार मिला बंदरगाह का जिम्‍मा

जापान में पहले भी ऐसे कई मौके आए हैं, जब महिलाओं को कई मामलों में दबाने की कोशिश की गई है. महिलाओं के राजनीति करने या बिजनेस करने के मामले में G7 देशों में जापान सबसे नीचे है. इसके अलावा #MeToo कैंपेन भी जापान में पूरी तरह दबा दिया गया था. इसके अलावा शिक्षा के क्षेत्र में भी महिलाओं की हिस्सेदारी जापान में काफी कम है.

एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएंगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp अपडेट्स
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर