लाइव टीवी

प्रोफेसर ने लिखने को दिया निबंध तो छात्रा ने थमाया कोरा कागज, मिले फुल मार्क्स

News18Hindi
Updated: October 15, 2019, 12:13 PM IST
प्रोफेसर ने लिखने को दिया निबंध तो छात्रा ने थमाया कोरा कागज, मिले फुल मार्क्स
जापान यूनिवर्सिटी की छात्रा एमी ने अदृश्य स्याही से लिखा निबंध

जापान यूनिवर्सिटी (Japan University) के प्रोफेसर ने छात्रा (Student) को निबंध लिखने को कहा था. लेकिन उसने निबंध लिखने के लिए अदृश्य स्याही (Invisible Ink) का इस्तेमाल किया. अदृश्य स्याही से पत्र लिखने को अपूरीदासी और निंजा तकनीक कहते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 15, 2019, 12:13 PM IST
  • Share this:
टोक्यो. जापान यूनिवर्सिटी (Japan University) की एक छात्रा (Student) एमी हागा सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही हैं. इस छात्रा को यूनिवर्सिटी ने रिसर्च के लिए एक निबंध लिखने को कहा था, लेकिन छात्रा ने प्रोफेसर को कोरा कागज पकड़ा दिया. कोरा कागज देख प्रोफेसर भी आश्चर्यचकित हो गए. प्रोफेसर ने जब पेपर (Exam) को आग की रोशनी में देखा तो मामला समझ में आया. दरअसल एमी ने कागज पर निबंध लिखने के लिए अदृश्य स्याही (Invisible Ink) का इस्तेमाल किया था. इसके लिए यूनिवर्सिटी ने एमी को फुल मार्क्स दिए. इस निबंध की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं.

डेली मेल की खबर के मुताबिक, एमी जापान यूनिवर्सिटी (Japan University) में इतिहास (History) की छात्रा हैं. उन्हें निंजा के बारे में पढ़ना और लिखना काफी अच्छा लगता है. एमी कुछ समय पहले इगारो का निंजा म्यूजियम (Museum) देखने गई थीं. म्यूजियम में उन्होंने क्या देखा और उनकी जर्नी कैसी रही, प्रोफेसर यूजी यामादा ने उन्हें इस विषय पर निबंध लिखने को कहा था. लेकिन एमी ने निबंध लिखने के लिए अदृश्य स्याही (Invisible Ink) का इस्तेमाल किया. अदृश्य स्याही से पत्र लिखने को अपूरीदासी और निंजा तकनीक कहते हैं.

अदृश्य स्याही से भेजे जाते थे गुप्त संदेश
छात्रा एमी हागा का निंजा के प्रति काफी लगाव है, इसलिए उन्होंने ये दिखाने के लिए इस स्याही का प्रयोग किया. अपूरीदासी जापान की एक परंपरागत तकनीक है, जिसका प्रयोग प्रचीन समय में गुप्त संदेश भेजने के लिए किया जाता था.

ऐसे बनाई जाती है अदृश्य स्याही
अपूरीदासी तकनीक में इस्तेमाल करने के लिए इस अदृश्य स्याही को सोयाबीन से तैयार किया जाता है. इसके लिए सोयाबीन को काफी समय तक भिगोया जाता है और फिर पीसकर उसका रस निकाला जाता है. इसके बाद उसे स्याही में तब्दील किया जाता है. इससे लिखे हुए शब्द तभी नजर नहीं आते हैं, जब पेपर को आग के करीब ले जाया जाता है.

यह भी पढ़ें-
Loading...

माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई फिर से मापेंगे नेपाल और चीन
चीन की महिलाएं क्यों कर रही हैं अपने खून की तस्करी
बुकर पैनल नहीं चुन पा रहा था कोई एक विजेता, नियम तोड़कर दो को दिया अवॉर्ड

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए दुनिया से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: October 15, 2019, 11:29 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...