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जो बाइडन के आने से कम नहीं होंगी चीन की चिंताएं, 'नया अमेरिका' भी नहीं देगा कोई राहत!

जो बाइडन (AP)
जो बाइडन (AP)

US New President: चीन (China) के अखबार ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि नए प्रशासन के बाद चीन और अमेरिका के बीच कुछ व्यापारिक मसले हल हो सकते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 21, 2021, 5:46 PM IST
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बीजिंग. अमेरिका (America) के नए राष्ट्रपति जो बाइडन (Joe Biden) ने बुधवार को शपथ ले ली है. माना जा रहा था कि बाइडन शुरुआत में चीन को लेकर कोई बड़ा ऐलान कर सकते हैं, लेकिन उन्होंने चीन से जुड़ा कोई भी बड़ा बयान नहीं दिया है. खास बात है कि अपने प्रति बाइडन के नजरिए से चीन भी सतर्क है. ऐसे में विशेषज्ञ बताते हैं कि दोनों देशों के बीच संबंधों में खास बदलाव नहीं आएगा. खास बात है कि बाइडेन की कैबिनेट के भावी विदेश मंत्री रहे एंथनी ब्लिंकेन ने भी चीन को लेकर डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की सोच की सराहना की थी.

इधर, अमेरिका के नए राष्ट्रपति के कार्याल संभालने के बाद चीन ने अनुमान लगाया है कि अमेरिका भी कई मुद्दों को लेकर कड़े शब्दों का इस्तेमाल करेगा. हालांकि, चीन के अखबार ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि नए प्रशासन के बाद चीन और अमेरिका के बीच कुछ व्यापारिक मसले हल हो सकते हैं. वहीं, बाइडेन टीम के सदस्य जेनेट येलेन ने कहा कि है कि नया प्रशासन चीन की अमेरिका की इकोनॉमी को कमजोर करने वाले तरीकों के खिलाफ दूसरे विकल्पों का भी उपयोग करेगा.

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ट्रेजरी सेक्रेटरी के तौर पर चुने गए येलेन का मानना है कि चीन की वजह से अमेरिकी कंपनियों की कीमतें गिर रही हैं. इधर भावी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन दावा कर रहे हैं कि पहले से ही क्षेत्र के मामले में दम भरने वाला चीन अब पूरे विश्व को अपने नियंत्रित करने की तैयारी में है. उन्होंने कहा कि वे अलग-अलग क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं. ऐसे में उनकी कोशिशों को बेअसर करने के लिए सरकार को भरोसेमंद तरीके से एकसाथ काम करना होगा.

ब्लिंकन पहले भी चीन को अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती बता चुके हैं. उन्होंने कहा कि हमें दमखम के साथ अपने फैसले लेने चाहिए. इस दौरान उन्होंने अमेरिका के दूसरे देशों से भी अच्छे संपर्क होने पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि ताकतवर हालात तब तैयार होंगे, जब अमेरिका सहयोगियों के साथ मिलकर काम करेगा, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का नेतृत्व करेगा, बेहतर घरेलू निवेश करेगा और मानवाधिकार के लिए खड़ा होगा.
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