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क्या है IS का खुरासान मॉडल, तालिबान का दुश्मन, जिसने काबुल ब्लास्ट की ली जिम्मेदारी

क्या है IS का खुरासान मॉडल, तालिबान का दुश्मन, जिसने काबुल ब्लास्ट की ली जिम्मेदारी

काबुल में एयरपोर्ट के पास धमाकों में 60 लोगों की मौत हो गई है. (फोटो: AP)

काबुल में एयरपोर्ट के पास धमाकों में 60 लोगों की मौत हो गई है. (फोटो: AP)

Kabul Airport Blasts: IS आतंकी समूह का सहयोगी ISIS-K ने एक बार उत्तरी सीरिया और इराक में बड़े इलाकों पर कब्जा कर लिया था. 2015 में स्थापित हुआ यह संगठन ज्यादातर पूर्वी अफगानिस्तान में काम करता है.

    काबुल. काबुल एयरपोर्ट पर हुए धमाकों में करीब 72 अफगानों की मौत हो गई है. मरने वालों में 13 अमेरिकी जवान भी शामिल हैं. ISIS आतंकी समूह ने भी इन हत्याओं की जिम्मेदारी ली है. अफगानिस्तान (Afghanistan) में कब्जा जमा चुके तालिबान (Taliban) ने एक ट्विटर पोस्ट के जरिए इस घटना की निंदा की थी. साथ ही कहा था कि इस्लामिक अमीरात अफगानिस्तान ‘अपने लोगों की सुरक्षा पर बारीकी से नजर’ बनाए हुए था. सीएनएन-न्यूज18 को सरकारी सूत्रों ने जानकारी दी कि सर्वदलीय बैठक में भारत सरकार ने कहा था कि उन्हें काबुल एयरपोर्ट पर ISIS के हमले का डर था.

    वहीं, रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से लिखा कि अमेरिका अधिकारियों का मानना है कि इस्लामिक स्टेट का अफगानी सहयोगी इस्लामिक स्टेट खुरासन (ISIS-K) इस घटना का जिम्मेदार था. ISIS-K को तालिबान का बड़ा दुश्मन माना जाता है. कहा जाता है कि विद्रोहियों के अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद हुई उथल-पुथल के बीच देश के जेलों में बंद कई अहम कैदियों को छोड़ दिया गया था. अब जानते हैं कि आखिर ISIS-K क्या है और इससे अफगानों को क्या खतरा है.

    कौन है ISIS-K?
    IS आतंकी समूह का सहयोगी ISIS-K ने एक बार उत्तरी सीरिया और इराक में बड़े इलाकों पर कब्जा कर लिया था. 2015 में स्थापित हुआ यह संगठन ज्यादातर पूर्वी अफगानिस्तान में काम करता है. इनमें एक इलाके को खुरासन प्रांत कहा जाता है. माना जाता है कि इस समूह में लड़ाकों की संख्या 2200 से ज्यादा है और अमेरिकी सैनिकों के देश छोड़ने के बाद से यह आंकड़ा बढ़ रहा है.

    नागरिकों के लिए है बड़ा खतरा
    सेंटर ऑफ स्ट्रेटिजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के मुताबिक, 2015 और 2017 के बीच ISIS-K ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान में आम नागरिकों पर 100 हमले किए हैं. इसी दौरान करीब 250 हमले अमेरिकी, पाकिस्तानी और अफगान सैनिकों पर हुए हैं. तब से ही इनकी संख्या में इजाफा जारी है. ITV न्यूज ग्लोबल सिक्योरिटी एडिटर रोहित काचरू कहते हैं कि ISIS-K अफगानिस्तान के खुरासन क्षेत्र में 6 सालों से काम कर रहा है. इसने ‘आम नागरिकों पर सैकड़ों हमले किए हैं.’

    यह भी पढ़ें: Kabul Blast: काबुल हमले पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा- हमलावरों को इसकी कीमत चुकानी होगी

    कहा जाता है कि अमेरिकी, अफगान बलों और तालिबान ने ISIS-K के प्रभाव को कम किया है, लेकिन हाल ही के वर्षों में इसने कई बड़े हमले किए हैं. मई 2020 में काबुल के प्रसूता केंद्र में कथित हमला हुआ था. माना जाता है कि इस हमले में नवजातों और माताओं समेत 24 लोगों की मौत हो गई थी.

    क्या ISIS-K के तार तालिबान या अल-कायदा से जुड़े हैं?
    ISIS-K और तालिबान के बीच दुश्मनी है. ISIS-K के मानता है कि तालिबान इतना कट्टरपंथी नहीं है, जितना होना चाहिए. पहले भी अफगानिस्तान में जमीन को लेकर समूहों के बीच लड़ाई हो चुकी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, काबुल में बंद ISIS-K के कमांडर को तालिबान ने बीते हफ्ते मार दिया है. दोनों पक्षों में युद्ध के चलते इस बात की संभावना कम ही है कि ISIS-K लोगों को काबुल एयरपोर्ट से निकालने के तालिबान के पश्चिमी देशों के साथ समझौते को मानेगा. एक जैसी धारणा साझा करने के बाद भी ISIS-K और अल-कायदा के साथ काम करने की संभावना नहीं है.

    Tags: Afghanistan, ISIS-K, Kabul Airport Blast, Taliban

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