कैलाश सत्यार्थी की कोशिशों से बाल श्रम के खिलाफ पारित ILO कन्वेंशन-182 बना वैश्विक स्तर पर सर्वमान्य ऐतिहासिक कन्वेंशन

कैलाश सत्यार्थी की कोशिशों से बाल श्रम के खिलाफ पारित ILO कन्वेंशन-182 बना वैश्विक स्तर पर सर्वमान्य ऐतिहासिक कन्वेंशन
ह आईएलओ कनवेंशन-182 (ILO Convention 182) नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी (Kailash Satyarthi) के प्रयास से करीब 22 साल पहले सर्वसम्‍मति से पारित किया था.

यह आईएलओ कनवेंशन-182 (ILO Convention 182) नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी (Kailash Satyarthi) के प्रयास से करीब 22 साल पहले सर्वसम्‍मति से पारित किया था. इंटरनेशनल लेबर आर्गेनाइजेशन (आईएलओ) के 187वें और अंतिम सदस्य टोंगा ने भी कन्वेंशन पर हस्ताक्षर कर दिया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 5, 2020, 3:22 PM IST
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नई दिल्ली. बाल श्रम (Child Labor) के खिलाफ आंदोलन का आज ऐतिहासिक दिन है. बाल श्रम के सबसे बदतर प्रकारों को खत्‍म करने के लिए बनाए इंटरनेशनल लेबर आर्गेनाइजेशन (आईएलओ) के कन्वेंशन-182 (ILO Convention 182) को अब इसके सभी सदस्य देशों ने स्वीकार कर लिया है. दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित टोंगा आईएलओ का 187वां और अंतिम सदस्य देश है, जिसने इस पर हस्ताक्षार कर आईएलओ कनवेंशन-182 को स्वीकार कर लिया है. टोंगा के हस्ताक्षर के बाद कन्वेंशन-182 आईएलओ के इतिहास में वैश्विक स्‍तर पर सबसे अधिक समर्थन वाला कन्‍वेंशन हो गया है.

यह आईएलओ कनवेंशन-182 नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी (Kailash Satyarthi) के प्रयास से करीब 22 साल पहले सर्वसम्‍मति से पारित किया था. तब आईएलओ के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था कि किसी प्रस्ताव को उसके सभी सदस्य देशों का समर्थन मिला हो. भारत के लिए आज का दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इस अंतरराष्ट्रीय कानून की मांग भारत की धरती से ही उठी थी.

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आईएलओ कन्वेंशन-182,‘ग्‍लोबल मार्च अगेंस्‍ट चाइल्‍ड लेबर’की स्‍थापना करने वाले कैलाश सत्‍यार्थी की अंतरराष्ट्रीय स्‍तर पर निरंतर वकालत करने का परिणाम है. सन 1998 में बाल श्रम के खिलाफ एक अंतरराष्ट्रीय कानून की मांग को लेकर श्री सत्यार्थी ने ग्‍लोबल मार्च अगेंस्‍ट चाइल्‍ड लेबर के बैनर तले एक विश्वव्यापी यात्रा का आयोजन किया था. इस यात्रा के माध्यम से बाल श्रम को खत्‍म करने के लिए 70 लाख से अधिक लोगों को एकजुट और गोलबंद किया था.
इस मार्च ने एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, उत्तरी अमेरिका, यूरोप सहित 103 देशों की यात्रा करते हुए 80,000 से अधिक किलोमीटर की दूरी तय की थी. मार्च में भाग ले रहे यात्रियों ने 'डाउन डाउन-चाइल्ड लेबर' और 'वी वांट एडूकेशन’के नारों से सभी दिशाओं को गुंजायमान कर दिया था. इस यात्रा में तमाम देशों के राष्ट्राध्यक्ष और राजा-रानी से लेकर वैश्विक नेताओं और जानेमाने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया.


ग्‍लोबल मार्च में सत्यार्थी के नेतृत्व में पूर्व बाल मजदूरों ने भाग लेते हुए अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के जिनेवा के 86वें सम्मेलन में बाल श्रम के सबसे बदतर प्रकारों के खिलाफ एक मजबूत अंतरराष्ट्रीय कानून बनाने का आह्वान किया था. जिसके बाद जून 1999 में आईएलओ कन्‍वेंशन-182 की शुरुआत हुई. जिसको सर्वसम्‍मति से अपनाने की प्रक्रिया में इसका सबसे पहले समर्थन करने वाला देश सेशेल्‍स था, जिसने सितंबर, 1999 में अपने समर्थन की पुष्टि की. अब 22 साल बाद टोंगा इसका समर्थन करने वाला 187वां सदस्य देश है.

इस कन्‍वेंशन का समर्थन करते हुए इस पर हस्ताक्षर करने वाला देश बाल श्रम को खत्‍म करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दर्शाता है. प्रत्येक हस्ताक्षरकर्ता देश अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इसके लिए बाध्य हो जाता है कि वह अपनी राष्ट्रीय नीतियों और व्‍यवहारों को कन्‍वेंशन की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाएगा. साथ ही वह इस बारे में आईएलओ को नियमित रूप से अपनी रिपोर्ट भी देगा.


कन्‍वेंशन पारित होने के बाद से ही कैलाश सत्‍यार्थी और ग्लोबल मार्च अगेंस्ट चाइल्ड लेबर लगातार दुनियाभर के महत्वपूर्ण नेताओं, विभिन्‍न देशों की सरकारों और उनके प्रमुखों के साथ लगातार संवाद के जरिए इसका वैश्विक स्‍तर पर समर्थन करने की वकालत करते रहे हैं. सत्यार्थी कन्‍वेंशन-182 की जवाबदेही तय करने और उसके प्रभावी कार्यान्‍वयन की आवश्‍यकता पर लगातार जोर दे रहे हैं.

सत्यार्थी ने इस दौरान कन्वेशन-182 पर हस्ताक्षर करने वाले सभी 187 देशों के लोगों, उनकी सरकारों और विशेषकर टोंगा तथा आईएलओ को बधाई दी है. उन्होंने कहा, 'आज का दिन उन लाखों बच्‍चों और कार्यकर्ताओं के जीत का दिन है, जिन्‍होंने बाल श्रम के खिलाफ 103 देशों की 80,000 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए ग्‍लोबल मार्च अगेंस्‍ट चाइल्‍ड लेबर का सफर पूरा किया था. इसमें कोई संदेह नहीं है कि वर्तमान महामारी और उससे उपजे आर्थिक संकट से दुनियाभर में बाल श्रम में वृद्धि होगी.'

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सत्यार्थी ने कहा- 'चुनौती बड़ी है, लेकिन इससे घबराने की जरूरत नहीं है. यह हमारे बच्चों को नीतियों, संसाधनों और सामूहिक कार्रवाई की तात्कालिकता को प्राथमिकता देने का अवसर प्रदान करता है. इसको ध्‍यान में रखते हुए अब पूरी दुनिया को 2021 के संयुक्त राष्ट्र बाल श्रम उन्मूलन के लिए एकजुट हो जाना चाहिए। मैं उन लाखों लोगों से आह्वान करता हूं जो 22 साल पहले बाल श्रम को समाप्त करने के लिए इस लड़ाई में शामिल हुए थे और आज भी वे उसी प्रतिबद्धता से इस सामाजिक बुराई के खात्में के लिए लड़ रहे हैं. अगर एकजुट होकर हम इस बुराई के खिलाफ लड़ते रहें, तो मुझे विश्‍वास है कि मैं अपने जीवनकाल में ही इसका अंत देख सकूंगा.'
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