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कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और UK के बाद अब US के सांसदों ने भी किसान प्रदर्शन पर चिंता जताई

अमेरिकी सांसदों ने भी किया भारत में जारी किसान आंदोलन का समर्थन (फोटो- AFP)
अमेरिकी सांसदों ने भी किया भारत में जारी किसान आंदोलन का समर्थन (फोटो- AFP)

Kisan Andolan: भारत में जारी किसानों के आन्दोलन को कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन के बाद अब अमेरिका के भी कई सांसदों का समर्थन मिल गया है. कई अमेरिकी सांसदों ने इस प्रदर्शन और इसके खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई के प्रति चिंता जाहिर की है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 9, 2020, 7:57 AM IST
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वाशिंगटन. अमेरिका (US) के तीन वरिष्ठ सांसदों ने भारत में कृषि सुधार कानूनों के खिलाफ किसानों के प्रदर्शनों (Farmer Protest In India) को दबाने की खबरों पर चिंता जताई है. इसके अलावा अमेरिका के कई सांसदों और सिख समुदाय की प्रमुख हस्तियों ने भारत में नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों का समर्थन किया और उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने की अनुमति देने का अनुरोध किया है. इससे पहले कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और ऑस्ट्रेलिया-ब्रिटेन के सांसदों ने भारत में जारी किसान आंदोलन के प्रति चिंताएं जाहिर की थीं.

अमेरिका तीन सांसदों ने कहा, 'इकट्ठा होने की स्वतंत्रता, प्रेस की स्वतंत्रता और नागरिक समाज के अधिकारों के प्रति सम्मान एक कार्यशील लोकतंत्र के मुख्य घटक हैं. इस साल हम यह देखकर काफी चिंतित हैं कि भारत सरकार ने कई भारतीयों के इन अधिकारों को सीमित कर दिया. ये सिर्फ किसानों के साथ नहीं हुआ, बल्कि धार्मिक अल्पसंख्यकों और मानवाधिकार संगठनों के साथ भी हुआ है.' अमेरिका में भारतीय राजदूत तरणजीत सिंह संधू को लिखे पत्र में संसद सदस्य जॉन गारमेन्डी, जिम कोस्टा और शैला जैक्सन ली ने कहा कि सरकारें निश्चित रूप से अपनी आंतरिक कृषि नीतियां बना सकती हैं. लेकिन 'हम भारत सरकार द्वारा इन प्रदर्शनों पर दी गई प्रतिक्रिया से चिंतित हैं.' उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रदर्शन कर रहे किसानों के शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने के अधिकार को कथित रूप से दबाया है. कोस्टा ने मंगलवार को एक बयान में कहा, 'भारत की स्थिति परेशान करने वाली है.' उन्होंने कहा, 'शांति पूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार लोकतांत्रिक स्वतंत्रता की बुनियाद है और इसका संरक्षण होना चाहिए.'

अमेरिका के कई सांसदों से भी मिला समर्थन
बता दें कि भारत में पंजाब, हरियाणा और कुछ अन्य राज्यों के हजारों किसान केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में 26 नवंबर से दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं. इन कानूनों को 'किसान विरोधी' बताते हुए कई किसानों ने दावा किया है कि इससे न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था खत्म हो जाएगी और उन्हें बड़े कारोबारी घरानों के ‘रहम’ पर रहना होगा. हालांकि सरकार का कहना है कि नए कानून से किसानों को बेहतर अवसर मिलेंगे और कृषि के क्षेत्र में नई तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा. अमेरिकी कांग्रेस के सांसद डग लामाल्फा ने कहा, 'भारत में अपनी आजीविका बचाने की खातिर और सरकार के भ्रामक, अस्पष्ट नियम-कायदों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे पंजाबी किसानों का मैं समर्थन करता हूं.'
कैलिफोर्निया से रिपब्लिकन सांसद ने कहा, 'पंजाबी किसानों को अपनी सरकार के खिलाफ हिंसा के भय के बगैर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की इजाजत होनी चाहिए.' हालांकि भारत ने किसानों के प्रदर्शन पर विदेशी नेताओं के बयानों को 'भ्रामक' और 'अनुचित' बताया और कहा है कि यह एक लोकतांत्रिक देश का आंतरिक मामला है. डेमोक्रेट सांसद जोश हार्डर ने कहा, 'भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है. उसे अपने नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने की अनुमति देनी चाहिए. मैं इन किसानों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सार्थक बातचीत की अपील करता हूं.' सांसद टी जे कॉक्स ने कहा कि भारत को शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को बरकरार रखना चाहिए और अपने नागरिकों की रक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए. सांसद एंडी लेवी ने कहा कि उन्हें भारत में किसानों के आंदोलन से प्रेरणा मिली है. उन्होंने कहा, 'मैं इसे 2021 में जनता की ताकत उभरने के तौर पर देखता हूं.'



सिख समुदाय ने भी मोदी सरकार से की मांग
उधर अमेरिका के सिख समुदाय ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रदर्शनरत किसानों की मांगें मानने और उनसे बातचीत जारी रखने का अनुरोध किया. प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में ‘सिख्स ऑफ अमेरिका’ ने किसानों के प्रदर्शन को मान्यता देने का अनुरोध किया है. भारतीय मूल के अमेरिकी सिख जस्सी सिंह तथा सिख समुदाय की अन्य प्रमुख हस्तियों के हस्ताक्षरित पत्र में समाज के एक वर्ग द्वारा किसानों के जायज प्रदर्शन को अलगाववादी या खालिस्तान समर्थक आंदोलन से प्रेरित बताने पर आपत्ति जताई गई है. जस्सी सिंह ने कहा कि यह एक राष्ट्रीय आंदोलन है और यह सिर्फ पंजाब तक सीमित नहीं है. पत्र में कहा गया है, 'कृपया किसानों की मांगों को स्वीकार करें.'



भारत में किसानों के आंदोलन को अमेरिका के मुख्यधारा के मीडिया ने भी जगह दी है. ‘न्यूयार्क टाइम्स’ ने लिखा है, ‘‘प्रदर्शन दिल्ली के बाहर तक फैल गया है. किसानों ने दक्षिणी राज्यों केरल और कर्नाटक तथा पूर्वोत्तर के राज्य असम में भी मार्च निकाला और बैनरों के साथ प्रदर्शन किया. उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों ने भी एकजुटता दिखाते हुए दिल्ली से लगी राज्य की सीमा पर प्रदर्शन किया.' ‘सीएनएन’ की एक खबर के मुताबिक हजारों किसान नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर डटे हैं. इन किसानों को आशंका है कि नए कानूनों से उनकी रोजीरोटी पर असर पड़ेगा.
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