इन दो पत्रकारों को म्यांमार ने क्यों दी थी सज़ा, जेल में रहना पड़ा 500 दिन

इन दो पत्रकारों को म्यांमार ने क्यों दी थी सज़ा, जेल में रहना पड़ा 500 दिन
म्यांमार की जेल से रिहा दोनों पत्रकार

दोनों पत्रकारों, वा लोन और क्याव सो ओ को दी गई सजा का अतंरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध हुआ था. इन्हें मंगलवार को रिहा किया गया.

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म्यांमार की जेल में 500 दिन तक जेल में कैद रहे दो पत्रकारों को रिहा कर दिया गया. अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी Reuters के लिए रिपोर्टिंग करने वाले इन दोनों पत्रकारों को साल 2017 के दिसंबर में अरेस्ट किया गया था. बता दें 33 वर्षीय पत्रकार वा लोन और 29 वर्षीय क्याव सो ओ, उस वक्त चर्चा में आयए जब वे म्यांमार प्रांत के रखाइन प्रांत में रोहिंग्या संकट की रिपोर्टिंग करने गए थे.

दोनों पत्रकारों के रिपोर्ट की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी प्रशंसा हुई थी. उन्हें प्रतिष्ठित पुलित्जर पुरस्कार से भी नवाजा गया था. हालांकि स्थानीय नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में म्यांमार की एक कोर्ट ने वा लोन और क्याव सो ओ को सात साल के जेल की सजा सुनाई थी.

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सजा का हुआ था विरोध
दोनों पत्रकारों को दी गई सजा का अतंरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध हुआ था. इन्हें मंगलवार को रिहा किया गया. म्यांमार के इस फैसले के संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियों गुतरेस ने खुशी जाहिर की. वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस फैसले का स्वागत किया.

यह है मामला
बीते साल 2 सितंबर 2018 को दोनों पत्रकारों को ऑफिशियल सीक्रेट ऐक्ट का दोषी मानते हुए सात-सात साल जेल की सुनाई गई थी. इन पत्रकारों को दो पुलिसकर्मियों से मुलाकात के बाद 12 दिसंबर 2017 की रात को गिरफ्तार किया गया था. सरकारी वकील के अनुसार, इन पुलिसवालों ने कथित रूप पर उन्हें गोपनीय दस्तावेज सौंपे थे.

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वहीं रॉयटर के पत्रकारों ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि उन्हें इन डिन गांव में 10 रोहिंग्या मुस्लिमों की न्यायेत्तर हत्याओं का खुलासा करने के लिए सजा दी गई है.

आंग सान सू की ने सजा देने पर कहा था
म्यामांर की नेता आंग सान सू की ने कहा था कि रखाइन प्रांत में एक नरसंहार की जांच करने के लिए जेल की सजा पाने वाले रॉयटर के दो पत्रकारों को इसलिए सजा नहीं दी गई है कि वे पत्रकार है बल्कि उन्होंने कानून तोड़ा है.

उन्होंने कहा था, ‘पत्रकारों को  इसलिए सजा नहीं दी गई कि वे पत्रकार हैं बल्कि अदालत ने फैसला दिया कि उन्होंने सरकारी गोपनीयता कानून तोड़ा है.’

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