जानिए निर्भया के दोषियों को फांसी पर लटकाने पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने क्या लिखा

निर्भया दोषियों को फांसी पर लटकाने पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी काफी कुछ लिखा गया है.
निर्भया दोषियों को फांसी पर लटकाने पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी काफी कुछ लिखा गया है.

न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि चारों दोषियों को फांसी पर लटकाने के साथ ही लंबे वक्त से चला आ रहा ये मामला खत्म हो गया.

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  • Last Updated: March 20, 2020, 9:54 AM IST
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निर्भया (Nirbhaya) के दोषियों को फांसी पर लटकाने की खबर अंतरराष्ट्रीय मीडिया (International Media) में भी रिपोर्ट की गई है. दुनियाभर के अखबारों और न्यूज वेबसाइट्स ने इस मामले पर गंभीरता से लिखा है. निर्भया के दोषियों को फांसी की सजा देने पर न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक लंबी रिपोर्ट लिखी है. रिपोर्ट में निर्भया रेप और मर्डर मामले का विस्तार से जिक्र किया गया है.

न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि चारों दोषियों को फांसी पर लटकाने के साथ ही लंबे वक्त से चला आ रहा ये मामला खत्म हो गया. शुक्रवार सुबह चारों दोषियों को फांसी पर लटका दिया गया. दिसंबर 2012 के निर्भया रेप और मर्डर मामले में चारों दोषियों ने एक युवा महिला के साथ बर्बरता से रेप और उसके बाद हत्या कर दी थी.

दिल्ली की व्यस्त सड़क पर हुई इस घटना ने देश के साथ पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था. इस घटना ने महिलाओं को लेकर भारतीय मानसिकता को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया था. न्यूयॉर्क टाइम्स लिखता है कि फांसी दिए जाने के बाद पीड़िता की मां ने कहा कि इंसाफ में देरी हुई लेकिन आखिर में उनकी बेटी को न्याय मिला. उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था में उनका भरोसा मजबूत हुआ है.



निर्भया के बारे में विस्तार से लिखते हुए न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि 23 साल की पीड़िता फीजियोथिरेपी की इंटर्न थी और वो डॉक्टर बनने के सपने देखा करती थी. उसने अपने माता-पिता से कहा था कि उसकी शादी को लेकर जो पैसे उन्होंने इकट्ठा कर रखे हैं, उन पैसों को वो उसकी पढ़ाई पर खर्च करें. रेप के दौरान बुरी तरह से जख्मी किए जाने की वजह से निडर और साहसी निर्भया की मौत हो गई. इस पूरी घटना ने देश के भीतर असंतोष की लहर पैदा कर दी थी. भारत में महिलाओं पर होने वाले अत्याचार के हर साल बढ़ते मामलों पर बहस शुरू हो गई थी.
द वाशिंगटन पोस्ट ने भी इस मामले पर लंबी रिपोर्ट लिखी है. वाशिंगटन पोस्ट ने लिखा है कि भारत ने शुक्रवार सुबह को 2012 के रेप और मर्डर मामले के 4 दोषियों को फांसी पर लटका दिया. इसके साथ ही एक दर्दनाक चैप्टर क्लोज हो गया, जो ये सवाल कर रहा था कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों से निपटने में देश ने कितनी प्रगति की है.

द वाशिंगटन पोस्ट ने लिखा है कि जिस तिहाड़ जेल में दोषियों को फांसी दी गई, उसके बाहर दर्जनों लोगों की भीड़ देखी गई. हालांकि कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों की वजह से उन्हें घरों में रहने का निर्देश दिया गया है. पिछले 5 वर्षों में भारत में दी जाने वाली ये पहली फांसी है.

द गार्जियन ने लिखा है कि भारत ने रेप और मर्डर के 4 दोषियों को शुक्रवार सुबह फांसी दे दी. दिसंबर 2012 में एक युवा महिला के साथ हुई बर्बरता ने देश के साथ पूरी दुनिया के लोगों को सन्न कर दिया था. देश के लिए ये शर्मनाक घटना थी. महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराध के रिकॉर्ड बढ़ते जा रहे थे.
द गार्जियन ने लिखा है कि दिल्ली के बाहरी इलाके में स्थित तिहाड़ जेल में निर्भया के दोषियों को फांसी दी गई. आगे लिखा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के फांसी के फैसले को रिव्यू करने से मना करने के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी दोषियों की दया याचिका ठुकरा दी थी.

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