रोहिंग्या समुदाय के दर्द को बयां करती किताब - रोहिंग्या की जुबानी

पेंगुइन रैंडम हाउस (इंडिया) ने मंगलवार को बताया कि ‘‘फर्स्ट दे इरेज्ड ऑर नेम: ए रोहिंग्या स्पीक्स’’ का औपचारिक विमोचन 9 सितंबर को किया जाएगा.

News18Hindi
Updated: September 4, 2019, 12:40 PM IST
रोहिंग्या समुदाय के दर्द को बयां करती किताब - रोहिंग्या की जुबानी
रोहिंग्या समुदाय के दर्द को बयां करती किताब
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Updated: September 4, 2019, 12:40 PM IST
नयी दिल्ली : रोहिंग्या (Rohingya community) मानवीय संकट की भयावहता से दुनिया परिचित है, ऐसे में एक नई पुस्तक इस समुदाय के दर्द को एक ऐसे रोहिंग्या की जुबानी बयां करेगी जो अपने ही देश में ऐसे व्यक्ति के रूप में पला-बढ़ा जिसके पास नागरिकता (Citizenship) नहीं थी. पेंगुइन रैंडम हाउस (इंडिया) ने मंगलवार को बताया कि ‘‘फर्स्ट दे इरेज्ड ऑर नेम: ए रोहिंग्या स्पीक्स’’ का औपचारिक विमोचन 9 सितंबर को किया जाएगा. फ्रांसीसी पत्रकार सोफी अंसेल की यह किताब हबीबुरहमान के शब्दों में वैश्विक मानवीय संकट को बयां करेगी.

हबीबुरहमान का जन्म पश्चिमी बर्मा के गांव में हुआ था और वह वहीं पला-बढ़ा. पश्चिमी बर्मा को अब म्यामां के नाम से जाना जाता है. हबीबुरहमान 1979 में उस समय देश की नागरिकता से अचानक वंचित हो गया था, जब देश के सैन्य नेता ने यह घोषणा की थी कि रोहिंग्या मान्यता प्राप्त उन आठ जातीय समूहों में शामिल नहीं हैं जो ‘राष्ट्रीय जातीय समूह’ हैं.

प्रकाशक ने बताया कि 1982 के बाद से लाखों रोहिंग्या को अपने घर छोड़कर जाना पड़ा था. वर्ष 2016 और 2017 में सरकार ने ‘‘जातीय सफाई’’ की प्रक्रिया तेज कर दी थी और छह लाख से अधिक रोहिंग्या को सीमा पार करके बांग्लादेश जाना पड़ा था. लाखों की संख्या में बिना दस्तावेज़ वाले रोहिंग्या बांग्लादेश में रह रहे हैं. इन्होंने दशकों पहले म्यांमार छोड़ दिया था.

उसने कहा कि पहली बार ऐसा होगा जब एक रोहिंग्या वैश्विक मानवीय संकट के पीछे का सच उजागर करेगा. एक बच्चे की जुबानी हम रोहिंग्या लोगों पर हुए अत्याचारों के बारे में जानेंगे और हबीबुरहमान की आंखों से वह हिंसा देखेंगे जो उसने 2000 में देश छोड़कर जाने से पहले अपने जीवन में झेली.

बड़ी संख्या में रोहिंग्या मुसलमान जर्जर कैंपो में रहे हैं. रोहिंग्या मुसलमानों को व्यापक पैमाने पर भेदभाव और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा है. बहुत सारे अस्थायी शिविरों में या मदद कर रहे लोगों के साथ रह रहे हैं.  महिलाएं और बच्चे भूखे और कुपोषित हालत के शिकार हुए.

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First published: September 4, 2019, 12:40 PM IST
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