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नेपाली कांग्रेस का आरोप- ओली सरकार की शह पर हो रहा है राजशाही के समर्थन में आंदोलन

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली (फाइल फोटो)
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली (फाइल फोटो)

Pro-monarchy rallies in Nepal: नेपाली कांग्रेस के प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने ओली सरकार पर राजशाही के समर्थन में हो रही रैलियों को मौन समर्थन देने का गंभीर आरोप लगाया है. ये रैलियां नेपाल में फिर से राजशाही कायम करने और देश को हिंदू राष्ट्र घोषित करने के समर्थन में हो रही हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 15, 2020, 8:09 AM IST
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काठमांडू. नेपाल (Nepal) की मुख्य विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस ने सोमवार को प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली (KP Sharma Oli) नीत सरकार पर आरोप लगाया कि वह हाल में राजशाही के समर्थन में हुई रैलियों (Pro-monarchy rallies) की मौन हिमायत कर रहे हैं. हाल में देश के कई हिस्सों में राजशाही के समर्थन में रैलियां की गई थी जिनमें मांग की गई थी कि संवैधानिक राजशाही को बहाल किया जाए और नेपाल को फिर से एक हिन्दू राष्ट्र घोषित किया जाए.

नेपाली कांग्रेस के प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने मध्य नेपाल के हेटौडा में आयोजित सरकार विरोधी प्रदर्शन को संबोधित करते हुए आरोप लगाया, " ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री ओली उन लोगों के पीछे खड़े हैं जो प्रदर्शन कर रहे हैं. अन्यथा वे इस समय कैसे सड़कों पर आ सकते हैं ?" देउबा ने फिलहाल राजशाही को फिर से बहाल करने की किसी भी संभावना से इनकार किया.

उन्होंने कहा कि किसी को भी देश में राजशाही की बहाली को लेकर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए. देउबा का निशाना हाल में पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र के वफादारों द्वारा देश के अलग-अलग हिस्सों में आयोजित किए गए प्रदर्शनों पर था. नेपाल 2008 में धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बना था. इससे पहले 2006 में जन आंदोलन हुआ था और राजशाही को खत्म कर दिया गया था.

नेपाल के कई शहरों में राजशाही के समर्थन में हुए प्रदर्शन


काठमांडू में विशाल रैली आयोजित करने से पहले राजशाही समर्थक और हिंदुत्व वादी प्रदर्शनकारियों ने हेटुडा, बुटवल, धनगढ़ी, नेपानगर, महेंद्रनगर, बरदिया, बिरजगंज, जनकपुर, नवापुर, पोखरा, रौतहट और बिराटनगर में इसी तरह की रैलियां आयोजित की थीं. राष्ट्रीय शक्ति नेपाल, गोरक्षा नेपाल, बिश्व हिंदू महासंघ, राष्ट्रीय सरोकार मंच, शिव सेना नेपाल, बीर गोरखाली और मातृभूमि समरसता नेपाल जैसे संगठन इन रैलियों में सबसे आगे रहे हैं.
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