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ईरान ने ऑस्ट्रेलिया की लेक्चरर को किया रिहा, जासूसी के आरोप में थी जेल में बंद

फोटो सौ. (AP)
फोटो सौ. (AP)

ऑस्ट्रेलिया की ऐकडेमिक काइली मूर गिलबर्ट (Kylie Moore Gilbert) को ईरान (Iran) ने दो साल बाद रिहा कर दिया है. उन्हें जासूसी के आरोप में कैद किया गया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 26, 2020, 6:50 PM IST
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तेहरान. ऑस्ट्रेलिया और ईरान (Australia And Iran) ने कथित तौर पर अपने यहां कैद एक-दूसरे के नागरिकों को रिहा किया है. इस एक्सचेंज में ऑस्ट्रेलिया की 33 साल की ऐकडेमिक काइली मूर-गिलबर्ट (Kylie Moore Gilbert) भी आजाद की गई हैं. उनकी रिहाई पर प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने राहत मिलने की बात कही है. गिलबर्ट को जासूसी के आरोप में दो साल से ज्यादा के लिए जेल में बंद कर दिया गया था. ऑस्ट्रेलिया ने भी ईरान के तीन नागरिकों को आजाद किया है. हालांकि, मॉरिसन ने 'एक्सचेंज' की पुष्टि नहीं की है. दरअसल, ऐसे आरोप लगते रहे हैं कि ईरान पश्चिमी देशों से अपनी मांग पूरी कराने के लिए उनके नागरिकों को कैद कर लेता है और यह एक्सचेंज भी इसी लिए किया गया. गिलबर्ट ने अपनी रिहाई के लिए ऑस्ट्रेलिया की सरकार और राजनयिकों के साथ उन समर्थकों को धन्यवाद दिया जिन्होंने उनके आजादी के लिए आंदोलन छेड़ रखा था. उन्होंने कहा कि उनके मन में ईरान और वहां के बहादुर लोगों के लिए सम्मान और प्यार है. गिलबर्ट मेलबर्न यूनिवर्सिटी में मिडिल ईस्टर्न स्टडीज की लेक्चरर थीं. वह 2018 में ऐकडेमिक कॉन्फ्रेंस के लिए तेहरान गई थीं और वापस आते वक्त उन्हें हिरासत में ले लिया गया. उन्हें जासूसी के आरोप में 10 साल की सजा देकर कुख्यात एविन जेल भेज दिया गया.

गिलबर्ट के अलावा पश्चिमी देशों के कई नागरिकों को ईरान में जासूसी के आरोप में कैद कर लिया जाता है. संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं का मानना है कि ऐसा जानबूझकर पैसे या पश्चिम से किसी और तरह की मांग पूरी कराने के लिए किया जाता है. तेहरान इस दावे का खंडन करता आया है. गिलबर्ट ने मॉरिसन को लिखे अपने खत में कहा है कि उन्हें ऑस्ट्रेलिया की सरकार से बदले में कुछ मांगने के लिए जेल भेजा गया था. गिलबर्ट को रिहा करने के लिए ईरान के ऊपर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ता जा रहा था. वह कई बार भूख हड़ताल पर गईं और कई बार लंबे वक्त के लिए सॉलिटरी कन्फाइनमेंट दिए जाने पर उनकी सेहत गिरने लगी. देश की खचाखच भरी जेलों में जब कोरोना वायरस फैलने का खतरा बढ़ने लगा तो उन्हें कारचक जेल भेजा गया. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की सरकार से उन्हें रिहा कराने के लिए और मेहनत करने की अपील की. उन्होंने कहा कि उनके अधिकारों का हनन किया जा रहा है और मानसिक यातनाएं दी जा रही हैं.

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टॉप ईरानी जनरल को मार दिया गया
गिलबर्ट को हिरासत में लेने से ईरान और पश्चिम के बीच तनाव बढ़ गया था. अमेरिका ने बगदाद में एक टॉप ईरानी जनरल को मार दिया था जिसके जवाब में ईरान ने अमेरिका के मिलिट्री बेस पर हमला कर दिया था. ईरान के टीवी ने फुटेज जारी किया जिसमें हिजाब पहने गिलबर्ट वाइट एयरक्राफ्ट में बैठतीं दिखाई गई. वहीं, जिन ईरानी नागरिकों को छोड़ा गया है उन्हें 'इकनॉमिक ऐक्टिविस्ट' बताया गया है. दावा किया जा रहा है कि उनकी पहचान छिपाने के लिए उन्हें बेसबॉल कैप, सर्जिकल मास्क और आउटफिट पहनाया गया.
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