ब्रिटेन: 39 बारूदी सुरंगों का पता लगाने वाला बहादुर चूहा 'गोल्ड मेडल' से सम्मानित

फोटो सौ. (ट्विटर)
फोटो सौ. (ट्विटर)

अफ्रीकी नस्ल के एक विशाल चूहे को ब्रिटेन की एक संस्था ने बहादुरी के लिए गोल्ड मेडल (Gold Medal) से सम्मानित किया है. दरअसल, इस चूहे (Rat) ने कंबोडिया में अपने सूंघने की क्षमता से 39 बारूदी सुरंगों का पता लगाया था.

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  • Last Updated: September 26, 2020, 6:02 PM IST
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डोडोमा. अभी तक आपने लोगों को गोल्ड मेडल हासिल करते तो खूब देखा होगा. कभी किसी को पढ़ाई के लिए तो कभी किसी को खास क्षेत्र में विशिष्ट प्रदर्शन के लिए गोल्ड मेडल से सम्मानित किया जाता है. लोगों को उनकी बहादुरी के लिए भी स्वर्ण पदक से नवाजा जाना आम बात है लेकिन क्या आपने कभी किसी चूहे को गोल्ड मेडल लेते देखा है? दरअसल, अफ्रीकी नस्ल के एक विशाल चूहे (Rat) को ब्रिटेन की एक संस्था ने बहादुरी के लिए गोल्ड मेडल (Gold Medal) से सम्मानित किया है. इस चूहे ने कंबोडिया में अपने सूंघने की क्षमता से 39 बारूदी सुरंगों का पता लगाया था. बताया जा रहा है कि अपने काम के दौरान इस चूहे ने 28 जिंदा विस्फोटकों का भी पता लगाकर हजारों लोगों की जान बचाई है. अफ्रीका के इस जाइंट पाउच्ड चूहे का नाम मागावा है जो सात साल का है.

शुक्रवार को ब्रिटेन की चैरिटी संस्था पीडीएसए ने इस चूहे के काम से प्रभावित होकर गोल्ड मेडल प्रदान किया. मागावा को इस काम के लिए चैरिटी संस्था एपीओपीओ ने प्रशिक्षित किया था. इस चैरिटी ने बताया कि मागावा ने अपने काम से कंबोडिया में 20 फुटबॉल मैदानों (141,000 वर्ग मीटर) के बराबर के क्षेत्र को बारूदी सुरंगों और विस्फोटकों से मुक्त किया है. मागावा का वजन 1. 2 किलो है, इसलिए बारूदी सुरंगों के ऊपर से चलने के समय भी इसके वजन से विस्फोट नहीं होता है. यह इतना प्रशिक्षित है कि केवल 30 मिनट में एक टेनिस कोर्ट के बराबर एरिया को सूंघकर जांच कर सकता है. जबकि, इतने बड़े क्षेत्र को एक आम इंसान बम डिटेक्टर की मदद से लगभग चार दिनों में जांच कर पाएगा. इस दौरान उसके वजन से विस्फोट का भी खतरा बना रहेगा.

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चूहों को चैरिटी संस्था एपीओपीओ ट्रेंड करती है
इन चूहों को चैरिटी संस्था एपीओपीओ ट्रेंड करती है. यह संस्था बेल्जियम में रजिस्टर्ड है और अफ्रीकी देश तंजानिया में काम करती है. यह संस्था 1990 से ही मागावा जैसे विशाल चूहों को ट्रेनिंग दे रही है. एक चूहे को ट्रेनिंग देने में इस संस्थान को एक साल का समय लगता है. इसके बाद उस चूहे को हीरो रैट की उपाधि दी जाती है. पूरी तरह ट्रेंड और प्रमाणित होने के बाद ये चूहे स्निफर डॉग की तरह काम करते हैं.
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