47 साल से चांद पर क्यों नहीं भेजा जा सका कोई इंसानी मिशन?

अमेरिकी अभियान के तहत 1972 में यूजीन सेरनन चांद पर कदम रखने वाले आखिरी व्यक्ति थे. उन्होंने 6 फरवरी 1972 को चांद पर कुछ शानदार गोल्फ शॉट भी लगाए थे. इसके बाद अमेरिका समेत किसी देश ने पृथ्वी के इस उपग्रह पर कोई इंसानी मिशन नहीं भेजा.

News18Hindi
Updated: May 2, 2019, 4:34 PM IST
47 साल से चांद पर क्यों नहीं भेजा जा सका कोई इंसानी मिशन?
बीते 47 साल से किसी देश ने चांद पर इंसानी मिशन नहीं भेजा है.
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Updated: May 2, 2019, 4:34 PM IST
ज्यादा दिन नहीं बीते जब चीन ने चांद पर कपास के पौधे उगाने का दावा किया था. हालांकि, 16 जनवरी 2019 को किए गए इस दावे के तीसरे ही दिन इन पौधों के खत्म होने की जानकारी पूरी दुनिया को दी गई. इससे पहले भारत के चंद्रयान-1 के आंकड़ों से पता चला कि चांद पर पानी मौजूद है. भारत ने 14 नवंबर, 2008 को चांद पर तिरंगा फहराकर इतिहास रच दिया था. पिछले कुछ साल में चांद पर मानव को बसाने की तैयारियों की भी खूब चर्चा हुई.

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चांद पर पहला इंसानी कदम रखते हुए 21 जुलाई, 1969 को नील आर्मस्ट्रॉन्ग ने कहा था कि इंसानियत के लिए ये एक छोटा कदम, पूरी मानव जाति के लिए बड़ी छलांग साबित होगा. इसके बाद अमेरिका ने पांच और अभियान चांद पर भेजे. अमेरिकी अभियान के तहत 1972 में यूजीन सेरनन ने चांद पर आखिरी बार कदम रखा. उन्होंने 6 फरवरी, 1972 को चांद पर गोल्फ के कुछ शनदार शॉट्स भी लगाए. इसके बाद फिर कोई इंसान चांद की सतह पर झंडा लहराने नहीं गया.

अमेरिका ने करीब पांच दशक बाद 2017 में चांद पर फिर इंसानी मिशन भेजने की घोषणा की. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीनेट से बिना सलाह लिए मिशन के आदेश पर हस्ताक्षर भी कर दिए. यहां यह सवाल बाजिव है कि 1972 से अब तक अमेरिका समेत दुनिया के किसी भी देश ने चांद पर इंसानी मिशन क्यों नहीं भेजा?

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जानकारों का कहना है कि चांद पर इंसानी मिशन को भेजने में बहुत ज्यादा खर्चा आता है, जबकि इसके मुकाबले वैज्ञानिक फायदा बहुत कम होता है. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे अभियान वैज्ञानिक फायदे के लिए कम और अंतरिक्ष पर नियंत्रण की कवायद ज्यादा होते हैं. दूसरे शब्दों में कहें तो ऐसे अभियानों के सियासी फायदे ज्यादा होते हैं. ऐसी ही एक कोशिश के तहत अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डब्ल्यू. जॉर्ज बुश ने 2004 में चांद पर इंसानी मिशन भेजने की घोषणा की थी. अनुमान लगाया गया कि अभियान पर करीब 7,218 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. कांग्रेस ने इसे स्वीकार नहीं किया और मिशन ठंडे बस्ते में चला गया.

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इसके अलावा नासा के कई अन्य परियोजनाओं में उलझे होने के कारण भी चांद पर इंसानी मिशन पर काम नहीं हो पाया. इस बीच नासा ने नए उपग्रह, अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की कक्षा में लांच, अन्य आकाशगंगाओं और ग्रहों पर शोध किए हैं. ऐसा नहीं है कि इस बीच नासा ने चांद पर इंसानी मिशन भेजने की बात ही नहीं की. नासा मानता है कि इंसान के चांद पर पहुंचने से नई-नई जानकारियां हासिल होंगी, जो मानवजाति के लिए फायदेमंद होंगी. इसलिए नासा बार-बार कहता रहा है कि चांद पर फिर इंसानी मिशन भेजा जाना चाहिए. लेकिन, कांग्रेस भारी-भरकम खर्च के कारण मंजूरी नहीं देती.

पिछले कुछ वर्षों से बार-बार चांद पर इंसान को बसाने की बात की जा रही है. ऐसी योजनाओं का दारोमदार सस्ती तकनीक और सस्ते अंतरिक्ष यानों पर टिका है. चीन ने 2018 तक और रूस ने 2031 तक चांद पर इंसान को भेजने की घोषणा की है. अमेरिका भी पीछे नहीं रहना चाहता, लेकिन इस बार उसने इसके लिए आम बजट का एक फीसदी हिस्सा ही रखा है, जबकि अपने पिछले अभियानों में उसने पांच फीसदी खर्च किया था.

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