लेक्चरर यह बोल 'इंजीनियरिंग करना काले लड़कों के डीएनए में नहीं' हुए बर्खास्त

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

ब्रिटेन के एक इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय के लेक्चरर (University lecturer) स्टीफन लामनबाए (Stephen Lamonby) को नस्लीय रूप से काले छात्रों पर नस्लीय टिप्पणी करने पर बर्खास्त कर दिया गया.

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हैम्पशायर. एक इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय के लेक्चरर (University lecturer) स्टीफन लामनबाए (Stephen Lamonby) को नस्लीय रूप से काले छात्रों पर नस्लीय टिप्पणी करने पर बर्खास्त कर दिया गया. साउथेम्प्टन में सोलेंट यूनिवर्सिटी ने 73 वर्षीय स्टीफन लामनबाए को बर्खास्त कर दिया. उनके एक सहयोगी ने बताया कि स्टीफन ने कई टिप्पणियां की जिनमें से एक काले लड़कों पर थी. स्टीफन ने कहा था कि 'इंजीनियरिंग करना काले लड़कों के डीएनए में ही नहीं है'(Black Students dont have DNA) .

आरोपी लेक्चरर की टिप्पणियां बैठक में सुनाई गई

एक रोजगार ट्रिब्यूनल के दौरान स्टीफन ने डीएनए से सम्बंधित टिप्पणी किये जाने से साफ़ इनकार किया लेकिन अपने द्वारा की गई अन्य टिप्पणियों को पॉजिटिव स्टीरियोटाइप या सकारात्मक रूढ़िवादी शब्द कहा. जज कोलम ओ'रूर्के ने स्टीफन के अपने अनुचित बर्खास्तगी के दावे को ख़ारिज कर दिया. ब्रिस्टल सिविल एंड फैमिली जस्टिस सेंटर ने 28 मार्च 2019 को कैंपस कैंटीन में कोर्स लीडर डॉ जेनेट बोनर के साथ हुई बैठक के दौरान स्टीफन की टिप्पणियां को सुना.



'काले लोगों को हर तरह की मदद की जरूरत'
डॉ बोनर ने स्टीफन की शिकायत विश्वविद्यालय प्रशासन से उन्होंने बताया कि उन्होंने स्टीफन को यह कहते सुना कि वे काले छात्रों के लिए खेद महसूस करते हैं क्योंकि उनके डीएनए में इंजीनियरिंग करने की क्षमता नहीं है. मूलतः हैम्पशायर के निवासी स्टीफन ने ट्रिब्यूनल में ये तर्क दिए कि उनके द्वारा की गई स्टीरियो टाइप टिप्पणियां सकरात्मक थीं और और काले युवाओं पर किये गए कमैंट्स इसलिए किये क्योंकि उनके ह्रदय में कालों के लिए नरम स्थान है. इसके साथ ही वे समाज के वंचित वर्ग से आते हैं जिनमें अधिकतर युवाओं के पिता नहीं हैं और उन्हें हर तरह की मदद की जरूरत होती है.

जर्मन सबसे अच्छे इंजीनियर हैं: स्टीफन

कोर्ट में बताया गया कि स्टीफन ने कुछ ऐसी टिप्पणियां भी की जिनमें उन्होंने कहा कि 'यहूदी लोग दुनिया में सबसे चतुर हैं' और 'जर्मन सबसे अच्छे इंजीनियर हैं. विश्वविद्यालय की अनुशासनात्मक सुनवाई में स्टीफन को टिप्पणियां करने का दोषी पाए जाने पर बर्खास्त कर दिया गया.

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ट्रिब्यूनल की सुनवाई में जज ओ'रोर्क ने कहा कि समूहों को नस्ल, राष्ट्रीयता, जातीयता, धार्मिकता के समूहों में बांटना नस्लवादी नजरिया है और किसी जाती या राष्ट्र जैसे समूहों पर ख़ास तरह की खूबियों या गुणों को थोपना भी उसी नजरिये को दर्शाता है. उन्होंने यह भी कहा की काले युवाओं को अतिरिक्त मदद की जरूरत है जैसी टिप्पणियां भेदभावपूर्ण हैं और यहूदियों को लेकर कहे गए शब्द भी आक्रामक हैं. सॉलेंट यूनिवर्सिटी के एक प्रवक्ता ने इस सुनवाई पर अपनी ख़ुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह सुनवाई समानता और विविधता को बढ़ावा देने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
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