रसोई में धूल खा रही थी पेंटिंग, बेचने पर मिले 188 करोड़ रुपये, मकान मालिक के उड़े होश

फोटो सौ. (सोशल मीडिया)

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फ्रांस (France) में एक बुजुर्ग महिला के किचन (Kitchen) में लगी पुरानी सी पेंटिंग 188 करोड़ रुपये में बिकी. इस पेंटिंग को महिला ने अपने चूल्हे के ऊपर लगाया हुआ था. हालांकि महिला को यह नहीं पता था कि यह 13वीं सदी की पेंटिंग है.

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  • Last Updated: February 28, 2021, 10:45 AM IST
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सोशल वायरल. लोगों के घरों में कई सारे ऐसे पुराने सामान यहां-वहां पड़े हुए होते हैं, जिसकी कीमत के बारे में उन्हें पता भी नहीं होता. कबाड़ से दिखने वाले कुछ सामान कई बार इतने महंगे बिक जाते हैं कि लोग हैरान रह जाते हैं. ऐसा ही कुछ फ्रांस (France) में हुआ. जहां किचन में लगी एक पेंटिंग (Painting) 188 करोड़ रुपये में बिक गई. बेकार सी दिख रही इस पेंटिंग की इतनी बड़ी रकम पाकर मकान मालिक को भी यकीन नहीं हुआ. फ्रांस के उत्तरी भाग कॉम्पैनियन स्थित एक बुजुर्ग महिला की रसोई में एक पेंटिंग लगी हुई थी. इस पेंटिंग को महिला ने अपने चूल्हे के ऊपर लगाया हुआ था. हालांकि महिला को यह नहीं पता था कि यह 13वीं सदी की पेंटिंग है. एक दिन महिला ने उस पेंटिंग को बेचने के बारे में सोचा और उसकी बोली लगाई गई.

फ्रांस में इस पेंटिंग की नीलामी हुई. जब इस पेंटिंग की आखिरी बोली लगी तो बुजुर्ग महिला को भी यकीन नहीं हुआ. इस पेंटिंग को नीलामी के बाद महिला को € 24m यानि करीब 188 करोड़ रूपये मिले. इससे पहले तक कोई भी मध्ययुगीन पेंटिंग नीलामी में इतनी मंहगी बोली नहीं लगी थी. पेंटिंग साल 1960 से महिला के घर के रसोई में टंगी हुई थी. आश्चर्य की बात यह है कि इस घर के किसी भी व्यक्ति को पेंटिंग के बारे में कुछ भी नहीं पता था. महिला को लगता था कि यह रूस का कोई दुर्लभ चित्र है. लेकिन जब महिला ने अपना घर बदला तो उनका पुराना फर्नीचर का सामान खरीदने आए एक व्यक्ति की नजर पेंटिंग पर पड़ी. इसके बाद महिला को पेंटिंग के बारे में पता चला.

इसके बाद महिला ने पेरिस के बाहर एक्टऑन नीलामी घर में इस पेंटिंग की नीलामी की. नीलामी घर के डोमिनिक लेकोएंट ने इस बारे में कहा, "1500 साल पूर्व किए गए काम के लिए यह बिक्री एक तरह का विश्व रिकॉर्ड है. यह एक अद्वितीय पेंटिंग है, जो शानदार और यादगार है. यह बिक्री हमारे सभी सपनों से परे है. पेंटिंग की अधिकांश राशि महिला को जल्द ही मिल जाएगी."

इस पेंटिंग का निर्माण चिमाबुए ने किया है. उनको पुनर्जागरण काल के पिता के तौर पर याद किया जाता है. इतालवी मास्टर गिओटो को चिमाबुए ने शिक्षा दी थी. चिमाबुए को बीजान्टिन शैली के लिए जाना जाता है. सबसे बड़ी बात यह है कि उन्होंने मात्र 11 पेंटिंग बनाई थी, जो लकड़ी पर बनाई गई थी. लेकिन किसी भी पेंटिंग पर चिमाबुए ने अपने हस्ताक्षर नहीं किए.
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ला को जो पेंटिंग मिली है वो चिमाबुए की ही है. यह पेंटिंग 26 सेंटीमीटर लंबी और 20 सेंटीमीटर चौड़ी है. महिला को नहीं पता कि यह पेंटिंग उनके घर में कहां से आई थी अथवा परिवार के हाथों में यह कैसे आया था. पेरिस के ट्यूरिन में कला विशेषज्ञों ने अवरक्त प्रतिबिंबन का उपयोग करके इस बात की पुष्टि की कि यह टुकड़ा 1280 से बड़े डिप्टीच का हिस्सा था, जब चिमाबुए ने ईसा मसीह के आठ दृश्यों को चित्रित किया.
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