• Home
  • »
  • News
  • »
  • world
  • »
  • चीन में कोविड-19 से उबरे 90 मरीजों के फेफड़े खराब, चलने में भी आ रही है दिक्कत

चीन में कोविड-19 से उबरे 90 मरीजों के फेफड़े खराब, चलने में भी आ रही है दिक्कत

प्रदूषण बढ़ने से आने वाले समय में दिल, फेफड़े, लिवर, ब्लैोडर, हड्डियों, त्वदचा की बीमारियां बढ़ने के साथ ही डायबिटीज टाइप टू, दिल संबंधी रोग, किडनी, आर्थराइटिस, गर्भ धारण करने की क्षमता का घटते जाना, भ्रूण, मेंटल डिसऑर्डर, तनाव-डिप्रेशन, अपराधीकरण की मानसिकता आदि तेजी से बढ़ेगी. दिल्लीय में बीमारों की संख्या बढ़ेगी.

प्रदूषण बढ़ने से आने वाले समय में दिल, फेफड़े, लिवर, ब्लैोडर, हड्डियों, त्वदचा की बीमारियां बढ़ने के साथ ही डायबिटीज टाइप टू, दिल संबंधी रोग, किडनी, आर्थराइटिस, गर्भ धारण करने की क्षमता का घटते जाना, भ्रूण, मेंटल डिसऑर्डर, तनाव-डिप्रेशन, अपराधीकरण की मानसिकता आदि तेजी से बढ़ेगी. दिल्लीय में बीमारों की संख्या बढ़ेगी.

चीन में महामारी के केंद्र रहे वुहान शहर (Wuhan) के एक प्रमुख अस्पताल से ठीक हुए कोविड-19 (Covid-19) मरीजों के एक समूह के लिए गए नमूनों में से 90 प्रतिशत मरीजों के फेफड़ों (Trouble in Lungs) को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है.

  • Share this:
    बीजिंग. चीन में महामारी के केंद्र रहे वुहान शहर (Wuhan) के एक प्रमुख अस्पताल से ठीक हुए कोविड-19 (Covid-19) मरीजों के एक समूह के लिए गए नमूनों में से 90 प्रतिशत मरीजों के फेफड़ों (Trouble in Lungs) को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है जबकि पांच प्रतिशत मरीज दोबारा संक्रमित पाए जाने के बाद आइसोलेशन में रह रहे हैं. मीडिया में बुधवार को आई खबर में यह जानकारी दी गई.

    अध्ययन में शामिल लोगों की औसत उम्र 59 है

    वुहान विश्वविद्यालय के झोंगनन अस्पताल की गहन देखभाल इकाई के निदेशक पेंग झियोंग के नेतृत्व में एक दल अप्रैल से ही ठीक हो चुके 100 मरीजों को फिर से मिलकर उनके स्वास्थ्य की जांच कर रहा है.
    एक साल चलने वाले इस कार्यक्रम के पहले चरण का समापन जुलाई में हुआ. अध्ययन में शामिल मरीजों की औसत उम्र 59 साल है.

    ठीक हुए मरीज 6 मिनट में 400 मीटर ही चल पाए

    सरकारी ग्लोबल टाइम्स की खबर के मुताबिक पहले चरण के नतीजों के मुताबिक 90 प्रतिशत मरीजों के फेफड़े अब भी खराब स्थिति में हैं, जिसका मतलब यह है कि उनके फेफड़ों से हवा के प्रवाह और गैस विनिमय का काम अब तक स्वस्थ लोगों के स्तर तक नहीं पहुंच पाया है. पेंग के दल ने मरीजों पर छह मिनट टहलने की जांच की. उन्होंने पाया कि बीमारी से ठीक हुए लोग छह मिनट की अवधि में 400 मीटर ही चल सके जबकि स्वस्थ्य लोगों ने इस दौरान 500 मीटर की दूरी तय कर सकते थे.

    ठीक होने के तीन महीने बाद वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी

    बीजिंग यूनिवर्सिटी ऑफ चाइनीज मेडिसिन के डोंगझेमिन अस्पताल के डॉक्टर लियांग टेंगशियाओ को उद्धृत करते हुए खबर में कहा गया कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के तीन महीने बाद भी ठीक हो चुके कुछ मरीजों को ऑक्सीजन मशीन की जरूरत पड़ती है. लियांग का दल भी ठीक हो चुके 65 साल से अधिक उम्र के मरीजों से मिलकर उनके बारे में जानकारी जुटाने के काम में लगा है.

    10 फीसदी मरीजों में एंटीबॉडी नहीं मिली

    नतीजों में यह भी सामने आया कि नये कोरोना वायरस के खिलाफ बनी एंटीबॉडीज भी 100 मरीजों में से 10 फीसदी में अब नहीं थीं. खबर में कहा गया कि कोविड-19 न्यूक्लीइक एसिड जांच में उनमें से पांच प्रतिशत के नतीजे नकारात्मक मिले लेकिन इम्यूनोग्लोबुलिन एम (आईजीएम) जांच में उनमें संक्रमण मिला जिसके बाद उन्हें फिर से आइसोलेशन में जाना पड़ा. कोई विषाणु जब हमला करता है तो प्रतिरोधी तंत्र द्वारा आम तौर पर सबसे पहली एंटीबॉडी आईजीएम बनती है. आईजीएम जांच में सकारात्मक नतीजे मिलने का आशय आम तौर पर यह है कि व्यक्ति अभी विषाणु से संक्रमित हुआ ही है. यह अब भी स्पष्ट नहीं है कि क्या इसका मतलब यह है कि ये लोग फिर से संक्रमित हो गए हैं. पेंग ने कहा कि यह नतीजे दिखाते हैं कि मरीजों के प्रतिरोधी तंत्र अब भी ठीक हो रहे हैं.

    ये भी पढ़ें: राम मंदिर शिलान्यास पर नेपाल ने कहा, राम-सीता हमारे संबंधों में प्रेरणा बने रहेंगे

    ट्रंप ने कहा, कोविड-19 के बाद चीन के प्रति अमेरिका का रवैया 'काफी बदल गया'

    खबर में कहा गया कि मरीज अवसाद और कलंक की भावना से जूझ रहे हैं. ठीक हो चुके अधिकतर मरीजों ने बताया कि उनके परिवार वाले अब भी एक मेज पर बैठकर उनके साथ खाना खाने के इच्छुक नहीं थे. इसमें कहा गया कि ठीक हो चुके मरीजों में से आधे से कम ही काम पर लौटे. यह नतीजे महत्वपूर्ण हैं क्योंकि कोरोना वायरस संक्रमण सबसे पहले वुहान में ही सामने आया था.

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज