'लद्दाख' पर श्रीलंका के बौद्ध गुरु हैं खुश, मोदी सरकार के इस फैसले को बताया वरदान

इससे पहले श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने भी इस फैसले की तारीफ की थी.

News18Hindi
Updated: August 9, 2019, 1:33 PM IST
'लद्दाख' पर श्रीलंका के बौद्ध गुरु हैं खुश, मोदी सरकार के इस फैसले को बताया वरदान
श्रीलंका का झंडा
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Updated: August 9, 2019, 1:33 PM IST
बहुसंख्यक बौद्ध आबादी वाले 'लद्दाख' (Ladakh) क्षेत्र को भारत के एक अलग केंद्र शासित प्रदेश घोषित करने के भारत सरकार के फैसले को श्रीलंका (Sri Lanka) ने सराहा है. बता दें कि श्रीलंका एक बौद्ध राष्ट्र है. मालवाटे और सियाम निकया के असगिया निकाय के महानायके थेरस ने कल जारी दो अलग-अलग बयानों में भारत सरकार के इस फैसले की प्रशंसा की है.

उनके बयान में कहा गया है, "ये फैसला दोनों देशों के बीच धार्मिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करेगा और इसे एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा."

मालवाट्टे निकाय के वेन.टिबटुवावे श्री सिद्धार्थ सुमंगला महानायक थेरा ने अपने बयान में कहा, "भारत, जिसका एक बहुलतावादी समाज रहा है, उसने सौहार्दपूर्ण तरीके से सद्भाव और सामंजस्य की रक्षा की है और लद्दाख को 70 प्रतिशत बौद्ध जनसंख्या के साथ केंद्र शासित प्रदेश घोषित करने का अपना निर्णय लिया है. एक अलग प्रदेश के रूप में श्रीलंका के लिए खुशी और गर्व का विषय है, जो खुद एक बौद्ध देश है."

असगिरिया निकाय के वारकागोड़ा श्री ज्ञानरत्न महानेक थोरा ने लद्दाख को अलग राज्य घोषित करने के फैसले की उन्होंने काफी सराहना की, और कहा- यह लद्दाख क्षेत्र की तीर्थयात्रा पर जाने वाले दुनिया भर के बौद्धों के लिए ये फैसला एक वरदान साबित होगा.

इससे पहले श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने भी इस फैसले की तारीफ की थी. उन्होंने कहा था कि लद्दाख की 70 फीसदी आबादी बौद्ध धर्म से ताल्लुक रखती है. ऐसे में लद्दाख पहला भारतीय राज्य होगा, जहां बौद्ध बहुमत में होंगे. लद्दाख का पुनर्गठन भारत का आंतरिक मामला है. ये एक सुंदर क्षेत्र है, जो यात्रा के लायक है.

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First published: August 9, 2019, 1:20 PM IST
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