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रिसर्च! जिस मलेरिया की दवा को 'जादुई' बता रहे हैं ट्रंप उससे हो रहीं हैं ज्यादा मौतें

News18Hindi
Updated: May 23, 2020, 10:08 AM IST
रिसर्च! जिस मलेरिया की दवा को 'जादुई' बता रहे हैं ट्रंप उससे हो रहीं हैं ज्यादा मौतें
मलेरिया की दवा से वैज्ञानिकों ने बताया मौत का खतरा

साइंस मैगजीन लैंसेट ने अपनी स्टडी में पाया है कि कोरोना वायरस (Coronavirus) से संक्रमितों के इलाज में जहां हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्विन (Hydroxychloroquine) दवा दी जा रही है वहां मरने का ख़तरा बाकी जगहों से काफी ज़्यादा है.

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वाशिंगटन. अमेरिकी (US) राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) लगातार मलेरिया की दवा हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्विन ((Hydroxychloroquine) को कोरोना संक्रमण (Coronavirus) के इलाज के लिए सबसे बेहतर और 'जादुई' तक बता चुके हैं. बीते दिनों उन्होंने यहां तक कहा दिया कि वे खुद भी कोरोना से बचने के लिए रोजाना हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्विन ही ले रहे हैं. हालांकि अब साइंस मैगजीन लैंसेट ने अपनी स्टडी में पाया है कि कोरोना वायरस से संक्रमितों के इलाज में जहां हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्विन दवा दी जा रही है वहां मरने का ख़तरा बाकी जगहों से काफी ज़्यादा है.

इस स्टडी में पाया गया है कि मलेरिया की इस दवाई से कोरोना संक्रमितों को कोई फ़ायदा नहीं हो रहा है. ट्रंप ने कहा था कि वो इस दवाई का सेवन कर रहे हैं जबकि स्वास्थ्य अधिकारियों ने चेताया था कि इससे हार्ट की समस्या बढ़ सकती है. ट्रंप मेडिकल स्टडी की उपेक्षा करते हुए इस दवाई के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करते रहे हैं. पैन अमरीकन हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन (पाहो) ने भी चेतावनी दी थी कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को लेकर किए जा रहे दावों को सही साबित करने वाला कोई ठोस सबूत अभी तक सामने नहीं आया है. जब तक कोई ठोस सबूत न मिल जाए 'पाहो' ने अमरीका की सरकार से इसके इस्तेमाल से परहेज करने की अपील की है. संस्था ने कहा है, "मौजूदा दिशानिर्देशों और प्रक्रियाओं का पालन किए बगैर क्लोरोक्वीन या हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के इस्तेमाल के विपरीत प्रभाव हो सकते हैं. इससे व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार पड़ सकता है और यहां तक कि उसकी मौत भी हो सकती है."

सिर्फ मलेरिया के लिए ही सुरक्षित
इस रिसर्च के मुताबिक हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्विन मलेरिया के रोगियों के लिए सुरक्षित है और लुपस या आर्थ्राइटिस के कुछ मामलों में भी ये लाभकारी है. लेकिन कोरोना संक्रमितों को लेकर कोई क्लिनिकल ट्रायल इस दवाई के इस्तेमाल की सिफ़ारिश नहीं की है. द लैंसेट की स्टडी में कोरोना वायरस से संक्रमित 96,000 मरीज़ों को शामिल किया गया. इनमें से 15,000 लोगों को हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्विन दी गई या इससे मिलती जुलती क्लोरोक्विन दी गई. ये या तो किसी एंटिबायोटिक के साथ दी गई या फिर केवल यही. इस स्टडी से पता चलता है कि दूसरे कोविड मरीज़ों की तुलना में क्लोरोक्विन खाने वाले ज़्यादा मरीज़ों की हॉस्पिटल में ज़्यादा मौत हुई और हार्ट की समस्या भी उत्पन्न हुई.



मलेरिया की दवा लेने वाले ज्यादा मर रहे


हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल दूसरी बीमारियों के इलाज के लिए करते हैं, उनमें साइड इफेक्ट्स के तौर पर सिर दर्द, चक्कर, भूख न लगना, पेट ख़राब होना, डायरिया या पेट में दर्द, उल्टी, त्वचा पर लाल चकत्ते पड़ने की शिकायत देखी गई है. सेंटर फ़ॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) का कहना है कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन एक ऐसी दवा है जो मलेरिया के रोगियों के लिए कारगर रहती है. मलेरिया के मरीज खाने के साथ इस दवा का इस्तेमाल करके इसके साइड इफेक्ट्स से बच सकते हैं.

लैंसेट की रिसर्च में भी जिन्हें हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्विन दी गई उनमें मृत्यु दर 18% रही, क्लोरोक्विन लेने वालों में मृत्यु दर 16.4% और जिन्हें ये दवाई नहीं दी गई उनमें मृत्यु दर नौ फ़ीसदी रही. जिनका इलाज हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्विन या क्लोरोक्विन एंटिबायोटिक के साथ दी गई उनमें मृत्यु दर और ज़्यादा थी. रिसर्चरों ने कहा है कि हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्विन क्लिनिकल ट्रायल से बाहर लेना ख़तरनाक है. ट्रंप ने कहा था कि कोविड टेस्ट में वो निगेटिव आए हैं क्योंकि वो हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्विन ले रहे हैं और इसका सकारात्मक फ़ायदा मिला है. इसे लेकर ट्रायल चल रहा है कि हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्विन कोविड 19 में प्रभावी है या नहीं.

 

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First published: May 23, 2020, 10:08 AM IST
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