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मालदीव के विदेश मंत्री ने की राजीव गांधी की तारीफ, कहा- भारत सरकार का अमूल्य सैन्य समर्थन हमारे दिलों में

मालदीव के राष्ट्रीय ध्वज की फाइल फोटो

मालदीव के राष्ट्रीय ध्वज की फाइल फोटो

मालदीव (Maldives) के राष्ट्रीय सुरक्षा सेवा मुख्यालय में शरण लेने वाले राष्ट्रपति अब्दुल गयूम (Abdul gayoom) ने भारत सहित कई देशों से सैन्य सहायता का अनुरोध किया था.

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    माले. मालदीव (Maldives) के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद (Abdullah Shahir) ने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) और भारत सरकार की प्रशंसा की. 3 नवंबर 1988 को भारत सरकार ने मालदीव के तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दुल गयूम (Abdul Gayoom) की एक अपील के बाद वहां तख्तापलट की कोशिशों को नाकाम करने के लिए ऑपरेशन कैक्टस शुरू किया था.

    मालदीव के 31 वें विजय दिवस पर एक बयान में, शाहिद ने कहा, 'हम उन सभी लोगों का सम्मान करते हैं जिन्होंने सौंपे गए कर्तव्यों को अटूट समर्पण और सम्मान के साथ निभाया और इस राष्ट्र की संप्रभुता को बनाए रखने के लिए लड़े.'

    उन्होंने कहा, 'यह सच्चे दोस्तों और साझेदारियों को महत्व देने का दिन है. 3 नवंबर, 1988 को भारत सरकार का अमूल्य सैन्य समर्थन हमारे दिलों में है. हमारी कृतज्ञता कभी कम नहीं होगी.' शाहिद ने कहा कि उस दिन तख्तापलट का प्रयास 'छोटे राज्यों द्वारा सामना की जाने वाली विशेष सुरक्षा खतरों और कमजोरियों को दर्शाता है.'

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    उन्होंने कहा, 'हम पूर्ण समर्पण के साथ, अपनी संप्रभुता और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए काम करना जारी रखेंगे, अपने मित्रों और भागीदारों के साथ और अधिक जुड़ाव और सहयोग बढ़ाएंगे.'

    क्या हुआ था 3 नवंबर 1988 को?
    बता दें 3 नवंबर 1988 को मालदीव के व्यापारी अब्दुल्ला लूथुफी द्वारा समर्थित पीपुल्स लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ तमिल ईलम (PLOTE) के 80-200 श्रीलंकाई आतंकवादियों के एक समूह ने मालदीव में तख्तापलट की कोशिश की. उन्होंने माले में घुसपैठ की और राजधानी में महत्वपूर्ण बिंदुओं पर नियंत्रण कर लिया. इसके बाद मालदीव के राष्ट्रपति रहे अब्दुल गयूम ने मदद मांगी. तब तत्कालीन प्रधान मंत्री राजीव गांधी की सरकार में भारतीय वायु सेना ने आगरा से माले तक कुछ 300 पैराट्रूपर्स को एयरलिफ्ट किया, जो हुलहुले द्वीप पर उतरे जो अभी भी मालदी की सुरक्षा एजेंसियों के नियंत्रण में था

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