माली में विद्रोही सैनिकों ने राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री को बंधक बनाया, जबरन लिया इस्तीफ़ा

माली में सैन्य तख्तापलट

माली में सैन्य तख्तापलट

Ibrahim Boubacar resigns: विद्रोही सैनिकों की गिरफ्त में मौजूद माली के राष्ट्रपति इब्राहिम बुबाकार केटा ने इस्तीफ़ा दे दिया है और संसद को भी भंग कर दिया है. केटा और प्रधानमंत्री बोबू सिसे को विद्रोही सैनिकों ने गिरफ्तार कर लिया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 19, 2020, 6:59 AM IST
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बामाको. अफ्रीकी देश माली (Mali) में विद्रोही सैनिकों ने तख्तापलट को अंजाम देते हुए राष्ट्रपति इब्राहिम बुबाकार केटा (President Ibrahim Boubacar Keita) को गिरफ्तार कर लिया है. माली के राष्ट्रपति के साथ-साथ विद्रोहियों ने देश के प्रधानमंत्री बोबू सिसे को भी हिरासत में ले लिया है. इस तख्तापलट की शुरुआत मंगलवार को माली की राजधानी बामाको के नजदीक एक सेना के कैंप से शुरू हुई थी और यहां सैनिक आपस में ही भिड़ गए थे. खबर आ रही है कि राष्ट्रपति इब्राहिम बुबाकार ने इस्तीफ़ा भी दे दिया है.

माली सरकार के एक प्रवक्ता ने बीबीसी से बताया कि बामाको के कई हिस्सों में आगजनी की घटनाएं भी हुई हैं. सबसे पहले बामाको से 15 किलोमीटर दूर स्थित काटी कैंप में असंतुष्ट जूनियर अफसरों ने कमांडरों को हिरासत में लिया और उसके बाद कैंप पर कब्जा जमा लिया. इसके बाद युवाओं ने शहर की सरकारी इमारतों को आग के हवाले भी कर दिया. पहले से ही माली के राष्ट्रपति के इस्तीफ़े की मांग को लेकर अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन भी चल रहा था. अब राष्ट्रपति इब्राहिम बॉबाकार केटा भी विद्रोही सैनिकों के कब्जे में हैं. सैनिकों ने किसी भी तरह की बातचीत करने से भी इनकार कर दिया है.



राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री से लिया इस्तीफ़ा
मिली जानकारी के मुताबिक शहर में युवाओं ने कई सरकारी इमारतों में आग लगा दी है. इसके आलावा नाराज सैनिकों ने सीनियर कमांडरों को भी बंधक बना लिया. साथ ही बमाको से 15 किमी दूर स्थित काती कैंप पर अधिकार कर लिया. अफ्रीकी संघ और स्थानीय ग्रुप इकोवास ने इस विद्रोह की निंदा की है. विद्रोही सैनिक राष्ट्रपति से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. बीबीसी अफ्रीका की रिपोर्ट के मुताबिक, विद्रोही सैनिकों का नेतृत्व काती कैंप के डिप्टी हेड कर्नल मलिक डियाओ और कमांडर जनरल सादियो कमारा ने किया. विरोध की वजह स्पष्ट नहीं है लेकिन लोकल मीडिया के मुतबिक यह विद्रोह वेतन विवाद को लेकर है.
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