कौन है रॉबर्ट मुगाबे, जिसकी नजरबंदी से पूरी दुनिया में हलचल


Updated: November 15, 2017, 8:57 PM IST
कौन है रॉबर्ट मुगाबे, जिसकी नजरबंदी से पूरी दुनिया में हलचल
राष्ट्रपति मुगाबे (getty image)

Updated: November 15, 2017, 8:57 PM IST
जिम्बाब्वे की सत्ता पर सेना का नियंत्रण होने के बाद राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे और उनका परिवार को सेना की गिरफ्त में है. सेना के जनरलों का कहना है कि उन्होंने देश में तख्तापलट नहीं किया है लेकिन राष्ट्रपति मुगाबे के इर्दगिर्द मौजूद आपराधिक तत्वों का सफाया करने के लिए उन्हें नजरबंद किया है. सेना का कहना है कि मुगाबे और उनका परिवार सेना की देखरेख में सुरक्षित है.

उपराष्ट्रपति एमरसन मनांगाग्वा पहले राष्ट्रपति पद के दावेदार माने जा रहे थे लेकिन उनकी बर्खास्तगी के बाद अब राष्ट्रपति मुगाबे की पत्नी ग्रेस मुगाबे की राष्ट्रपति बनने की संभावना बढ़ गई है. मुगाबे की पत्नी उनसे 40 वर्ष छोटी हैं.

मीडिया में चल रही खबरों की मानें तो उनकी पत्नी देश छोड़कर भाग गई हैं. जिम्बाब्वे अफ्रीकन नेशनल यूनियन पेट्रियोटिक फ्रंट (ZANU-PF) उपराष्ट्रपति मनांगाग्वा की बर्खास्तगी के खिलाफ था जिसकी वजह से देश में गृहयुद्ध जैसी परिस्थितियां बनी हैं.

कौन हैं रॉबर्ट मुगाबे?

मुगाबे का जन्म 1924 में पूर्वी रोडेशिया में हुआ था. राजनीति में आने से पहले वे एक शिक्षक थे. 1960-64 के दौर में उन्होंने राजनीति में कदम रखा. जिम्बाब्वे अफ्रीकन नेशनल यूनियन पेट्रियोटिक फ्रंट की स्थापना में उन्होंने उल्लेखनीय योगदान दिया और सचिव पद पर पदस्थ भी हुए.

रोडोशिया की सरकार ने 1970 में मुगाबे को देशद्रोह के आरोप में जेल भेजा जिसके बाद मार्क्सवादी नेता ने सरकार के विरुद्ध सशस्त्र आंदोलन छेड़ दिया. यह विद्रोह तब थमा जब वे 1980 में पहली बार प्रधानमंत्री बनाए गए. साल 1988 में वे जिम्बाब्वे के राष्ट्रपति बने.

मुगाबे जिम्बाब्वे में भूमि सुधारों की वजह से जाने जाते हैं. इन्होंने अपने समर्थकों के साथ पूंजीपतियों की जमीनों को पूंजीहीन श्रमिकों के मध्य हिंसक तरीके से बांटा.


जिम्बाब्वे की जमीनें कम उपाजाऊ थीं लेकिन एक समान भूमि वितरण के बाद  इस देश ने खाद्य मामलों में काफी हद तक आत्मनिर्भर हो गया.

विवादों से मुगाबे का रिश्ता

मुगाबे पर सैकड़ों मानवाधिकार अधिवेशनों के उल्लघंन का आरोप है. मुगाबे ने अपने शासन काल में कई बार अखबारों को अपने खिलाफ लिखने पर बंद कराया और विरोधी आवाजों को दबाने के लिए हिंसा के प्रयोग से भी नहीं चूके.

सन 2000 में आम चुनावों में हार मिलने की वजह से उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. सन 2008 में उन्होंने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदी स्वानगिरई को राष्ट्रपति चुनावों में जीत के बाद निशाने पर लेते रहे.

मुगाबे अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को दबाने के लिए पुलिस मशीनरी का इस्तेमाल करते थे. उन पर अपने विरोधियों को दबाने के लिए देशद्रोह और समलैंगिकता के आरोप लगा कर जेल भेजने के भी कई आरोप हैं.


मुगाबे के शासनकाल में जिम्बाब्वे की साक्षरता दर लगभग 90 प्रतिशत हुई. यह दर अफ्रीकी देशों में सबसे ज्यादा है.

जिम्बाब्वे की अनियंत्रित मुद्रास्फीति और मुगाबे का शासन

जिम्बाब्वे जब अनियंत्रित मुद्रास्फीति की दौर से गुजर रही थी उस वक्त मुगाबे के हाथों में ही देश की कमान थी. देश के स्टेट बैंक ने जरूरत से ज्यादा नोट छाप दिए थे लेकिन उनकी कीमत बेहद कम थी.


विश्व बैंक के अनुमान के अनुसार जिम्बाब्वे में पैसे का अवमूल्यन 500बिलियन से भी नीचे पहुंच चुका था.मजबूरन देश को अपनी राष्ट्रीय मुद्रा को छोड़कर डॉलर अपनाना पड़ा.

2016 में जब देश ने बॉन्ड नोट अपनाया तब जाकर वहां की आधिकारिक मुद्रा बदली. 2008 में इंग्लैंड की महारानी ने आदेश दिया कि राष्ट्रपति मुगाबे से नाइटहुड का अवार्ड वापस ले लिया जाए.
First published: November 15, 2017
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