भारतीय-अमेरिकी शोधकर्ता की याद में दौड़ का आयोजन, कुछ दिन पहले हुआ था मर्डर

भारतीय मूल की अमेरिकी शोधकर्ता शर्मिष्ठा सेन (फाइल फोटो)

भारतीय मूल की अमेरिकी शोधकर्ता शर्मिष्ठा सेन एक फार्मासिस्ट और अनुसंधानकर्ता थीं जिन्होंने मॉलिक्यूलर बायोलॉजी की पढ़ाई की थी और कैंसर मरीजों (Cancer Patients) के लिए काम कर रही थीं. वह मूल रूप से झारखंड (Jharkhand) के सिंदरी की रहने वाली थीं और अरिंदम रॉय से शादी होने के बाद प्लानो आकर बस गईं थी.

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    ह्यूस्टन. अमेरिका के टेक्सास (Texas) राज्य के प्लानो शहर में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के सैकड़ों सदस्यों ने भारतीय मूल की अमेरिकी शोधकर्ता एवं एथलीट की याद में दौड़ का आयोजन किया जिनकी इस माह की शुरुआत में हत्या (Murder) कर दी गई थी. पुलिस के मुताबिक 43 वर्षीय शर्मिष्ठा सेन की एक अगस्त को हत्या कर दी गई थी जब वह प्लानो में चिसहोम ट्रेल पार्क के पास जॉगिंग कर रहीं थी. उनका शव एक राहगीर को मार्चमेन वे और लेगेसी ड्राइव के पास एक छोटी नदी वाले इलाके में पड़ा मिला था. सेन एक फार्मासिस्ट और अनुसंधानकर्ता थीं जिन्होंने मॉलिक्यूलर बायोलॉजी की पढ़ाई की थी और कैंसर मरीजों के लिए काम कर रही थीं. वह मूल रूप से झारखंड के सिंदरी की रहने वाली थीं और अरिंदम रॉय से शादी होने के बाद प्लानो आकर बस गईं थी. उनके दो बेटे हैं.

    शनिवार सुबह, स्थानीय समुदाय के सदस्य सेन को श्रद्धांजलि देने के लिए चिसहोम ट्रेल पार्क में एकत्र हुए. उन्होंने उसी स्थान पर स्मारक दौड़ का आयोजन किया जहां वह अक्सर आती-जाती थी और पार्क का वही रास्ता लिया जहां हत्या वाले दिन वह जॉगिंग कर रहीं थी. सेन की एक दोस्त ने कहा, 'वह निश्चित ही अपनी छाप छोड़ गईं हैं और इसलिए उन्हें याद करने के लिए आज हम सब यहां हैं.' दोपहर के वक्त सेन और उनके परिवार के प्रति सम्मान प्रदर्शित करने के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़े. पुलिस ने सेन की हत्या वाले दिन ही 29 वर्षीय युवक को उसी इलाके में चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया. पुलिस के मुताबिक, बरकरी मोनक्रिफ सेन की हत्या का संदिग्ध है लेकिन उस पर फिलहाल आरोप तय नहीं किए गए हैं.

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    हर रोज दौड़ने जाती थीं शर्मिष्ठा सेन
    सेन हर रोज सुबह लोकप्रिय क्रिसहोम ट्रेल पर दौड़ने जाया करती थीं. उनकी हत्या के एक दिन बाद, अनजान लोग, पड़ोसी और दोस्त पार्क के पास दो पेड़ों के इर्दगिर्द एकत्रित हुए. उनके हाथों में फूल और दौड़ के लिए पहने जाने वाले जूते थे. सेन के पति ने उनकी कहानी साझा करने के लिए 'केयरिंग ब्रिज' और 'गो फंड मी' के नाम से एक ऑनलाइन पेज बनाया है जिसके माध्यम से जमा होने वाली सारी राशि उन परमार्थ संगठनों को दी जाएगी जो सेन के रूझान वाले मुद्दों पर काम करती हैं जैसे कैंसर जागरुकता, कैंसर अनुसंधान, स्वस्थ जीवनशैली और पर्यावरण संरक्षण आदि.

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