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काबुल की सड़कों पर अफरा-तफरी, लोग बोले- ऐसे हालात में गनी छोड़ कर चले गए, बहुत बुरा हुआ

गानिस्तान इंडिपेंडेंट ह्यूमन राइट्स कमीशन’ के अनुसार पिछले माह गाजी प्रांत के मलिस्तान जिले पर कब्जे के बाद तालिबानी लड़कों ने घर-घर जा कर उन लोगों की तलाश की जिन्होंने सरकार के लिए काम किया था और इसके बाद कम से कम 27 लोगों की हत्या कर दी (फोटो- AP)

गानिस्तान इंडिपेंडेंट ह्यूमन राइट्स कमीशन’ के अनुसार पिछले माह गाजी प्रांत के मलिस्तान जिले पर कब्जे के बाद तालिबानी लड़कों ने घर-घर जा कर उन लोगों की तलाश की जिन्होंने सरकार के लिए काम किया था और इसके बाद कम से कम 27 लोगों की हत्या कर दी (फोटो- AP)

Afghanistan Crisis: देश में तालिबान के कट्टर शरिया शासन लौटने की आहटें सुनाई देने लगी हैं, जिसके तले देश की जनता ने 1996 से 2001 का वक्त बिताया था. 9/11 हमले के बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान से तालिबान शासन को समाप्त किया था.

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    काबुल. अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर तालिबान (Taliban) के कब्जे के बाद हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल है. सोमवार की सुबह काबुल की सड़कों पर सन्नाटा पसरा था. लेकिन एयरपोर्ट पर हज़ारों लोगों की भीड़ थी. लोग किसी तरह देश छोड़ कर भागने की फिराक में हैं. उधर तालिबान ने देश में शांति का नया युग लाने का वादा किया है. लेकिन अफगान इससे आश्वस्त नहीं हैं और उनके दिलों में तालिबान का पुराना बर्बर शासन लौटने का भय है.

    सोशल मीडिया पर काबुल से परेशान कर देने वाली वीडियो और तस्वीरें सामने आ रही हैं. लोग अपने सामान को लेकर एयरपोर्ट की तरफ भाग रहे हैं. बीच-बीच में गोलियों की आवाज़ भी सुनाई दे रही थी. अमेरिकी सैनिकों की निकासी की सुरक्षा के लिए हवाई अड्डे पर तैनात अमेरिकी सैनिकों ने हवाई फायरिंग की ताकि सैकड़ों नागरिकों को हवाई जहाज़ पर चढ़ने की कोशिश करने से रोका जा सके. एक अमेरिकी अधिकारी ने रॉयटर्स को फोन पर बताया, ‘भीड़ नियंत्रण से बाहर थी. गोलीबारी सिर्फ लोगों को शांत करने के लिए की गई थी.’

    पास के वजीर अकबर इलाके में सारे दूतावास के ऑफिस खाली हो गए हैं. सभी राजनयिक अपने परिवार के साथ शहर से बाहर चले गए है, जबकि कुछ लोग हवाई अड्डे पर उड़ान का इंतजार कर रहे हैं. अफगानिस्तान के एक नागरिक ने कहा, ‘मैं पूरी तरह सदमे की स्थिति में हूं. तालिबान की एंट्री ने मुझे डरा दिया है. लेकिन (राष्ट्रपति अशरफ) गनी ने हम सभी को इस स्थिति में छोड़ दिया है. ये बहुत बुरा है.”

    एक और नागरिक हकीम ने कहा, ‘मेरी पहली चिंता अपनी दाढ़ी को बढ़ाना और इसे तेजी से कैसे बढ़ाया जाए ये देखना है. मैंने अपनी पत्नी और लड़कियों के लिए पर्याप्त बुर्कों का इंतज़ाम कर दिया है.’ बता दें कि तालिबान के 1996-2001 के शासन के दौरान, पुरुषों को अपनी दाढ़ी काटने की अनुमति नहीं थी और महिलाओं को सार्वजनिक रूप से पूरी तरह से ढका हुआ बुर्का पहना जरूरी था.

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