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WHO का फंड रोकने पर ईरान का हमला- 'लोगों को मरने देना अमेरिका की पुरानी आदत'

ईरान और अमेरिका के रिश्तों में पिछले साल उस वक्त तनातनी बढ़ गई थी जब अमेरिका ने अपने ड्रोन हमले में ईरान के कुद्स फोर्स के प्रमुख कासिम सुलेमानी को मार गिराया था
ईरान और अमेरिका के रिश्तों में पिछले साल उस वक्त तनातनी बढ़ गई थी जब अमेरिका ने अपने ड्रोन हमले में ईरान के कुद्स फोर्स के प्रमुख कासिम सुलेमानी को मार गिराया था

WHO की फंडिंग रोकने को ईरान (Iran) ने खुद पर लगे प्रतिबंध (Sanctions) के समान बताते हुए कहा कि दुनिया देख रही है कि ईरान किस तरह सहता आया है

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 16, 2020, 1:20 AM IST
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का फंड रोकने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले को ईरान (Iran) ने शर्मनाक बताया है. फंडिंग रोकने के अमेरिकी फैसले की खुद पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों से तुलना करते हुए ईरान ने कहा कि दुनिया देख रही है कि अमेरिका किस तरह लोगों को मारता है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन पर आरोप लगाया था कि उसने कोरोना की गंभीरता को दुनिया से महामारी बनने तक छुपाया. जिसके बाद ट्रंप ने फंडिंग रोकने का ऐलान कर दिया. ट्रंप के फैसले पर निशाना साधते हुए ईरान के विदेश मंत्री जवाद जरीफ ने ट्वीट किया, 'महामारी के दौरान फंड को रोकना शर्मनाक है. दुनिया वही देख रही है जो ईरान हमेशा सहता आया है. ट्वीट में आगे लिखा कि, 'अमेरिकी शासन की ये धमकियां, डराना और झगड़ालू रवैया सिर्फ उसकी एक लत ही नहीं है बल्कि लोगों को मरने देने की यह उसकी पुरानी आदत है.

कोरोनावायरस की महामारी से इस वक्त ईरान भी जूझ रहा है. लेकिन अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों की वजह से ईरान दुनिया के दूसरे मुल्कों से महामारी से निपटने के लिए जरूरी चीज़ें नहीं खरीद पा रहा है. अमेरिकी प्रतिबंधों और कोरोना महामारी की वजह से ईरान की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो चुकी है. 2018 में अमेरिका के साथ परमाणु समझौते से हटने के बाद ईरान पर अमेरिका ने सख्त आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं.  अमेरिकी प्रतिबंधों से चरमराती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए ईरान ने इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) से 5 बिलियन डॉलर का इमरजेंसी लोन मांगा है.



ईरान में कोरोना महामारी की वजह से अब तक 76300 लोग संक्रमित हो चुके हैं जबकि 4777 लोगों की मौत हो चुकी है. अब जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने WHO की फंडिंग पर रोक लगाई तो ईरान को दुनिया के सामने अपनी स्थिति बयां करने का मौका मिल गया.
ट्रंप ने WHO पर आरोप लगाते हुए कहा था कि कोरोनावायरस को छिपाने और गंभीर कुप्रबंधन में उस की भूमिका की समीक्षा की जाएगी. साथ ही ट्रंप ने WHO पर चीन की तरफदारी करने का आरोप लगाया था. इसके बाद ने WHO को सालाना दिए जाने वाले 40 से 50 करोड़ डॉलर फंड पर रोक लगा दी थी. लेकिन ट्रंप के फैसले पर सवाल उठ रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र संघ के सचिव एंटोनियो गुटारेस ने कहा कि जब पूरी दुनिया कोरोनावायरस की महामारी से जूझ रही हो तब विश्व स्वास्थ्य संगठन के संसाधन में कटौती करना सही नहीं है.

माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स का कहना है कि वैश्विक महामारी के दौर में इस तरह का फैसला ठीक नहीं है. वहीं जर्मनी के विदेश मंत्री हेइको मास ने ट्रंप के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि कोरोना संकट के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहराने से कोई फायदा नहीं है बल्कि संयुक्त राष्ट्र को मजबूत किया जाए.
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