इजराइल में एक नई रहस्यमयी मानव प्रजाति की खोज, विशाल खोपड़ी से खुलेंगे होमो के राज़

प्रतीकात्मक फोटो

नेशेर रामला में खुदाई में एक खोपड़ी मिली है जो संभवत: एक अलग होमो आबादी के अंतिम बचे मानव का उदाहरण हो. यह आबादी करीब 4,20,000 से 1,20,000 साल पहले अब के इजराइल में रहती थी.

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    येरूशलम. सर्वाइवल ऑफ़ द फिटेस्ट. चार्ल्स डार्विन (Charles Darwin) का ये विकास का अंतिम सिद्धांत है. इजराइल के नेशेर रामला में ऐसा कुछ मिला है, जो इस सिद्धांत को फिर से साबित करता है. पुरातत्वविज्ञानियों के एक अंतरराष्ट्रीय समूह ने मनुष्यों के विकास की कहानी के एक लापता हिस्से की खोज की है. पुरातत्वविज्ञानियों ने साइट से विलुप्त मनुष्यों के समूह से संबंधित जीवाश्म हड्डियां बरामद की हैं, जो एक लाख साल पहले इस क्षेत्र में रहते थे.

    नेशेर रामला में खुदाई में एक खोपड़ी मिली है जो संभवत: एक अलग होमो आबादी के अंतिम बचे मानव का उदाहरण हो. यह आबादी करीब 4,20,000 से 1,20,000 साल पहले अब के इजराइल में रहती थी. हड्डियों में निएंडरथल और प्रारंभिक मानव विशेषताओं का एक विशिष्ट संयोजन है, जो उन्हें उसी अवधि के दौरान मौजूद होमो सेपियंस से अलग करता है. हड्डियों के साथ, जीवाश्म विज्ञानियों ने प्रागैतिहासिक स्थल से पत्थर के औजारों, घोड़ों, परती हिरणों और जंगली बैल के अवशेषों का भी पता लगाया है.

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    शोधकर्ताओं ने एक साइंस जर्नल में दो अलग-अलग अध्ययनों में उत्खनन का विवरण दिया है. उन्होंने कहा कि विशिष्ट मानव समुदाय ने अपनी संस्कृति और जीन दोनों का होमो सेपियन्स समूहों के साथ लेनदेन किया. जर्नल में लिखा है, "यह खोज, अफ्रीका और यूरेशिया में उन संभावित पुनर्निर्माण के लिए पर्याप्त सबूत जोड़ती है, जो इस क्षेत्र में विभिन्न मानव आबादी के सह-अस्तित्व पर सवाल उठाती हैं. साथ ही ये खोज लेट प्लीस्टोसिन में जटिल जनसंख्या गतिशीलता के बारे में भी कई राज़ खोल सकती है.'

    इजराइल के अनुसंधानकर्ता हर्शकोवित्ज, योशी जेदनर और सहकर्मियों ने ‘साइंस’ में प्रकाशित अध्ययनों में बताया कि इस आदिकालीन मानव समुदाय ने कई हजार वर्षों तक निकटवर्ती होमो सैपियंस समूहों के साथ अपनी संस्कृति और जीन साझा किए।

    नए जीवाश्म
    खोपड़ी के पीछे के हिस्सों समेत अन्य टुकड़ों और लगभग एक पूरे जबड़े के विश्लेषण से पता चलता है कि यह जिस व्यक्ति का अवशेष है वह पूरी तरह होमो सैपियंस नहीं था. ये अवशेष 1,40,000-1,20,000 वर्ष पुराने हैं. ऐसा माना जाता है कि उस समय इस क्षेत्र में केवल अन्य इसी तरह का मानव रहता था. इसके बजाय यह व्यक्ति होमो के एक विशिष्ट समुदाय का लगता है जिसकी पहचान विज्ञान ने पहले कभी नहीं की.

    कई अन्य जीवाश्म मानव खोपड़ियों से विस्तारपूर्वक तुलना करने पर अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि खोपड़ी के पीछे की हड्डी ‘पुरातनकालीन’ विशेषताओं वाली है जो शुरुआती और बाद के होमो सैपियंस से अलग है. यह हड्डी निएंडथरल और शुरुआती होमो सैपियंस में पायी हड्डियों के मुकाबले थोड़ी मोटी है.

    क्या इनके और भी लोग हैं?
    लेखकों ने संकेत दिया कि इजराइल के अन्य स्थलों जैसे मशहूर लेडी ऑफ ताबून पर मिले जीवाश्म इन नयी मानव आबादी का हिस्सा हो सकते हैं. ‘‘लेडी ऑफ ताबून’’ की खोज 1932 में की गई थी.

    व्यापक अध्ययन करने पर इस महत्वपूर्ण अजीब मानव ने हमें निएंडथरल शरीर रचना और उनके व्यवहार के बारे में काफी कुछ सिखाया. ऐसे वक्त में जब हमें अपने पूर्वजों के बारे में बहुत कम पता है.

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    अभी कई सवालों का जवाब मिलना बाकी है जैसे कि अलग-अलग होमो समूह एक-दूसरे से कैसे बातचीत करते थे? इस अवधि में होमो आबादियों में होने वाले सांस्कृतिक और जीव विज्ञान संबंधी बदलावों के लिए इसका क्या मतलब है. इन सवालों के साथ काम जारी रखने से हमें अपने मानव इतिहास की बेहतर समझ बनाने में मदद मिलेगी. (एजेंसी इनपुट के साथ)

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