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SCO समिट में बोले पीएम मोदी- बढ़ती कट्टरता सबसे बड़ी चुनौती, अफगानिस्तान के हालात से चुनौतियां बढ़ीं

SCO समिट को संबोधित करते पीएम नरेंद्र मोदी (Twitter)

SCO समिट को संबोधित करते पीएम नरेंद्र मोदी (Twitter)

SCO की स्थापना 15 जून 2001 को हुई थी. भारत 2017 में इसका पूर्णकालिक सदस्य बना. दुशांबे (Dushanbe) में आज बैठक में ईरान, चीन, रूस, पाकिस्तान के विदेश मंत्री के भी एससीओ बैठक के लिए दुशांबे आने की संभावना है.

  • News18Hindi
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    नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन (SCO Summit) को संबोधित किया है. शुक्रवार को उन्होंने नए साझेदार के तौर पर ईरान का स्वागत किया. उन्होंने अपने भाषण में कट्‌टरपंथ का जिक्र करते हुए कहा कि इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती दुनिया के सामने शांति, सुरक्षा और भरोसा है और कट्‌टरपंथ तेजी से दुनिया में बढ़ रहा है. अफगानिस्तान में हाल में हुई घटनाओं ने इस चुनौती को और बढ़ा दिया है. जिस वक्त पीएम अफगानिस्तान के मसले पर जिक्र कर रहे थे, उस मीटिंग में पाकिस्तानी पीएम इमरान खान और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी मौजूद थे.

    मध्य एशिया मॉडरेट और प्रोग्रेसिव कल्चर का गढ़ रहा
    प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि हम इतिहास पर नजर डालें तो पाएंगे कि मध्य एशिया का क्षेत्र मॉडरेट और प्रोग्रेसिव कल्चर और मूल्यों का गढ़ रहा है. सूफीवाद जैसी परम्पराएं यहां सदियों से पनपी और पूरे क्षेत्र और विश्व में फैलीं. इनकी छवि हम आज भी इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत में देख सकते हैं.

    पीएम मोदी ने ये भी कहा कि भारत में और SCO के लगभग सभी देशों में इस्लाम से जुड़ी मॉडरेट, टॉलरेंट और इन्क्लूसिव संस्थाएं और परम्पराएं हैं. SCO को इनके बीच एक मजबूत नेटवर्क विकसित करने के लिए काम करना चाहिए. इस सन्दर्भ मैं SCO के रैट्स मैकेनिज्म द्वारा किए जा रहे उपयोगी कार्य की प्रशंसा करता हूं.

    ताजिक लोगों के स्वागत से भाषण की शुरुआत
    इससे पहले प्रधानमंत्री ने भाषण की शुरुआत ताजिक लोगों के स्वागत से की. उन्होंने कहा, ‘पूरे भारत की ओर से तजिक भाई-बहनों का स्वागत करता हूं. इस साल हम SCO की 20 वर्षगांठ मना रहे हैं. मैं वार्ता के नए साझेदारों सऊदी अरब, मिस्र और कतर का भी स्वागत करता हूं.’ यह आयोजन ताजिकिस्तान के दुशांबे (Dushanbe) में हो रहा है.

    शिखर बैठक के बाद संपर्क बैठक (आटउरिच) होगी. इस दौरान अफगानिस्तान के मुद्दे पर चर्चा होगी. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बताया कि इसके अलावा क्षेत्रीय सुरक्षा, सहयोग और संपर्क सहित अन्य मुद्दों पर भी चर्चा होगी. इससे पहले विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा था कि एससीओ परिषद के सदस्य देशों के प्रमुखों की 21वीं बैठक शुक्रवार को हाइब्रिड प्रारूप में दुशांबे में हो रही है जिसकी अध्यक्षता ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमान कर रहे हैं.

    दुशांबे में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री एस जयशंकर करेंगे. मंत्रालय के अनुसार, एससीओ की शिखर बैठक में सदस्य देशों के नेताओं के अलावा पर्यवेक्षक देश, संगठन के महासचिव, एससीओ क्षेत्रीय आतंकवाद निरोधक ढांचे के कार्यकारी निदेशक, तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति एवं अन्य आमंत्रित अतिथि शामिल होंगे. दुशांबे में जयशंकर एससीओ के सदस्य देशों के प्रमुखों की अफगानिस्तान पर एक बैठक में शामिल होंगे.

    ये भी पढ़ें: SCO Summit: सभ्यताओं के टकराव संबंधी सिद्धांत पर नहीं चलता भारत; चीनी विदेश मंत्री से बोले जयशंकर

    पहली बार एससीओ की शिखर बैठक हाइब्रिड प्रारूप में आयोजित की जा रही है और यह चौथी शिखर बैठक है जिसमें भारत एससीओ के पूर्णकालिक सदस्य के रूप में हिस्सा ले रहा है. हाईब्रिड प्रारूप के तहत आयोजन के कुछ हिस्से को डिजिटल आधार पर और शेष हिस्से को आमंत्रित सदस्यों की भौतिक उपस्थिति के माध्यम से संपन्न किया जाता है. विदेश मंत्रालय का कहना है कि इस बैठक का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि संगठन इस वर्ष अपनी स्थापना की 20वीं वर्षगांठ मना रहा है.

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