इजरायल: गठबंधन में अलग-अलग विचारधारा की 8 पार्टियां, क्या चलेगी नई सरकार?

इजरायल के संभावित प्रधानमंत्री के तौर पर नफ्ताली बेनेट की अटकलें लग रही हैं- (Photo- news18 English via Reuters)

इजरायल के संभावित प्रधानमंत्री के तौर पर नफ्ताली बेनेट की अटकलें लग रही हैं- (Photo- news18 English via Reuters)

Israel New Govt कुछ लोग इस गठबंधन को ऐतिहासिक मान रहे हैं क्योंकि इसमें अरब पार्टी भी शामिल है. इससे इजरायल में जारी राजनीतिक गतिरोध दूर होगा जिसकी वजह से बीते दो सालों में देश को चार बार चुनावों का सामना करना पड़ा

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यरुशलम.12 साल तक प्रधानमंत्री रहे बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) का राज खत्म हो गया है. नफ्ताली बेनेट (Naftali Bennett) इजरायल के नए प्रधानमंत्री होंगे. नेतन्याहू इजरायल के इतिहास में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री के पद पर बने रहने वाले नेता हैं जिन्होंने देश के संस्थापक डेविड बेन गुरियन के रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया. इजरायल के विपक्षी दलों ने नेतन्याहू को सत्ता से बेदखल करने के लिए आखिरी वक्त में गेमप्लान तैयार किया. ये घोषणा 120 सदस्यीय संसद ‘नेसेट’ के नेतन्याहू विरोधी खेमों के नेताओं से एक के बाद एक हुई बैठकों के बाद की गई.

येश अतीद पार्टी के नेता याइर लापिद ने घोषणा की कि आठ दलों का एक गठबंधन राजनीतिक बातचीत के माध्यम से बनाया गया है. रोटेशन पॉलिसी के तहत यामिना पार्टी के नफ़्ताली बेनेट पहले प्रधानमंत्री होंगे और उनके बाद लापिद देश के प्रधानमंत्री होंगे. एक्सपर्ट का मानना है कि नए गठबंधन में अलग-अलग विचारधारा के लोग हैं. ऐसे में इस गठबंधन का चलना आसान नहीं होगा.

कुछ लोग इस गठबंधन को ऐतिहासिक मान रहे हैं क्योंकि इसमें अरब पार्टी भी शामिल है. इससे इजरायल में जारी राजनीतिक गतिरोध दूर होगा जिसकी वजह से बीते दो सालों में देश को चार बार चुनावों का सामना करना पड़ा क्योंकि नतीजे निर्णायक नहीं थे. लापिद के गठबंधन में, येश अतीद, कहोल लावन, लेबर, यामिना, न्यू होप, मेरेट्ज़ और यूनाइटेड अरब लिस्ट जैसे राजनीतिक दल शामिल होंगे.

टाइम्स ऑफ इजरायल ने कहा कि इस कदम के पीछे यह आशंका भी है कि कहीं सरकार के शपथ ग्रहण से पहले नेसेट के सदस्यों का उत्साह ठंडा न पड़ जाए. इस बीच बृहस्पतिवार की सुबह बेनेट को प्रधानमंत्री को दी जाने वाली शिन बेट सुरक्षा मुहैया कराई गई. अगर यह सरकार विश्वास मत हासिल करने में कामयाब रहती है तो वो देश को अप्रैल 2019 के बाद से होने वाले पांचवें चुनाव का सामना करने से बचा सकती है.

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खास बात है कि नेतन्याहू को पद से हटाने के लिए एकजुट हुए लोगों में से एक तिहाई वैचारिक तौर पर उनके “स्वाभाविक सहयोगी” हैं और पूर्व में उनके करीबी सहयोगियों के तौर पर काम भी कर चुके हैं. प्रस्तावित गठबंधन विशिष्ट है क्योंकि वामपंथी, दक्षिणपंथी और मध्यमार्गी जैसी विरोधी विचारधाराओं वाले दल अरब पार्टी के साथ मिलकर एक राष्ट्रीय एकता की सरकार बनाने के लिए सहमत हुए और साथ आए जैसा पहले कभी इस यहूदी राष्ट्र में नहीं हुआ.




हिंदी अखबार दैनिक भास्कर से बातचीत करते हुए डिफेंस और फॉरेन पॉलिसी एक्सपर्ट हर्ष पंत ने बताया कि विपक्षी दलों के गठबंधन का एक ही मकसद था नेतन्याहू को हटाना. उन्होंने कहा कि इजरायल ने दो साल में चार चुनाव देख लिए, लेकिन, किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला. नेतन्याहू सबसे बड़े दल लिकुड पार्टी के नेता हैं, लेकिन उनके पास भी बहुमत नहीं था. (एजेंसी इनपुट के साथ)

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