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पाकिस्तानी परमाणु वैज्ञानिक को बस मारने ही वाली थी 'मोसाद', लेकिन एक गलती से बच गई जान

तबीयत बिगड़ने के बाद उनका 85 वर्ष की उम्र में निधन हो गया.

तबीयत बिगड़ने के बाद उनका 85 वर्ष की उम्र में निधन हो गया.

इजरायल (Israel) को सही समय पर पता चल जाता तो मोसाद (Mossad) के पूर्व प्रमुख शबताई शावित ने वैज्ञानिक की हत्या के लिए एक टीम भेज दी होती. अब्दुल कादिर खान की रविवार को तबीयत बिगड़ने के बाद उनका 85 वर्ष की उम्र में निधन हो गया.

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    येरुशलम. पाकिस्तान (Pakistan) और मुस्लिम देशों का पहला परमाणु मिसाइल (Nuclear Missile) बनाने वाले पाकिस्तान के डॉ. अब्दुल कादिर खान (Abdul Qadir Khan) का दो दिन पहले निधन हो गया. अब उनसे जुड़ा एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है. एक इजरायली खोजी पत्रकार योसी मेलमैन (Yossi Melman) ने दावा किया है कि अगर अब्दुल कादिर के परमाणु बम तैयार करने के इरादे के बारे में इजरायल (Israel) को सही समय पर पता चल जाता तो मोसाद (Mossad) के पूर्व प्रमुख शबताई शावित ने वैज्ञानिक की हत्या के लिए एक टीम भेज दी होती. अब्दुल कादिर खान की रविवार को तबीयत बिगड़ने के बाद उनका 85 वर्ष की उम्र में निधन हो गया.

    पत्रकार ने हारेत्ज डेली में दावा किया कि अब्दुल कादिर ने पाकिस्तान को बम दिया, परमाणु सीक्रेट को चुराया और बेचा, एक छायादार वैश्विक प्रसार नेटवर्क से पैसा कमाया, ईरान (Iran) को परमाणु रास्ते पर जाने में मदद की, लीबिया के मुअम्मर गद्दाफी को उसके रिएक्टर महत्वाकांक्षाओं को लेकर मदद की. इसके बाद भी इजरायली जासूसी एजेंसी मोसाद के हाथों मारे जाने के बजाय उनकी मौत प्राकृतिक तरीकों से हुई है.

    अब्दुल कादिर की यात्राओं पर थी मोसाद की नजर
    रविवार को एक लंबी बीमारी के बाद पाकिस्तान में उनका निधन हो गया. ‘हाऊ पाकिस्तान्स एक्यू खान, फादर ऑफ द मुस्लिम बम, एस्केप्ड मोसाद एसेसिनेशन’ आर्टिकल लिखने वाले मेलमैन ने कहा कि मोसाद ने मध्यपूर्व में अब्दुल कादिर की व्यापक यात्राओं को नोट किया था. लेकिन एक छायादार प्रसार नेटवर्क बनाने के उनके इरादें की सही तरीके से पहचान हीं हो पाई.

    मोसाद की टीम हत्या के लिए पहुंच जाती
    मेलमैन ने लिखा कि उस समय मोसाद प्रमुख शबताई शावित के नेतृत्व में इजरायल की खुफिया एजेंसी ने इस क्षेत्र में अब्दुल कादिर की यात्रियों पर नजर रखी. लेकिन शावित ने डेढ़ दशक पहले मुझे बताया था कि मोसाद और अमन (इजरायल की सैन्य खुफिया विभाग) को समझ नहीं आया कि आखिर कादिर क्या कर रहे थे.’ शावित ने कहा था कि अगर उन्होंने और उनके सहयोगियों ने कादिर के इरादों को ठीक तरह से भांपा होता तो वह उन्हें मारने के लिए मोसाद की एक टीम को भेजते. इस तरह इतिहास के पाठ्यक्रम को ही बदल दिया जाता. कम से कम इजरायल-ईरान के संबंधों का परिप्रेक्ष्य तो बदल ही जाता.

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