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लापता पत्रकार ने आखिरी कॉलम में लिखा था- अपनी बनाई लोहे की दीवार में घिरा है अरब जगत

जाने माने पत्रकार जमाल खशोगी को लापता हुए दो सप्ताह हो गए हैं. (FIle Photo:AP)

जाने माने पत्रकार जमाल खशोगी को लापता हुए दो सप्ताह हो गए हैं. (FIle Photo:AP)

खशोगी के कॉलम के साथ उनकी फोटो लगाई गई है और उसकी प्रस्तावना में पोस्ट की ग्लोबल ओपीनियन एडिटर कारेन अतिया ने लिखा कि समाचार पत्र ने इस लेख को इस उम्मीद पर रोक कर रखा था कि वह लौट आएंगे.

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    जाने माने पत्रकार जमाल खशोगी को लापता हुए दो सप्ताह हो गए हैं और ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ ने उनका एक लेख प्रकाशित किया है जिसमें खशोगी ने अरब जगत में स्वतंत्र प्रेस के महत्व पर चर्चा की है. इसे खशोगी का अंतिम लेख माना जा रहा है.

    कॉलम में खशोगी ने लिखा, ‘अरब जगत एक प्रकार से अपनी ही बनाई लोहे की दीवार का सामना कर रहा है जो किसी बाहरी ने नहीं बल्कि सत्ता की लालसा रखने वाली आंतरिक ताकतों ने बनाई है. अरब जगत को पुराने अंतरराष्ट्रीय मीडिया के नए संस्करण की आवश्यकता है ताकि नागरिकों को वैश्विक घटनाक्रमों की जानकारी मिल सके. हमें अरब की आवाजों को मंच उपलब्ध कराने की आवश्यकता है.'

    उन्‍होंने 2018 की फ्रीडम प्रेस रिपोर्ट का जिक्र करते हुए लिखा कि अरब जगह में केवल ट्यूनीशिया ही इकलौता देश है जो पत्रकारिता के लिए खुला है. इसके बाद मोरक्‍को, जॉर्डन और कुवैत का नाम है और थोड़े बहुत खुले हैं. बाकी सभी देश प्रेस पर पाबंदियां है.

    कॉलम में लिखा है, '2011 में जब अरब स्प्रिंग शुरू हुई थी तब जनता को उम्‍मीद थी कि अब एक चमकदार और पाबंदीरहित अरब समाज होगा. लेकिन जल्‍द ही यह उम्‍मीदें टूट गई क्‍योंकि कुछ देशों में फिर से पुराने वाले हालात हो गए तो कुछ भी उससे भी बुरी स्थिति हो गई.'

    अपने दोस्‍त और सऊदी अरब के प्रमुख लेखक सालेह अल शेही का उल्‍लेख करते हुए खशोगी ने लिखा कि उन्‍होंने सऊदी प्रेस का सबसे प्रख्‍यात लेख लिखा. लेकिन दुर्भाग्‍य से सऊदी सरकार के खिलाफ लिखने पर उन्‍हें पांच साल के लिए जेल में डाल दिया गया. ऐसा ही कुछ मिस्र में हुआ जहां पर सरकार ने अल मासरी अल यौम नाम के अखबार को ही सील कर दिया. इन सबका नतीजा यह हुआ कि अरब सरकारें मीडिया को खामोश करने के लिए तेजी से काम कर रही है. एक समय था जब पत्रकारों को लगता था कि इंटरनेट आने से सूचना से पाबंदी हटेगी. लेकिन इन सरकारों ने बड़ी आक्रामकता से इंटरनेट को ब्‍लॉक किया.

    खशोगी के कॉलम के साथ उनकी फोटो लगाई गई है और उसकी प्रस्तावना में पोस्ट की ग्लोबल ओपीनियन्स एडिटर कारेन अतिया ने लिखा कि समाचार पत्र ने इस लेख को इस उम्मीद पर रोक कर रखा था कि वह लौट आएंगे.

    अतिया ने लिखा है, ‘अब मुझे यह स्वीकार करना होगा: यह अब कभी नहीं होगा. उनका यह अंतिम लेख है जो मैं पोस्ट के लिए संपादित करूंगी. यह कॉलम अरब जगत में आजादी के लिए उनके जुनून और प्रतिबद्धता को पूरी तरह से दर्शाता है. एक ऐसी आजादी, जिसके लिए स्पष्ट रूप से उन्होंने अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी.’

    (भाषा इनपुट के साथ) 

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