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सलमान रुश्दी पर हमले को लेकर क्यों परेशान हैं ईरानी लोग? बोले- उन्होंने इस्लाम का...

सलमान रुश्दी पर हमले को लेकर क्यों परेशान हैं ईरानी लोग? बोले- उन्होंने इस्लाम का...

ईरानियों ने मशहूर उपन्यासकार सलमान रुश्दी पर हुए हमले को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है.

ईरानियों ने मशहूर उपन्यासकार सलमान रुश्दी पर हुए हमले को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है.

ईरान की सरकार एवं उसकी सरकारी मीडिया ने इस हमले का कोई मकसद नहीं बताया है. लेकिन तेहरान में कुछ लोगों ने लेखक पर हमले की सराहना की

हाइलाइट्स

यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हमलावर हदी मतार ने लेखक पर क्यों हमला किया.
पश्चिमी न्यूयॉर्क के चौटाउक्वा संस्थान में शुक्रवार को एक कार्यक्रम के दौरान सलमान रुश्दी पर हमला हुआ.
सलमान रुश्दी पर हुए हमले को लेकर ईरान के लोगों ने मिश्रित प्रतिक्रिया दी है.

तेहरान. ईरानियों ने मशहूर उपन्यासकार सलमान रुश्दी पर हुए हमले को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है. रुश्दी की पुस्तक ‘‘द सैटेनिक वर्सेज’’ को लेकर ईरान के तत्कालीन ( अब दिवंगत) सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला रूहोल्लाह खमनेई ने उन्हें (रुश्दी को) मौत की सजा का फतवा जारी किया. वैसे अबतक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हमलावर हदी मतार ने लेखक पर क्यों हमला किया. रुश्दी जब शुक्रवार को न्यूयार्क में एक कार्यक्रम में अपना संबोधन शुरू करने वाले थे, तब उसने उनपर हमला किया था. ईरान की सरकार एवं उसकी सरकारी मीडिया ने इस हमले का कोई मकसद नहीं बताया है. लेकिन तेहरान में कुछ लोगों ने लेखक पर हमले की सराहना की, क्योंकि उनका मानना है कि रुश्दी ने 1988 में आई अपनी पुस्तक ‘‘द सैटेनिक वर्सेज’’ इस्लाम धर्म की छवि को नुकसान पहुंचाया है.

ईरान की राजधानी तेहरान की गलियों में लोगों के जेहन में अब भी खमैनी का फतवा है. रेजा अमिरी नामक एक व्यक्ति ने कहा, ‘‘मैं सलमान रुश्दी को नहीं जानता, लेकिन मुझे यह सुनकर खुशी हुई है कि उनपर हमला किया गया क्योंकि उन्होंने इस्लाम का अपमान किया है.’’ तेहरान में रह रहे 34 वर्षीय मोहम्मद महदी मोवाघर ने कहा कि यह सुखद है और यह दिखाता है कि जो लोग हम मुस्लिमों की पवित्र चीजों का अपमान करते हैं उन्हें परलोक में सजा के अलावा इस दुनिया में भी लोगों द्वारा सजा मिलेगी. हालांकि कुछ ऐसे भी लोग हैं जिन्हें चिंता है कि ईरान दुनिया से और कट जाएगा. वैसे भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव चल रहा है.

भूगोल शिक्षक माहशिद बराती (39) ने कहा, ‘‘ मैं मानती हूं कि जिन्होंने ऐसा किया है, वे ईरान को अलग-थलग करने का प्रयास कर रहे हैं.’’ खमनेई ने रुश्दी को मौत की सजा दिए जाने का फतवा 1989 में जारी किया था. मुंबई में पैदा हुए और बुकर पुरस्कार से सम्मानित रुश्दी (75) पश्चिमी न्यूयॉर्क के चौटाउक्वा संस्थान में शुक्रवार को एक कार्यक्रम के दौरान अपना व्याख्यान शुरू करने वाले ही थे कि तभी हदी मतार नामक व्यक्ति ने चाकू से उन पर हमला कर दिया. उनकी गर्दन पर चोट आई है. रुश्दी के विरूद्ध उन पुस्तक ‘‘द सैटेनिक वर्सेज’’ को लेकर मौत का फतवा जारी किया गया था.

Tags: Iran, Salman Rushdie

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