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भारत पहुंचे सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बोले- तालिबान को करने होंगे अपने वादे पूरे

भारत पहुंचे सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बोले- तालिबान को करने होंगे अपने वादे पूरे

सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने जयशंकर से की मुलाकात.

सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने जयशंकर से की मुलाकात.

भारत पहुंचते ही सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान (Prince Faisal Bin Farhan) ने सख्‍त संदेश देते हुए कहा कि तालिबान (Taliban) को आतंकियों और समावेशी सरकार पर अपने वादे को पूरा करना ही होगा.

  • News18Hindi
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    रियाद. सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान (Prince Faisal Bin Farhan) रविवार को भारत (India) के दौरे पर नई दिल्‍ली पहुंच गए. सऊदी अरब के शीर्ष नेताओं में शुमार प्रिंस फैसल ऐसे समय पर भारत पहुंचे हैं जब अफगानिस्‍तान में तालिबानी आतंकियों के दमन का डर बढ़ता जा रहा है. भारत पहुंचते ही प्रिंस फैसल ने सख्‍त संदेश देते हुए कहा कि तालिबान को आतंकियों और समावेशी सरकार पर अपने वादे को पूरा करना ही होगा. माना जा रहा है कि भारत और सऊदी अरब के बीच बातचीत का केंद्र बिन्‍दू तालिबान ही रह सकता है. भारत के दो दिवसीय दौरे के दौरान प्रिंस फैसल भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे. कोरोना वायरस महामारी के प्रसार के बाद किसी सऊदी नेता की भारत की पहली यात्रा है. तालिबान के कब्‍जे के बाद किसी सऊदी नेता की यह पहली भारत यात्रा है. विदेश मंत्री जयशंकर ने प्रिंस फैसल से मुलाकात के बाद कहा, ‘हमारी अफगानिस्‍तान, खाड़ी देशों और हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर विचारों का बहुत प्रभावी आदान प्रदान हुआ है.’

    सऊदी अरब में भारत के राजदूत रह चुके तलमीज अहमद अरब न्‍यूज से कहते हैं, ‘सऊदी अरब और भारत की अफगानिस्‍तान के आतंकियों की शरणस्‍थली बनने को लेकर साझी चिंता है. अगर ऐसा होता है तो यह न केवल पड़ोसी देशों बल्कि पूरे विश्‍व के लिए बहुत खतरनाक हो सकता है.’ उन्‍होंने कहा, ‘यह स्‍वाभाविक है कि दोनों ही नजदीकी भागीदार अफगानिस्‍तान पर चर्चा करेंगे. यह एक-दूसरे के बीच गहरे हुए संबंधों को दर्शाता है.’ तलमीज अहमद कहते हैं, ‘हम हमारे बीच शीर्ष स्‍तर पर एक रणनीतिक काउंसिल है. इसी वजह से जो रिश्‍ता आतंकवाद के खिलाफ बनना शुरू हुआ था, वह अब बहुत मजबूत हो गया है और रणनीतिक भागीदारी में बदल गया है.’ तालिबान की ओर से किए गए तमाम वादों के बाद भी नया प्रशासन खासतौर पर महिलाओं को लेकर वर्ष 1990 के दशक के कट्टर इस्‍लामिक शासन की ओर ही बढ़ रहा है. महिलाओं को काम से हटाया जा रहा है और वे बेरोजगार हो रही हैं.

    सऊदी कर रहा है अफगानिस्ता में आतंकवाद का विरोध
    सऊदी अरब ने तालिबानी शासन आने के बाद भी अभी तक उसे मान्‍यता देने के प्रति कोई हड़बड़ी नहीं दिखाई है. इससे पहले वर्ष 1990 के दशक में आई तालिबान सरकार को सबसे पहले मान्‍यता देने वाले देशों में सऊदी अरब शामिल था. ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले समय में सऊदी अरब एक बार फिर से अफगानिस्‍तान में बड़ी भूमिका निभा सकता है. सऊदी अरब भारत की तरह से ही अफगानिस्‍तान में लगातार आतंकवाद के निर्यात का विरोध कर रहा है. वहीं भारत अफगानिस्‍तान में पाकिस्‍तानी आतंकियों की सक्रियता का मुद्दा जोरशोर से सऊदी अरब के साथ उठा सकता है.

    ‘तालिबान को करने होंगे वादे पूरे’
    भारत पहुंचने पर प्रिंस फैसल ने साफ कहा है कि तालिबान ने दुनिया के आगे जो वादे किए हैं, वे पूरे करने होंगे. उन्‍होंने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्‍स ऑफ इंडिया से कहा, ‘तालिबान ने अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय से सुरक्षा और आतंकी समूहों को जड़ें जमाने की अनुमति नहीं देने का वादा किया है. और निश्चित ही हमें उन्‍हें जवाबदेह ठहराने का रास्‍ता खोजना होगा. और इस‍के लिए अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय के बीच समन्वित दृष्टिकोण की जरूरत पड़ेगी.’ अफगानिस्तान में तालिबान के सत्‍ता संभालने के बाद पहली बार सऊदी ने इतनी सफाई से राय रखी है.

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    ‘काबुल की कमान तालिबान के हाथ में’
    प्रिंस फैसल ने कहा, ‘काबुल की कमान अब तालिबान के हाथ में है. उनके ऊपर अफगान लोगों को स्थिरता देने, एक ऐसी सरकार बनाने जो अफगानिस्‍तान के लोगों को जरूरी सुरक्षा मुहैया कराए, साथ ही जरूरी आर्थिक, सामाजिक और अन्‍य ढांचे भी उपलब्‍ध कराए, का जिम्‍मा है. और मुझे लगता है कि उसे हासिल करने का एक ही रास्‍ता है कि समाज के सभी अंगों को शामिल किया जाए.

    Tags: Afghanistan, Hindi news, S Jaishankar, Saudi arabia, Saudi Crown Prince, Taliban

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