अमेरिका फिर यरूशलेम में खोलेगा वाणिज्य दूतावास, फिलिस्तीन से संबंध बहाली के संकेत

अमेरिका यरूशलेम में अपना वाणिज्य दूतावास खोलेगा.

अमेरिका यरूशलेम में अपना वाणिज्य दूतावास खोलेगा.

इज़राइल और हमास के बीच 11 दिन की जंग के बाद हुए सीज़फायर की स्थिति जानने और इसे मजबूत करने के उद्देश्य से अमेरिकी विदेश मंत्री न फिलिस्तीन के राष्ट्रपति से मुलाकात की. उन्होंने इस दौरान कहा कि अमेरिका यरूशलेम में अपना महावाणिज्य दूतावास एक बार फिर खोलेगा, हालांकि उन्होंने इसकी तारीख नहीं बताई.

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यरूशलेम. अमेरिका की बाइडेन सरकार ने पुरानी ट्रंप सरकार के एक और अहम फैसले को पलटा है. अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने मंगलवार को घोषणा कर दी है कि अमेरिका यरूशलेम में अपना महावाणिज्य दूतावास फिर खोलेगा. यह कदम फिलस्तीनियों के साथ संबंध बहाल करने का परिचायक है जिसे ट्रंप प्रशासन ने घटा दिया था. इस वाणिज्य दूतावास ने लंबे समय तक एक ऐसे स्वायत्त कार्यालय के रूप में काम किया, जहां फिलस्तीनियों के साथ राजनयिक संबंधों की जिम्मेदारी निभायी गयी. हालांकि जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बने तो उन्होंने इसका कामकाज घटा दिया था. उन्होंने उसे इस्राइल के अपने राजदूत के प्राधिकार के अंतर्गत रख दिया था और दूतावास यरूशलेम ले गए.

ट्रंप के कदम से फलस्तीनी नाराज हो गए. वे पूर्वी यरूशलेम को कब्जे में लिए गए क्षेत्र के रूप में देखते हैं और उसे अपनी भावी राज्य की राजधानी मानते हैं.

अमेरिका के विदेश मंत्री ब्लिंकन ने वाणिज्य दूतावास को फिर से खोलने की तारीख नहीं बताई है. कब्जे वाले पश्चिमी तट पर रमल्ला में फिलस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास के साथ मुलाकात के बाद ब्लिंकन ने इस कदम की घोषणा की. अमेरिका गजा के सत्तारूढ़ हमास आतंकवादी संगठन के साथ अब्बास की प्रतिद्वंद्विता में उनका हाथ मजबूत करने का प्रयास कर रहा है.

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अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा, ‘जैसा कि मैंने राष्ट्रपति से कहा कि, मैं फिलस्तीन प्राधिकरण और फिलस्तीनी लोगों के साथ फिर से रिश्ता कायम करने के अमेरिका के संकल्प पर बल देने के लिए यहां हूं. यह एक ऐसा रिश्ता है जो परस्पर सम्मान और इस साझे विश्वास पर पर आधारित होगा कि फिलस्तीनी और इजराइली सुरक्षा, आजादी के अवसर और गरिमा के समान उपाय के हकदार हैं.’ब्लिंकन पिछले हफ्ते हुए सीज़फायर को मजबूत करने के लिए इस इलाके की यात्रा पर आए हैं.

आपको याद दिला दें कि इस्राइल और हमास के बीच 11 दिनों की जंग चली थी. इस जंग में दोनों पक्षों को मिलाकर 250 से अधिक लोगों की जान चली गई थी. आखिरकार इजिप्ट की मध्यस्थता के बाद इज़राइल सीज़फायर के लिए राज़ी हुआ था.

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