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आखिर पाकिस्तान को इतना कर्ज क्यों देता है सऊदी अरब? उसे क्या है फायदा?

आखिर पाकिस्तान को इतना कर्ज क्यों देता है सऊदी अरब? उसे क्या है फायदा?

पाकिस्तान के पीएम इमरान खान और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (AP)

पाकिस्तान के पीएम इमरान खान और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (AP)

मई के बाद पाकिस्तान (Pakistan)की मुद्रा रुपये में 13.6 फीसदी की गिरावट आई. इसी हफ्ते मंगलवार को एक डॉलर के लिए पाकिस्तान में 175.80 रुपये देने पड़ रहे थे. अब भी एक डॉलर की कीमत 173 रुपये के आसपास है. ऐसे में सवाल ये है कि जब विश्व बैंक (World Bank)और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF)ने भी पाकिस्तान को और लेने देने से इनकार कर दिया है, तो सऊदी अरब (Saudi Arabia)इस मुल्क को कर्जा क्यों दे रहा है. इससे उसे क्या फायदा होगा?

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    दुबई. पाकिस्तान (Pakistan) की माली हालत हर दिन खराब होती जा रही है. 2018 में पाकिस्तान की जीडीपी 315 अरब डॉलर की थी, जो अब 255 अरब डॉलर पर पहुंच गई है. कराची स्टॉक एक्सचेंज (Karachi Stock Exchange) का मार्केट कैप 112 अरब डॉलर था, जो अब 43.7 अरब डॉलर हो गया है. पाकिस्तान में प्रति व्यक्ति आय (Pakistan Per Capita Income) 2018 में 1540 डॉलर सालाना थी, जो अब 1140 डॉलर हो गई है. इन सबके बीच सऊदी अरब (Saudi Arabia) पाकिस्तान का बड़ा मददगार साबित हो सहा है.

    सऊदी ने हाल ही में पाकिस्तान को 3 अरब रुपये देने की बात कही है. ये रकम पाकिस्तान के सेंट्रल बैंक में डिपॉजिट कराए जाएंगे. ऐसे में सवाल ये है कि जब विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भी पाकिस्तान को और लेने देने से इनकार कर दिया है, तो सऊदी अरब इस मुल्क को कर्जा क्यों दे रहा है. इससे उसे क्या फायदा होगा?

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    अल-जज़ीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान और सऊदी की दुश्मनी पुरानी है. कई विश्लेषकों का मानना है कि सऊदी पाकिस्तान के जरिए ईरान को काबू में रखना चाहता है. फ्रांस में रह रहे पाकिस्तान के निर्वासित अवॉर्ड विनिंग पत्रकार ताहा सिद्दीक़ी ने अल-जज़ीरा में 16 फरवरी 2019 को इस संबंध में एक लेख लिखा था. इसमें कहा गया था कि सऊदी आर्थिक पैकेज और निवेश के वादों के जरिए आर्थिक रूप से तंगहाल पाकिस्तानी सरकार की वफादारी खरीदने की कोशिश करता है. वह अपने हिसाब से पाकिस्तानी सीमाओं पर नीतियां बनवाता है.

    मई महीने के बाद पाकिस्तान की मुद्रा रुपये में 13.6 फीसदी की गिरावट आई. इसी हफ्ते मंगलवार को एक डॉलर के लिए पाकिस्तान में 175.80 रुपये देने पड़ रहे थे. अब भी एक डॉलर की कीमत 173 रुपये के आसपास है. पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार पिछले साल के आखिर में 17.93 अरब डॉलर था, इस साल सितंबर महीने के पहले हफ्ते में 19.96 अरब डॉलर तक पहुंचा था. ऐसे में पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार के लिए सऊदी अरब की ये खैरात बेहद अहम है.

    ताहा सिद्दीकी अपने आर्टिकल में आगे लिखा, ‘दोनों देशों के संबंधों में सऊदी का क़र्ज देना कोई नई बात नहीं है. इस्लामाबाद सऊदी के पैसे और अमेरिकी नीति के कारण रियाद के हमेशा करीब रहा है. जब ज़िआ-उल-हक़ ने लेफ़्ट विचारधारा की तरफ झुकाव रखने वाले ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो को 1977 में सत्ता से बेदख़ल किया, तब यह रिश्ता उभरकर सामने आया. ऐसा अमेरिका के क़रीब आने के लिए भी किया गया.

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    वही, अमेरिका पश्चिम एशिया में ईरान और सोवियत के प्रभाव को कम करने के लिए तब एक संयुक्त मोर्चा बनाना चाहता था. ऐसे में पाकिस्तान अमेरिका के लिए खास बना और साथ में सऊदी अरब का भी सहयोगी बना.

    यही नहीं, पाकिस्तान दुनिया का एकमात्र परमाणु शक्ति संपन्न इस्लामिक देश है. ऐसे में सऊदी को उसका साथ चाहिए ही. सऊदी जानता है कि उसकी सुरक्षा पर जब भी बात आएगी, तो दुनिया चाहे जिस ओर रहे, पाकिस्तान सऊदी के साथ ही खड़ा रहेगा.

    Tags: China and pakistan, Imran khan, India pakistan

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