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world first green flight from jeddah to madrid stopped 10000 kg carbon emissions

दुनिया की पहली ग्रीन फ्लाइट की पहली उड़ान, 10 हजार किलो तक कार्बन उत्सर्जन रोका

10 घंटे की उड़ान में 7 किलो वजन कम होने से 36 किलो कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) कम निकलती है. (फाइल)

10 घंटे की उड़ान में 7 किलो वजन कम होने से 36 किलो कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) कम निकलती है. (फाइल)

ग्रीन फ्लाइट में उड़ान के लिए हर स्तर पर विमान के कार्बन फुट प्रिंट कम करने के इंतजाम किए गए. फ्लाइट में यात्रियों को जलवायु परिवर्तन के खतरे से बचाने के लिए ग्रीन प्वाइंट्स दिए गए. इस प्वाइंट्स का इस्तेमाल यात्री अगली उड़ानों में कर सकेंगे.

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जेद्दा. दुनिया की पहली ग्रीन फ्लाइट (World First Green Flight) ने गुरुवार को पहली उड़ान भरी. सऊदी अरब के जेद्दा से स्पेन की सेंट्रल राजधानी मैड्रिड के बीच इस ऐतिहासिक उड़ान के कई भारतीय भी हिस्सा बने. यह फ्लाइट जलवायु परिवर्तन रोकने को लेकर दुनिया की पहली ग्रीन फ्लाइट के रूप में दर्ज हुई है.

इसके उड़ान के लिए हर स्तर पर विमान के कार्बन फुट प्रिंट कम करने के इंतजाम किए गए. इसमें यात्रियों के बैगेज से लेकर उनके खान-पान की पहले से सटीक जानकारी दर्ज की गई. इस उड़ान ने एक दिन में 10 हजार किलो तक कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emission) रोका गया.

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यात्रियों को मिले ग्रीन पॉइंट्स
फ्लाइट में यात्रियों को जलवायु परिवर्तन के खतरे से बचाने के लिए ग्रीन प्वाइंट्स दिए गए. इस प्वाइंट्स का इस्तेमाल यात्री अगली उड़ानों में कर सकेंगे. यात्रियों से पहले ही पूछा गया कि वे कितना किलो सामान लेकर आएंगे. अगर किसी यात्री ने 7 किलो कम वजन लेकर आया, तो उसे 700 ग्रीन प्वाइंट्स दिए गए. पहले हर यात्री को विमान में 23-23 किलो के दो बैग ले जाने की इजाजत थी.

ऐसे कम हुआ कार्बन उत्सर्जन
10 घंटे की उड़ान में 7 किलो वजन कम होने से 36 किलो कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) कम निकलती है. यदि 200 यात्रियों ने अपना इतना ही वजन कम किया, तो एक ही उड़ान से 7200 किलो कार्बन ऑक्साइड बनने से रुक गई. इसी तरह खाने में शाकाहारी और ऑर्गेनिक विकल्प चुनने पर अधिक ग्रीन प्वाइंट्स दिए गए, जबकि मांसाहारी यात्रियों को कम ग्रीन प्वाइंट मिले.

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बता दें कि दुनिया के पास पर्यावरण बदलावों का सामना करने का मौका लगातार सिमटता जा रहा है. भारत दुनिया में तीसरा सबसे ज़्यादा कार्बन उत्सर्जक देश है. ऐसे में भारत के लिए जरूरी है कि वह ग्रीन इनिशिएटिव के तहत कार्बन उत्सर्जन को कम कर 1.5 डिग्री तापमान के पर्यावरण लक्ष्य को पाने के लिए अपनी विकास की योजनाओं को तैयार करे.

Tags: Saudi arabia

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