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    ब्रिटेन की वैक्सीन टास्कफोर्स की चीफ ने कहा- हो सकता है कोरोना वैक्सीन सब पर असरदार न हो

    कोरोना वैक्सीन सभी उम्र के लोगों पर असर न करे ऐसा भी हो सकता है!
    कोरोना वैक्सीन सभी उम्र के लोगों पर असर न करे ऐसा भी हो सकता है!

    Coronavirus Vaccine Update: ब्रिटेन (UK) की वैक्सीन टास्कफोर्स की चीफ केट बिंघम (Kate bingham) के मुताबिक पहली जनरेशन की वैक्सीन में यकीनन कुछ खामियां होंगी, हमें इस बात के लिए तैयार रहना चाहिए कि ये वैक्सीन सिम्पटम को घटाएगी न कि बीमारी का पूरी तरह इलाज करने में सक्षम होगी.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 28, 2020, 4:47 PM IST
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    लंदन. ब्रिटेन (UK) की वैक्सीन (Coronavirus Vaccine) टास्कफोर्स की चीफ केट बिंघम (Kate bingham) ने मंगलवार को ये कहकर सबको चौंका दिया कि हो सकता है कि कोरोना वैक्सीन सभी उम्र के लोगों पर असरकारक न हो. केट ने स्पष्ट कहा कि पहले चरण में जो वैक्सीन लोगों तक पहुंचेगी वो परफेक्ट नहीं होगी, उसमें कमियां होंगी और हो सकता है कि ये सभी लोगों के लिए कारगर साबित न हो. हालांकि ऑक्सफ़ोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन ने मंगलवार को कहा कि शुरूआती नतीजों में उनकी वैक्सीन बुजुर्गों पर भी असर दिखा रही है जो कि काफी ख़ुशी की बात है.

    केट ने कहा कि फिलहाल तो हमें ये भी नहीं पता कि वैक्सीन कब तक बनेगी और या ये कभी बन भी पाएगी या नहीं. हमें ज़रुरत से ज्यादा सकारात्मकता में में नियमों में ढील देने की कोई जरूरत नहीं है, ये अभी खतरनाक है. लैंसेट जर्नल से बातचीत में उन्होंने कहा कि पहली जनरेशन की वैक्सीन में यकीनन कुछ खामियां होंगी, हमें इस बात के लिए तैयार रहना चाहिए कि ये वैक्सीन सिम्पटम को घटाएगी न कि बीमारी का पूरी तरह इलाज करने में सक्षम होगी. इतना ही नहीं सिम्पटम घटाने के मामले में भी शायद ये हर उम्र के लोगों के लिए कारगर साबित न हो. केट के मुताबिक 65 साल से ज्यादा कि उम्र के व्यक्तियों के लिए अभी परफेक्ट वैक्सीन का इन्तजार और लंबा हो सकता है. उन्होंने कहा कि वैक्सीन बन भी गयी तो उसे सब तक पहुंचाना एक बड़ा चैलेंज होगा और कोरोना जैसी बीमारियों में इनके बार-बार फैलने का खतरा बना रहेगा.





    ऑक्सफोर्ड वैक्सीन के नतीजे बढ़िया
    ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने मंगलवार को कहा कि परीक्षण के लिए जिन लोगों को भी उसकी कोरोना वैक्सीन की खुराक दी गई है, उनमें मजबूत प्रतिरक्षा विकसित हुई है. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ब्रिटेन की दवा कंपनी एस्ट्राजेनेका के साथ मिलकर कोरोना वैक्सीन विकसित कर रही है. हालांकि, परीक्षण के शुरुआती नतीजों को आधिकारिक तौर पर अभी जारी नहीं किया गया है, लेकिन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एंड्र्यू पोलार्ड ने हाल ही में एकरिसर्च कांफ्रेंस में कहा कि सकारात्मक नतीजे मिले हैं. यूनिवर्सिटी की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि प्रोफेसर पोलार्ड ने दूसरे चरण के सुरक्षा और प्रतिरक्षा प्रणाली का जिक्र किया था. इस चरण में ब्रिटेन में 56 से 69 और 70 साल से अधिक उम्र के लोगों पर ट्रायल किया गया है. एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन का इंसानों पर तीसरे चरण का क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है. वैक्सीन की दौड़ में यह सबसे आगे बनी हुई है.

    बुजुर्गो पर कारगर दिखा टीका
    बता दें कि परीक्षण के आखिरी दौर में चल रही इस वैक्सीन को बुजुर्गो में भी युवाओं जितना ही कारगर पाया गया है. बढ़ती उम्र के साथ कमजोर पड़ती प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) को देखते हुए बुजुर्गो पर टीके का यह असर उत्साहजनक है. इस बीच, समाचार पत्र 'द सन' ने लंदन के एक बड़े हॉस्पिटल ट्रस्ट के स्टाफ के हवाले से बताया है कि अस्पतालों को दो नवंबर से टीका लगाने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया गया है. कोरोना से जूझती वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए वैक्सीन का जल्द से जल्द बाजार में आना बहुत सुकून की बात होगी.





    एस्ट्राजेनेका के प्रवक्ता ने कहा, 'यह उत्साह बढ़ाने वाली बात है कि वैक्सीन ने युवाओं और बुजुर्गो दोनों में समान असर दिखाया है. साथ ही बुजुर्गो में इसका दुष्प्रभाव भी कम दिखा है. इन नतीजों ने वैक्सीन के सुरक्षित और कारगर होने की दिशा में एक और प्रमाण दिया है.' बढ़ती उम्र के साथ शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम होती जाती है. यही कारण है कि वायरस के कारण जान गंवाने वालों में बुजुर्गो की तादाद ज्यादा है. ऐसे में बुजुर्ग लोगों में भी वैक्सीन की मदद से बेहतर इम्यून रेस्पांस पैदा होना अच्छी खबर है. अगर यह वैक्सीन आगे भी कारगर रही तो महामारी से जूझ रही दुनिया को जल्द से जल्द सामान्य होने में मदद मिलेगी.
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