लेबनान के प्रधानमंत्री बनाए जाएंगे मुस्तफा अदीब, फ्रांस ने बनाया दबाव

लेबनान के प्रधानमंत्री बनाए जाएंगे मुस्तफा अदीब, फ्रांस ने बनाया दबाव
मुस्तफा अदिब लेबनान के नए प्रधानमंत्री बनाए जा रहे हैं.

मुस्तफा अदिब को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन (French President Emmanuel Macron) की लेबनान यात्रा से पहले प्रधानमंत्री नामित किया जाना है. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन सोमवार को लेबनान की राजधानी बेरुत पहुंच रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 31, 2020, 4:40 PM IST
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बेरुत. जर्मनी में लेबनान के राजदूत मुस्तफा अदीब (Mustapha Adib) को देश का नया प्रधानमंत्री (Prime Minister of Lebanon) बनाया जा रहा है. मुस्तफा अदीब को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन (French President Emmanuel Macron) की लेबनान यात्रा से पहले प्रधानमंत्री नामित किया जाना है. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन सोमवार को लेबनान की राजधानी बेरुत पहुंच रहे हैं. फ्रांसीसी राष्ट्रपति नए प्रधानमंत्री पर देश में चल रहे बड़े आर्थिक संकट से बाहर निकालने और लंबे समय तक सुधारों के लिए दबाव बनाएंगे.

वर्तमान राष्ट्रपति को सांसदों का समर्थन प्राप्त

पूर्व प्रधान मंत्री नजीब मिकाती पहले ऐसे सांसद थे, जिन्होंने औपचारिक रूप से अदीब को राष्ट्रपति महल में परामर्श के लिए नामित किया था. राष्ट्रपति मिशेल एउन को सांसदों का बहुत ज्यादा समर्थन है इसलिए उन्हें अदीब को उम्मीदवार नामित करना जरूरी है.



कोरोना ने बढ़ाया आर्थिक दिवालियापन
लेबनान तेजी से आर्थिक दिवालियापन, संस्थानों के खंडित होने, उच्च महंगाई दर और तेजी से बढ़ती गरीबी की ओर बढ़ रहा है और इन समस्याओं में महामारी ने और इजाफा कर दिया है. इस संकट से लेबनान के बिखरने का खतरा बढ़ गया है जो अरब में विविधता और मेलमिलाप के आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित है और इसके साथ ही अराजकता फैल सकती है.

लेबनान ने खुद पैदा की है यह समस्या

लेबनान धार्मिक संप्रदाय, कमजोर केंद्रीय सरकार, मजबूत पड़ोसी की वजह से क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता का शिकार होता रहा है जिससे राजनीतिक जड़ता, हिंसा या दोनों का उसे सामना करना पड़ता है. लेबनान हमेशा से ईरान और सऊदी अरब के वर्चस्व की लड़ाई का शिकार बनता रहता है,लेकिन मौजूदा समस्या स्वयं लेबनान द्वारा उत्पन्न है, जो दशकों से भ्रष्ट और लालची राजनीतिक वर्ग की वजह से उत्पन्न हुई है, जिसकी चोट अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र पर पड़ी है. दुनिया में सबसे अधिक सार्वजनिक कर्ज के बावजूद लेबनान कई वर्षों से दिवालिया होने से बचा रहा.

यहां व्हाट्सएप मैसेज पर लगता है टैक्स

उल्लेखनीय है कि परेशानी 2019 के आखिर में तब बढ़ी जब सरकार ने व्हाट्सएप मैसेज पर कर लगाने की इच्छा जताई जिसे लेकर पूरे देश में भारी प्रदर्शन शुरू हो गया. माना जा रहा है कि अपने नेताओं से परेशान लोगों के खिलाफ खुलकर सामने आने के लिए इसने आग में घी का काम किया.
यह प्रदर्शन करीब दो हफ्ते तक चला जिसके बाद बैंक में एवं उसके बाद अनौपचारिक रूप से पूंजी नियंत्रण करने वाले संस्थानों में भी विरोध शुरू हो गया जिससे डॉलर के निकालने या हस्तांतरित करने की सीमा तय कर दी गई.

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डेमोकैट्स ने कहा- ट्रंप ना करें विस्कोन्सिन का दौरा, वे बोले, 'एकजुटता' है इसका जवाब

विदेशी मुद्रा की कमी की वजह से लेबनानी पाउंड का मूल्य ब्लैक मार्केट में 80 प्रतिशत तक गिर गया है और मूलभत वस्तुओं व खाने पीने के समान की कीमत में बेतहाशा वृद्धि हुई. लेबनान विश्व मुद्रा कोष से मदद की उम्मीद कर रहा है लेकिन कई महीनों तक चली बातचीत के बावजूद कोई सहमति नहीं बन पाई है.
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