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monkeypox is spreading rapidly in europe and america amid the covid crisis know symptoms and prevention methods

यूरोप और अमेरिका में लोगों को तेजी से शिकार बना रहा 'मंकीपॉक्स वायरस', जानें लक्षण और बचाव के तरीके

इस बीमारी का असर पश्चिम और मध्य अफ्रीका में सबसे ज्यादा देखने को मिला है. (फाइल फोटो)

इस बीमारी का असर पश्चिम और मध्य अफ्रीका में सबसे ज्यादा देखने को मिला है. (फाइल फोटो)

Monkeypox Crisis in Europe and America: एक आशंका यह जताई जा रही है कि कोविड-19 से जुड़ी पाबंदियों के हटने के बाद मामले शायद ज्यादा बढ़ रहे हों. व्हिटवर्थ का कहना है कि मेरा मानना है कि यह ज्यादातर पश्चिम और मध्य अफ्रीका से आया है क्योंकि यात्रा पर प्रतिबंध हट गया है और इसलिए हमें ज्यादा मामले नजर आ रहे हैं.

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नई दिल्ली: अमेरिका,स्पेन, पुर्तगाल, ब्रिटेन में बीते दिनों मंकीपॉक्स के कुछ मामले सामने आए हैं या कुछ मामलों में मंकीपॉक्स (Monkeypox) होने की शंका जताई जा रही है. वायरस से होने वाली इस बीमारी ने एक बार फिर लोगों को चिंता में डाल दिया है क्योंकि यह संपर्क में आने से फैलने वाली बीमारी है और पहली बार ऐसा हुआ है कि यह बंदर से इंसान में पहुंची है. अभी तक इस बीमारी का असर पश्चिम और मध्य अफ्रीका में सबसे ज्यादा देखने को मिला है.

मंकीपॉक्स को लेकर वैज्ञानिकों की राय
मंकीपॉक्स एक वायरस है जिसकी वजह से बुखार और शरीर पर चकत्ते आने लगते हैं. आमतौर पर यह हल्का ही होता है. इस वायरस के दो मुख्य स्ट्रेन हैं – पहला कॉन्गो स्ट्रेन जो ज्यादा खतरनाक होता है, इसकी मृत्यु दर 10 फीसद है. दूसरा स्ट्रेन है वेस्ट अफ्रीकन स्ट्रेन जो ज्यादा घातक नहीं होता. इसकी मृत्युदर 1 फीसद है. अच्छी बात यह है कि यूके में पाए जाने वाले मामलों में वेस्ट अफ्रीकन स्ट्रेन ही पाया गया है.

लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रोपिकल मेडिसिन में अंतरराष्ट्रीय जनस्वास्थ्य के प्रोफेसर जिमी व्हिटवर्थ का कहना है कि ऐतिहासिक रूप से इसके बहुत कम मामले सामने आए हैं. इस साल से पहले महज आठ बार इसके मामले दर्ज किए गए हैं. इसलिए इसका होना काफी असामान्य है.

पुर्तगाल में इसके पांच मामले सामने आए हैं. स्पेन में 23 लोगों की जांच में इसके लक्षण पाए गए हैं. इससे पहले इनमें से किसी देश में इसका कभी कोई मामला सामने नहीं आया. इसके अलावा अमेरिका में भी एक मामला दर्ज किया गया.

कैसे फैला मंकीपॉक्स
वायरस संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा के मुताबिक मंकीपॉक्स किसी संक्रमित जंगली जानवर के जरिए हो सकता है. यह जानवर अफ्रीका के मध्य और पश्चिमी हिस्सों में पाए जाते हैं. अगर यह जानवर काट ले, या इनका खून या शरीर का दूसरा तरल पदार्थ (जैसे मूत्र, लार, पसीनी) संपर्क में आए, या इनकी त्वचा गलती से अगर मुंह में चली जाए तो वायरस का संक्रमण हो सकता है

इसके अलावा मंकीपॉक्स संक्रमित जानवर अच्छी तरह पकाए बगैर खाने से और संक्रमित जानवर के शरीर के दूसरे हिस्से मसलन त्वचा, फर को छूने से भी हो सकता है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा का कहना है कि मंकीपॉक्स का इंसानों से इंसानों में फैलना मुश्किल होता है.

पहली बार यह 1958 में बंदर में पाया गया था. तभी से इसका नाम मंकीपॉक्स रखा गया, हालांकि अब चूहों को भी इसके वाहक के तौर पर देखा जाता है. लेकिन, इस बार इसके संक्रमण ने वैज्ञानिकों को उलझा कर रख दिया है क्योंकि यूनाइटेड किंगडम में मिलने वाले सभी 9 मामलों में कभी भी कोई एक दूसरे के संपर्क में नहीं आया. केवल पहला मामला जो 6 मई को सामने आया था उसका नाइजिरिया जाने का रिकॉर्ड था. ऐसे में विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि बगैर दर्ज किए हुए मामलों से संक्रमण व्यापक तौर पर फैल सकता है. वैज्ञानिक अब इस बात का पता लगाने के लिए कि क्या वायरस किसी दूसरे वायरस से जुड़े हुए हैं जीनोमिक सीक्वेंस का इस्तेमाल कर रहे हैं.

अभी क्यों फैल रहा है मंकीपॉक्स
एक आशंका यह जताई जा रही है कि कोविड-19 से जुड़ी पाबंदियों के हटने के बाद मामले शायद ज्यादा बढ़ रहे हों. व्हिटवर्थ का कहना है कि मेरा मानना है कि यह ज्यादातर पश्चिम और मध्य अफ्रीका से आया है क्योंकि यात्रा पर प्रतिबंध हट गया है और इसलिए हमें ज्यादा मामले नजर आ रहे हैं.

मंकीपॉक्स के लक्ष्ण
मंकीपॉक्स एक तरह का वायरस का संक्रमण होता है जिसके लक्षण काफी कुछ स्मॉलपॉक्स से मिलते जुलते हैं. हालांकि यह इससे कम गंभीर होता है. इसमें एक बात है जो इसे स्मालपॉक्स से अलग करती है. मंकीपॉक्स के संक्रमण के बाद लिम्फनोड में सूजन आ जाती है. इसके अलावा, बुखार, सरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, पीठ में दर्द, लिम्फनोड में सूजन, ठंड लगना और थकावट इसके लक्षण हैं.

इसकी शुरुआत चेहेरे पर दाने होने से होती है और फिर धीरे-धीरे यह पूरे शरीर में फैलने लगता है. आगे चलकर यह दाने सूख कर पपड़ी में तब्दील हो जाते हैं और झड़ जाते हैं. सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेन्शन का कहना है कि 5 से 12 दिनों के भीतर इसके लक्षण उभरना शुरू होते हैं. केलीफोर्निया में महामारी विज्ञान के प्रोफेसर एन्ने रिमोइन ने अनुसार स्मालपॉक्स का 1980 में टीकाकरण के जरिए उन्मूलन कर दिया गया था, उसके बाद से इसके टीके को भी चरणबद्ध तरीके से हटा दिया गया. यह टीका मंकीपॉक्स को रोकने में भी कारगर था. ऐसे में जहां स्थानीय स्तर पर मंकीपॉक्स का असर मौजूद था वहां इसके मामलों में उछाल देखने को मिल रहा है.

घबराने की नहीं सचेत रहने की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि मंकीपॉक्स को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है यह कोविड की तरह व्यापक स्तर पर महामारी का रूप नहीं लेगा. लेकिन इसका प्रकोप एक गंभीर चेतावनी है और यह एक गंभीर बीमारी है इसलिए हमें ध्यान देने और सचेत रहने की ज़रूरत है.

Tags: America, Europe, World news in hindi

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