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प्रदूषण के चलते बीमार हुई मां-बेटी, स्टेट से मांगा सवा करोड़ का हर्जाना

News18Hindi
Updated: May 29, 2019, 9:03 PM IST
प्रदूषण के चलते बीमार हुई मां-बेटी, स्टेट से मांगा सवा करोड़ का हर्जाना
प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रदूषण रोक पाने के कारगर उपाय न अपनाने का आरोप लगाते हुए राज्य के खिलाफ मुकदमा ठोका गया है. अपनी तरह के पहले ऐसे केस की की सुनवाई पैरिस की एक अदालत में शुरू हो चुकी है.

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पेरिस की एक अदालत में एक ऐसे केस की सुनवाई शुरू हो चुकी है, जिसमें एक मां और बेटी ने प्रदूषण रोकने में सक्षम न हो पाने का आरोप लगाते हुए अपनी खराब सेहत के लिए राज्य को ज़िम्मेदार ठहराया है और भारी मुआवज़ा मांगा है. फ्रांस में यह अपनी तरह का पहला कानूनी मामला है.

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पेरिस के पूर्व में स्थित मॉंट्रियाल की एक प्रशासनिक अदालत में दावा दाखिल करते हुए पीड़ित मां और बेटी ने राज्य से 1 लाख 79 हज़ार डॉलर यानी करीब सवा करोड़ रुपये का मुआवज़ा मांगा है. पीड़िताओं का कहना है कि अधिकारियों ने प्रदूषण, खास तौर से वायु प्रदूषण को रोकने के लिए कारगर कदम नहीं उठाए, जिसकी वजह से दिसंबर 2016 में पेरिस में सबसे ज़्यादा प्रदूषण रहा था.

पीड़िता मां और बेटी ने कहा कि इस प्रदूषण के कारण उनकी सेहत पर काफी बुरा असर हुआ क्योंकि उस वक्त दोनों वहीं यानी उत्तरी पेरिस के उपनगर सेंट-ओएन में रह रही थीं. 1 लाख की आबादी के लिहाज़ से उस वक्त वहां भारी ट्रैफिक रहा था जिसकी वजह से दोनों पीड़िताओं को सांस लेने में समस्या पैदा हुई. 52 वर्षीय पीड़ित मां 52 का कहना है कि उसकी 16 वर्षीय बेटी इसी वजह से अस्थमा की शिकार हो गई.



पीड़िताओं के वकील ने कहा कि डॉक्टरों की सलाह पर मां बेटी ने इलाका बदला और इससे उनकी सेहत में कुछ सुधार भी हुआ. पीड़िताओं की लीगल टीम ने कोर्ट के सामने आरोप लगाया कि फ्रेंच प्रशासन ने आबादी की सुरक्षा का खयाल नहीं रखा, प्रदूषण को रोकने के कारगर कदम नहीं उठाए और प्रावधानों के बावजूद सख़्ती से पालन नहीं करवाया.

फ्रांस में ये एक ही केस नहीं है
रेस्पायर नाम के एक एनजीओ के संस्थापक सेबस्टियन व्रे के हवाले से कहा गया है कि ऐसा एक मामला नहीं है, बल्कि फ्रांस में कुल मिलाकर करीब 50 लोग राज्य के खिलाफ इस तरह का कानूनी एक्शन ले रहे हैं. व्रे ने कहा कि कोर्ट का इस मामले की सुनवाई करना ही बड़ी जीत है. व्रे ने कहा 'जब आठ साल पहले मैंने एनजीओ शुरू किया था, तो मेरी लड़ाई यही थी कि बढ़ते प्रदूषण के कारण किसी भी व्यक्ति को होने वाले नुकसान के बीच एक कानूनी कार्रवाई का लिंक होना चाहिए'.

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फ्रांस में वायु प्रदूषण की स्थिति है बेहद गंभीर
व्रे और पीड़िताओं के वकील का कहना है कि फ्रांस में ये पहला ऐसा केस है, जिसकी कोर्ट में सुनवाई हो रही है. गौरतलब है कि फ्रांस में वायु प्रदूषण के आंकड़े चौंकाने वाले हैं. जन स्वास्थ्य संबंधी फ्रेंच एजेंसी की रिपोर्ट कहती है कि इस कारण से हर साल करीब 48 हज़ार लोग बेवक्त मारे जाते हैं.

दिसंबर 2016 में, पेरिस में पिछले एक दशक की तुलना में प्रदूषण को लेकर सबसे खराब हाल था. उसी वक्त ट्रैफिक को काबू करने के लिए सम व विषम नंबर प्लेट का फॉर्मूला अपनाया गया था. यह भी उल्लेखनीय है कि प्रदूषण की समस्या इतनी बड़ी हो चुकी है कि 2020 के म्यूनिसिपल चुनाव के दौरान पेरिस के मेयर भी इस मुद्दे पर कारगर नीतियां बनाने की घोषणाएं कर रहे हैं.

ये भी बता दें कि मई 2018 में, यूरोपियन कमीशन ने फ्रांस व अन्य पांच देशों को वायु की क्वालिटी सुधारने के कदम ठीक से न उठा पाने के लिए फटकार लगाई थी. फ्रांस के मामले में, ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि 12 सालों तक चेतावनी दिए जाने के बावजूद हवा में फाइन पार्टिकल्स और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का स्तर बढ़ा हुआ पाया गया, जो ईयू द्वारा तय की गई सीमाओं से बहुत ज़्यादा था.

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First published: May 29, 2019, 9:03 PM IST
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