ट्रंप ने दिए H1B वीजा में बदलाव के संकेत, मेरिट आधारित आव्रजन के नियम बनाए जाएंगे

ट्रंप ने दिए H1B वीजा में बदलाव के संकेत, मेरिट आधारित आव्रजन के नियम बनाए जाएंगे
ट्रंप ने दिए H1B वीजा के लिए नया सिस्टम बनाने के संकेत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने अपने प्रशासन को एच1बी वीजा प्रणाली में 'सुधार' करने और मेरिट पर आधारित आव्रजन प्रणाली की ओर कदम बढ़ाने का निर्देश दिया है. आने-वाले दिनों में H1B वीजा के लिए मेरिट के आधार पर सलेक्शन की एक नई प्रणाली अस्तित्व में आ सकती है.

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वाशिंगटन. व्हाइट हाउस (White House) ने मंगलवार को बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने अपने प्रशासन को एच1बी वीजा प्रणाली में 'सुधार' करने और मेरिट पर आधारित आव्रजन प्रणाली की ओर कदम बढ़ाने का निर्देश दिया है. आने-वाले दिनों में H1B वीजा के लिए मेरिट के आधार पर सलेक्शन की एक नई प्रणाली अस्तित्व में आ सकती है. बता दें कि ट्रंप प्रशासन ने दिसंबर तक के लिए H1B वीजा जारी करने पर प्रतिबंध लगा दिए हैं जिसके बाद उद्योग जगत के लोगों ने विरोध भी दर्ज कराया है.

ट्रंप ने एच-1बी व अन्य कार्य वीजा जारी करने पर इस साल के अंत तक रोक लगाने की आधिकारिक घोषणा के कुछ ही देर बाद व्हाइट हाउस ने एक बयान में कहा, 'मेरिट पर आधारित आव्रजन प्रणाली की ओर बढ़ रहे हैं.' बयान में कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन बेहद कुशल श्रमिकों को प्राथमिकता देने और अमेरिकी लोगों की नौकरियों की सुरक्षा के लिए आव्रजन प्रणाली में सुधार करेगा. व्हाइट हाउस ने कहा कि इन सुधारों के तहत एच1बी वीजा में, सबसे अधिक वेतन वालों के आवेदन को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि ज्यादा कुशल और पेशेवर लोग देश में काम करने आएं. ट्रंप प्रशासन उन खामियों को भी दूर करेगा जिनका फायदा उठाकर नियोक्ता अमेरिकी श्रमिकों की जगह कम तनख्वाह पर विदेशी कामगारों को काम पर रख लेते हैं.

अमेरिकी नौकरियां बचेंगी, विदेशियों का भी फायदा होगा
व्हाइट हाउस ने कहा कि इन सुधारों से अमेरिकी कामगारों की नौकरियां बचेंगी. साथ ही यह भी सुनिश्चित होगा कि हमारे देश में आने वाले विदेशी श्रमिक अत्यधिक कुशल हैं और उनके आने से अमेरिका के श्रमिकों का नुकसान नहीं होगा. अमेरिका के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने कांफ्रेंस कॉल के दौरान पत्रकारों को बताया कि हर साल 85,000 लोगों को एच1बी वीजा दिया जाता है. पिछले साल इनके लिये 2,25,000 लोगों ने आवेदन किया था. एच1बी वीजा भारतीय नागरिकों के बीच काफी लोकप्रिय है. अधिकारी ने कहा, 'इस कदम से 2020 में लगभग 5,25,000 नौकरियां खाली हो जाएंगी.'
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कई लोगों ने किया विरोध
अमेरिका के शीर्ष सांसदों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से एच-1बी वीजा तथा अन्य गैर आव्रजक वीजा पर लगाई गई अस्थाई रोक को हटाने की अपील की है. भारतीय अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने कहा, 'मैं इस अहम कार्य वीजा कार्यक्रम पर रोक वाले ट्रंप के गलत तथ्यों से प्रेरित आदेश से बेहद निराश हूं. मैं यह सुनिश्चत करने के लिए उनसे इस आदेश को पलटने का अनुरोध करता हूं कि हमारी स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली और व्यापक अर्थव्यवस्था महामारी के अगले दौर से निपटने के लिए तैयार हो सके और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो सकें.'

डेमोक्रेटिक पार्टी के सचेतक डिक डरबिन, सांसद बिल पास्क्रिल और रो खन्ना ने भी ट्रंप के इस कदम को गलत ठहराया है. सांसद डोना ई शलाला ने कहा कि ट्रंप अब अमेरिकी कारोबार पर हमला कर रहे हैं और अर्थव्यवस्था की बहाली खतरे में डाल रहे हैं. उन्होंने कहा, 'अमेरिका इससे ज्यादा गरीब और कम प्रतियोगी बनेगा.' सांसदों के अलावा अनेक संगठनों ने ट्रंप के इस आदेश की निंदा की है. ‘अमेरिकी आव्रजन वकील संगठन’ (एआईएलए) ने कहा कि एच-1बी, एच-2बी, जे-1 और एल-1 वीजा पर रोक से नियोक्ताओं, परिवारों, विश्वविद्यालयों, अस्पतालों, समुदायों को नुकसान होगा और अमेरिका के आर्थिक सुधार में देरी होगी.

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एआईएलए की अध्यक्ष जेनिफर मिनेअर ने कहा, 'हम सभी अब भी एक अभूतपूर्व वैश्विक स्वास्थ्य और आर्थिक संकट में हैं और हमें अमेरिकियों को स्वस्थ रखने और अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए उपलब्ध सभी साधनों और संसाधनों का उपयोग करने की आवश्यकता है.' उन्होंने कहा, 'दुनिया भर से प्रतिभाशाली लोगों को आकर्षित करने की क्षमता ने अमेरिका को हमेशा लाभ पहुंचाया है. राष्ट्रपति की यह घोषणा इस वास्तविकता को नजरअंदाज करती है और यह इस संकट से उबरने का प्रक्रिया को और अधिक कठिन और महंगी बना देगी.' ‘लूथेरन इमिग्रेशन एंड रिफ्यूजी सर्विस’ के अध्यक्ष और सीईओ कृष ओ मारा ने कहा, 'यह आव्रजन को कम करने का एक और प्रयास हैं.'

अमेरिकी कॉरपोरेट जगत ने कहा- विदेशी निवेश को चोट पहुंचेगी
अमेरिका कॉरपोरट जगत का मानना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार के एच-1बी वीजा पर अस्थायी रोक से नवोन्मेष, निवेश और विदेशों में आर्थिक गतिविधियों को चोट पहु्ंचेगी. इतना ही नहीं यह वृद्धि की रफ्तार को कम करेगा और इससे रोजगार सृजन भी कम होगा. अमेरिका चैंबर्स ऑफ कॉमर्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी थॉमस डोनह्यू ने कहा, 'हमारे देश की आव्रजन नीति में प्रतिबंधात्मक बदलाव करने से हमारे निवेश और विदेशों में आर्थिक गतिविधियों पर दबाव पड़ेगा. यह वृद्धि को धीमा करेगा और नौकरियों के सृजन में कमी लाएगा.' उनका यह बयान ट्रंप के एच-1बी वीजा समेत अन्य विदेशी कार्य वीजा पर इस साल के अंत तक प्रतिबंध लगाने की घोषणा के बाद आया है.

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थॉमस ने कहा, 'आज की घोषणा (ट्रंप की प्रतिबंध घोषणा) हमारी वैध आव्रजन प्रणाली को गंभीर संकट में डालने की कोशिश है. इंजीनियर, कार्यकारी, चिकित्सक, नर्स, सूचना प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ और अन्य कामकाजी लोगों के लिए ‘देश में आपका स्वागत नहीं’ का बोर्ड लगा देने से हमारी कोई मदद नहीं होने वाली, बल्कि यह हमें और पीछे धकेल देगा.' डोनह्यू ने कहा, 'हम अमेरिका में और निवेश-अधिक वृद्धि के लिए लड़ रहे हैं क्योंकि इसका मतलब है ज्यादा नौकरियां. मौजूदा समय में इस बात की और ज्यादा तत्कालिक जरूरत है. हम लंबे समय से तार्किक आव्रजन प्रणाली की बात करते रहे हैं जो हमारी आर्थिक जरूरतों और हमारे देश के मूल्यों से मेल खाती हो.' उन्होंने कहा कि यह घोषणा दोनों में से किसी भी हित की पूर्ति नहीं करती. राष्ट्रपति के इस तरह की घोषणा से पहले चैंबर समेत कई अन्य कारोबारी संगठन अमेरिका- भारत व्यापार परिषद, नेशनल अलायंस ऑफ मैन्युफैक्चरर्स और सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग परिषद ने ट्रंप को पत्र लिखकर इस तरह के कदम उठाने से सावधान किया था.
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