PAK में कट्टरवाद: इस्लाम पर बहस के बाद एक प्रोफ़ेसर ने दूसरे को मारी गोली

इस्लाम पर बहस के बाद प्रोफ़ेसर ने साथी को ही मारी गोली
इस्लाम पर बहस के बाद प्रोफ़ेसर ने साथी को ही मारी गोली

Muslim professor shoots another fellow academic: पाकिस्तान में एक प्रोफ़ेसर ने अपने साथ प्रोफ़ेसर को सिर्फ इसलिए गोली मार दी क्योंकि वह इस्लाम को लेकर उसके विचारों से सहमत नहीं था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 6, 2020, 11:10 AM IST
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इस्लामाबाद. एक पाकिस्तानी (Pakistan) मुस्लिम प्रोफेसर की अन्य प्रोफेसर ने गोली मारकर हत्या कर दी. मृतक प्रोफ़ेसर उत्तर-पश्चिमी पेशावर से अहमदी समुदाय से आता है. पुलिस के अनुसार दोनों के बीच धर्म को लेकर एक जोरदार बहस हुई थी उसके अगले दिन यह हत्या हुई है. पुलिस अफसर सिराज अहमद के अनुसार हमलावर की पहचान फारुख माद के रूप में हुई है और प्रोफेसर नईम खट्टक की कार पर फायर करने वाला कोई दूसरा व्यक्ति था, उस समय नईम कार ड्राइव करके अपने कॉलेज जा रहे थे.

प्रोफेसर नईम अहमदिया अल्पसंख्यक समुदाय से आते थे. इस समुदाय को मिर्जा गुलाम अहमद ने 19वीं सदी में उपमहाद्वीप में बसाया था. ये प्रोफेट मोहम्मद के फ़ॉलोवर कहे जाते हैं. पुलिस ने कहा कि खट्टक की हत्या सही प्रोफेसर और अन्य व्यक्ति ने धार्मिक मामले पर बहस के एक दिन बाद कर दी.

अहमदिया समुदाय से थे मारे गए प्रोफेसर
मृतक प्रोफेसर और मारने वाला दोनों अलग-अलग कॉलेजों में प्रोफेसर थे. पाकिस्तानी अहमदिया समुदाय के प्रवक्ता सलीम उद्दीन ने कहा कि खट्टक ने जूलोजी में डॉक्टरेट की थी और आस्था की वजह से उनकी हत्या कर दी गई. उन्होंने खट्टक को धमकियां मिलने की बात कहते हुए अपने समुदाय को सुरक्षा देने की मांग भी की. उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए अहमदिया की सुरक्षा करने में फेल बताया. राज्य के संस्थानों से उन्होंने सुरक्षा देने की मांग की.



पाकिस्तानी संसद ने अहमदिया समुदाय को 1974 में गैर मुस्लिम घोषित किया था. तब से उन्हें इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा निशाने पर लिया जाता रहा है और घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मनाव अधिकार ग्रुप्स ने इसकी कई बार आलोचना भी की है. सुन्नी आतंकियों द्वारा अहमदिया समुदाय के पूजा स्थलों को तोड़ा जाता रहा है. पेशावर खैबरपखतुनख्वा राज्य की राजधानी है और यह क्षेत्र अफगानिस्तान से लगता है. इसमें सुन्नी मुस्लिमों की संख्या बहुतायत में है. 2018 से हिन्दू क्रिस्चियन और अल्पसंख्यकों पर वहां हमले काफी बढ़ गए हैं. इमरान खान सरकार आने के बाद ऐसा ज्यादा हुआ है, हालांकि इमरान खान इनकी सुरक्षा की बात हमेशा करते रहते हैं.
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