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म्‍यांमार में सैन्‍य तख्‍तापलट ने बढ़ाई भारत के लिए मुश्किल, चीन बन सकता है परेशानी

म्‍यांमार में हुआ है सैन्‍य तख्‍तापलट. (Pic- AP)
म्‍यांमार में हुआ है सैन्‍य तख्‍तापलट. (Pic- AP)

भारत (India) ने म्‍यांमार (Myanmar) में हुए सैन्‍य तख्‍तापलट के बाद भी वहां विकास कार्य जारी रखने का फैसला किया है. भारत वहां रखाइन प्रांत में रोहिंग्‍या मुसलमानों के लिए घर और सितवे बंदरगाह बना रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 4, 2021, 6:09 PM IST
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नई दिल्‍ली. पड़ोसी राज्‍य म्‍यांमार (Myanmar) में हुए तख्‍तापलट ने भारत के लिए दुविधा की स्थिति उत्‍पन्‍न कर दी है. इस तख्‍तापलट से भारत की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं. ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्‍योंकि एक ओर तो भारत (India Myanmar) को लोकतंत्र का समर्थन करना है, वहीं दूसरी ओर अपने हितों की रक्षा भी करनी है. अब म्‍यांमार में सेना की ओर से किए गए तख्‍तापलट के बाद संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में पश्चिमी देशों के कठोर कदम उठाने की चर्चा के दौरान भारत ने खुद को पीछे कर लिया. इस चर्चा के बाद मीडिया में कोई बयान भी नहीं जारी किया गया है.

भारत ने म्‍यांमार में हुए सैन्‍य तख्‍तापलट के बाद भी वहां विकास कार्य जारी रखने का फैसला किया है. भारत वहां रखाइन प्रांत में रोहिंग्‍या मुसलमानों के लिए घर और सितवे बंदरगाह बना रहा है. वहीं भारत के यह जरूरी है कि उसके म्‍यांमार की सैन्‍य सरकार के साथ संबंध ठीक रहें. भारत कई कारणों से म्‍यांमार की सैन्‍य सरकार से संबंध जारी रखना चाहता है. इनमें से एक यह है कि कई उग्रवादी संगठन म्‍यांमार को अपने लिए स्‍वर्ग की तरह से मानते हैं. ये संगठन भारत म्‍यांमार की सीमा पर भी गतिविधि करते हैं. ऐसे में भारत को इनसे निपटने के लिए म्‍यांमार की सेना के सहयोग की आवश्‍यकता होगी.





वहीं चीन म्‍यांमार में पूरी तरह से सक्रिय अराकान आर्मी को अपना समर्थन देता है. यही अराकान आर्मी भारत के खिलाफ है. यह भारत के कलादान प्रोजेक्‍ट पर हमले करती है. भारत को इससे निपटने के लिए भी वहां म्‍यांमार की सेना की आवश्‍यकता रहेगी. इसके साथ ही चीन म्‍यांमार की वा आर्मी को भी सहयोग करता है. ऐसे में भारत चाहता है कि म्‍यांमार वा आर्मी पर कड़ी कार्रवाई करे. वा आर्मी भारत और म्‍यांमार में सक्रिय उग्रवादी संगठनों को हथियार उपलब्‍ध कराती है. साथ ही म्‍यांमार के सुरक्षा बलों पर हमले भी करती है.

म्‍यांमार में हुए सैन्‍य तख्‍तापलट को लेकर चीन और रूस ने ठंडी प्रतिक्रिया दी है. आस‍ियान देशों ने आपस में बातचीत करके सामान्‍य स्थिति की बहाली का आह्वान किया है. अमेरिका ने म्‍यांमार की इस घटना को सैन्‍य तख्‍तापलट करार दिया है. ऐसे में यह आशंका बढ़ गई है कि अमेरिका म्‍यांमार पर ज्‍यादा प्रतिबंध लगा सकता है. लेकिन अगर ऐसा हुआ तो म्‍यांमार अमेरिका के बजाय फिर चीन का सहयोग ले सकता है. ऐसा भी माना म्‍यांमार ने 2010-11 में लोकतंत्र इसलिए चुना था क्‍योंकि वो चाहता था कि चीन पर से उसकी निर्भरता कम हो जाए.
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