खुशखबरी! अमेरिकी दवा कंपनी ने भारत के लिए बनाई 80% 'सस्ती' रेमडेसिविर, जल्द मिलेगी

खुशखबरी! अमेरिकी दवा कंपनी ने भारत के लिए बनाई 80% 'सस्ती' रेमडेसिविर, जल्द मिलेगी
रेमडेसिविर भारत में होगा लॉन्च

मायलिन एनवी (Mylan Pharma) ने घोषणा की है कि उसने एक अन्य दवा कंपनी गिलिएड साइंसेज़ की एंटी-वायरल दवा रेमडेसिविर (Remdesivir) का जेनेरिक वर्ज़न भारतीय बाजार के लिए तैयार कर लिया है.

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वाशिंगटन. अमेरिकी दवा कंपनी मायलिन एनवी (Mylan Pharma) ने घोषणा की है कि उसने एक अन्य दवा कंपनी गिलिएड साइंसेज़ की एंटी-वायरल दवा रेमडेसिविर (Remdesivir) का जेनेरिक वर्ज़न भारतीय बाजार के लिए तैयार कर लिया है. मायलिन एनवी के मुताबिक भारत में इस दवा की कीमत सिर्फ 4800 रुपये होगी. कोविड-19 के रोगियों पर परीक्षण के बाद वैज्ञानिकों ने पाया है कि एंटी-वायरल दवा रेमडेसिविर कोरोना मरीजों को जल्दी ठीक करने में मदद करती है.

पिछले महीने ही, दो भारतीय दवा निर्माता कंपनियों- सिप्ला और हेटेरो लैब्स ने भी रेमडेसिविर का जेनेरिक वर्ज़न भारत में लॉन्च किया था. सिप्ला ने अपनी दवा सिपरेमी की क़ीमत पांच हज़ार से कुछ कम तय की जबकि हेटेरो लैब्स ने अपनी दवा कोविफ़ोर की क़ीमत 5,400 रुपये तय की है. बता दें कि मायलिन एनवी ने भारतीय बाज़ार के लिए रेमडेसिविर की जो क़ीमत तय की है, वो अमीर देशों की तुलना में क़रीब 80 प्रतिशत कम है. कैलिफ़ोर्निया स्थित गिलिएड साइंसेज़ ने कई जेनेरिक दवा निर्माताओं के साथ क़रार किया है ताकि रेमडेसिविर को क़रीब 127 विकासशील देशों में मुहैया कराया जा सके.

विकसित देशों में मिलेगी महंगी
गिलिएड साइंसेज़ ने बताया था कि विकसित देशों के लिए इस दवा को महंगा रखा गया है और अगले तीन महीने तक लगभग सारी रेमडेसिविर अमेरिका में ही बेचने का क़रार हुआ है. मायलिन एनवी के अनुसार, यह क़ीमत 100 मिलीग्राम वायल (शीशी) की है. हालांकि अभी स्पष्ट नहीं है कि एक मरीज़ के इलाज में कितनी दवा की शीशी खर्च होती हैं. गिलिएड साइंसेज़ के अनुसार, एक मरीज़ को अगर पांच दिन का कोर्स दिया जाता है तो उसके लिए कम से कम रेमडेसिविर की छह शीशियां लगती हैं.



 

मायलिन एनवी ने कहा है कि वो जेनेरिक रेमडेसिविर का निर्माण भारतीय प्लांट में ही करने वाले हैं और इस कोशिश में भी लगे हैं कि कम आय वाले क़रीब 127 देशों के लिए भी लाइसेंस लेकर दवा सप्लाई कर सकें. ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया ने मायलिन की रेमडेसिविर को डेसरेम (DesRem) के नाम से मंज़ूर किया है. भारत इस समय दुनिया का तीसरा ऐसा देश है जहां संक्रमण के सबसे ज़्यादा मामले दर्ज किये गए हैं.
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