मैं मक्खन पर नहीं, पत्थर पर लकीर खींचता हूं: मोदी

मोदी ने अपने भाषण में कहा कि कोरिया में आते ही पहले मैंने आपके दर्शन करना तय किया और सबसे पहले आपके दर्शन करने के बाद ही और कार्यक्रम तय किए।
मोदी ने अपने भाषण में कहा कि कोरिया में आते ही पहले मैंने आपके दर्शन करना तय किया और सबसे पहले आपके दर्शन करने के बाद ही और कार्यक्रम तय किए।

मोदी ने अपने भाषण में कहा कि कोरिया में आते ही पहले मैंने आपके दर्शन करना तय किया और सबसे पहले आपके दर्शन करने के बाद ही और कार्यक्रम तय किए।

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सियोल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दो दिन की यात्रा पर दक्षिण कोरिया पहुंचे। मोदी सबसे पहले सियोल में शहीद स्मारक पहुंचे और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद मोदी भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित करने एक कार्यक्रम में पहुंचे।

मोदी ने अपने भाषण में कहा कि कोरिया में आते ही पहले मैंने आपके दर्शन करना तय किया और सबसे पहले आपके दर्शन करने के बाद ही और कार्यक्रम तय किए, क्योंकि रवीन्द्रनाथ टैगोर ने कोरिया को लैंफ ऑफ ईस्ट कहा था। ये पूरब का प्रकाशमान है। जो रवींद्रनाथ टैगोर को दिखाई देता था वो पूरा करके दिखाया कोरिया ने।

मोदी ने कहा कि मेरी सरकार की नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है एक्ट ईस्ट पॉलिसी। पहले था लुक ईस्ट पॉलिसी। हम देख रहे हैं कि अड़ोस-पड़ोस के सारे देश किस तेज गति से आगे बढ़ रहे हैं। भारत के सदन में भी 21वीं सदी के प्रारंभ में वहीं बातें कही जाती थी कि अब हिंदुस्तान का सूर्योदय हो चुका है। अब हिंदुस्तान विश्व के अंदर बहुत बड़ी भूमिका निभाएगा।



अर्थशास्त्रियों ने एक नया शब्द दिया था ब्रिक्स। पिछले 10-15 साल के भीतर दुनिया के स्वर बदल गए। दुनिया को लगने लगा है कि भारत के बिना ब्रिक्स संभव नहीं। पिछले दो तीन महीनों में सभी रेटिंग एजिसियों ने कहा है कि भारत दुनिया की सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली इकोनमी है। जब पहले सुनते थे कि 21वीं सदी एशिया की सदी है, लेकिन पहले लगता था कि इस एशिया की सदी में हम भी कहीं होंगे।
मोदी ने कहा कि आप लोग भी काम के सिलसिले में आए होंगे। यहां छोटा सा परिवार है। लेकिन जो मैं देख रहा हूं उससे मुझे लगता है कि टेक्नोलॉजी का रिवोल्यूशन कोरिया में हुआ है वो हिंदुस्तान में भी हो। वो आपके बिना कैसे होगा। आपका ज्ञान जितना भारत के साथ जुड़ेगा, उतना भारत को आगे बढ़ने में सुविधा मिलेगी। भारत पर जितना अधिकार मेरा है उतना आपका भी है।

भारत ने अपनी विकास यात्रा का रास्ता चुन लिया है। यहां आकर आपने देखा होगा कि समस्या सबको होती है। लेकिन अगर उस देश ने तय कर लिया कि आगे बढ़ना है तो समस्याओं का समाधान भी हुआ और विकास के रास्ते पर भी चल पड़ा। चीन आज इतना आगे बढ़ा क्योंकि 10 सालों में चीन की ग्रोथ 10 फीसदी रही। कोरिया भी 30-35 सालों में बदला है।

गिनाईं सरकार की उपलब्धियां

मैं उन लोगों में से नहीं हूं जो मक्खन पर लकीर करते हैं, मैं पत्थर पर लकीर करना जानता हूं। और इसलिए रास्ता कठिन है। तत्कालीन राजनैतिक लाभ कोसों दूर है फिर भी मैंने रास्ता चुना है। एक ही जड़ी बूटी है, चल पड़ा हूं इसका नाम है विकास।

और उसी का नतीजा है कि हम आज दुनिया की सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाले देश में हैं। मुझे सामान्य आदमी की जिंदगी बदलनी है। जैसे मैं पीछे पड़ा हूं कि हर घर में टायलेट हो। 21वीं सदी में हमारी मां बहनों को बाहर जाना पड़ता है शौच के लिए, क्या ये सही है। जो काम सदियों से नहीं हुआ, वो कठिन है लेकिन करना चाहिए है या नहीं।

बस इसी मंत्र को लेकर चला हूं। आज का नौजवान चाहता है परिवर्तन और हम उसी दिशा में लगे हैं। कुछ चीजों में तो हमारी आदत खराब हो गई है। उसमें मैं किसी सरकारों को दोष नहीं देख रहा हूं। अगर लेट हो रहे हैं तो कहते हैं भारतीय टाइम के मुताबिक। जब मैं पीएम बना तो खबरें ये नहीं आती थी कि मोदी क्या कर रहा है, लेकिन ये कि दफ्तर ठीक टाइम से खुल रहे हैं।
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