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NASA खोलेगा उस रहस्‍मयी जगह के राज, जहां होता है हवा और अंतरिक्ष का मिलन

News18Hindi
Updated: October 11, 2019, 12:39 PM IST
NASA खोलेगा उस रहस्‍मयी जगह के राज, जहां होता है हवा और अंतरिक्ष का मिलन
सेटेलाइट आइकॉन वायुमंडल की सबसे ऊपरी परत आयनमंडल में काम करेगा.

नासा (NASA) ने रहस्‍यमयी क्षेत्र की पड़ताल के लिए एक सेटेलाइट 'आईकॉन' (Icon) लांच किया है. अंतरिक्ष एजेंसी इस प्रोजेक्‍ट को दो साल की देरी से शुरू कर रही है. नासा के मुताबिक, इस क्षेत्र में सिर्फ सूर्य (Sun) की ऊर्जा के प्रभाव से ही काफी हलचल होती रहती है. वहीं तूफान (Hurricanes), टॉरनेडो (Tornadoes) और अन्‍य मौसमी बदलावों (Extreme Weather Conditions) से पैदा होने वाली ऊर्जा (Energy) भी इस क्षेत्र में होनी वाली हलचल पर असर डालती है.

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  • Last Updated: October 11, 2019, 12:39 PM IST
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केप कानावेरल. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) उस रहस्‍यमयी जगह के राज खोलेगी, जहां अंतरिक्ष और हवा मिलते हैं. इसके लिए एजेंसी ने बृहस्‍पतिवार रात एक सेटेलाइट लांच किया है. आयनोस्फेरिक कनेक्शन एक्सप्लोरर (ICON) नाम के इस सेटेलाइट (Satellite) को दो साल की देरी से लांच किया गया है. इस सेटेलाइट को फ्लोरिडा तट (Florida coast) से दूर अटलांटिक महासागर (Atlantic) के ऊपर से उड़ान भरते हुए एक विमान से गिराया गया. विमान से गिराए जाने के पांच सेकेंड बाद सेटेलाइट में लगा पेगासस रॉकेट (Pegasus rocket) इसे निर्धारित पथ पर लेकर गया.

Ionosphere में काम करेगा सेटेलाइट Icon
यह सेटेलाइट वायुमंडल (Atmosphere) की सबसे ऊपरी परत आयनमंडल (Ionosphere) में काम करेगा. पृथ्वी से लगभग 80 किमी से ऊपर का वायुमंडल आयनमंडल कहलाता है. आयतन में आयनमंडल अपनी निचली हवा से कई गुना अधिक है, लेकिन इस क्षेत्र की हवा की कुल मात्रा वायुमंडल की हवा के 200वें भाग से भी कम है यानी आयनमंडल में हवा का दबाव लगभग शून्‍य होता है. आयनमंडल की उपयोगिता रेडियो तरंगों के प्रसारण में सबसे अधिक है. सूर्य की पराबैगनी किरणों और अन्य अधिक ऊर्जा वाली किरणों से आयनमंडल की गैसें आयनित हो जाती हैं. शार्ट वेव्स को हजारों किलोमीटर तक आयनमंडल के जरिये ही पहुंचाया जाता है.

रहस्‍यमयी क्षेत्र के अध्‍ययन से हमें होगा ये फायदा

यह सेटेलाइट हवा-अंतरिक्ष के मिलन वाले रहस्‍यमयी और गतिशील क्षेत्र का पता लगाएगा. साथ ही इससे पृथ्‍वी के मौसम (Weather) और अंतरिक्ष (Space) के बीच संबंध का भी पता लगाया जाएगा. इस क्षेत्र के बारे में वैज्ञानिकों को मिलने वाली ज्‍यादा से ज्‍यादा जानकारी के आधार पर पृथ्‍वी की कक्षा में अंतरिक्ष यात्री (Astronauts) और यान (Spacecraft) दोनों को ज्‍यादा सुरक्षा दी जा सकेगी. नासा के इस मिशन को पृथ्‍वी के ऊपरी वातावरण का अध्‍ययन करने के लिए तैयार किया गया है. यह सेटेलाइट पता लगाएगा कि आयनोस्‍फेयर में दोनों का आपसी तालमेल कैसा है.

सामान्‍य रेफ्रिजरेटर के आकार का है यह सेटेलाइट
नासा ने आइकॉन स्‍पेसक्राफ्ट को बृहस्‍पतिवार रात 10 बजे लांच किया. नासा के हेलियोफिजिक्‍स डिविजन डायरेक्‍टर निकोल फॉक्‍स ने बताया कि इस सेटेलाइट का आकार एक सामान्‍य रेफ्रिजरेटर के बराबर है. उन्‍होंने कहा कि हवा और अंतरिक्ष के मिलने की जगह हमारे वायुमंडल का सबसे ऊपरी क्षेत्र है. इस क्षेत्र में सिर्फ सूर्य (Sun) की ऊर्जा से ही काफी हलचल होती रहती है. वहीं तूफान (Hurricanes), टॉरनेडो (Tornadoes) और अन्‍य मौसमी बदलावों (Extreme Weather Conditions) से पैदा होने वाली ऊर्जा (Energy) भी इस क्षेत्र में होनी वाली हलचल पर असर डालती है.

जहां होगी हलचल, वहां जाकर पड़ताल करेगा Icon
बर्केले में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया (University of California) के प्रमुख वैज्ञानिक थॉमस इमेल (Thomas Immel) पिछले दो साल से नासा के इस मिशन पर नजर बनाए हुए हैं. उन्‍होंने कहा कि आइकॉन इस क्षेत्र में हलचल वाली हर जगह जाएगा. नासा ने पिछले साल भी एक सेटेलाइट 'गोल्‍ड' (Gold) को इसी काम के लिए लांच किया था. लेकिन, ये सेटेलाइट ज्‍यादा ऊंचाई से इस रहस्‍यमयी क्षेत्र का अध्‍ययन कर रहा है. आइकॉन को दो साल पहले ही लांच किया जाना था, लेकिन इसमें लगे रॉकेट पेगासस में तकनीकी खराबी आने के कारण मिशन को टाल दिया गया था.

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First published: October 11, 2019, 12:39 PM IST
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