ग्रेटा थनबर्ग ने NASA के मंगल मिशन पर साधा निशाना, कहा- अमीर देश कर रहे पैसा बर्बाद

ग्रेटा थनबर्ग (फाइल फोटो)

स्‍वीडन (Sweden) की पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग (Greta Thunberg) ने नासा के मंगल म‍िशन पर न‍िशाना साधा है. उन्‍होंने कहा क‍ि धरती जलवायु परिवर्तन से जूझ रही है और दुनिया के अमीर देश दूसरे ग्रह की यात्रा पर पैसा बर्बाद कर रहे हैं.

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    स्‍टॉकहोम. भारत में किसानों के आंदोलन (Farmers Protest) के टूल किट को शेयर करके चर्चा में आई स्‍वीडन (Sweden) की पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग अब नासा के मंगल मिशन पर भड़क उठी हैं. ग्रेटा ने तंज कसने वाले मंगल ग्रह के टूरिज्‍म का विज्ञापन जारी किया है. उन्‍होंने कहा कि हमारी धरती जलवायु परिवर्तन से जूझ रही है और सरकारें तथा अंतरिक्ष एजेंसियां अरबों रुपये दूसरे ग्रह की यात्रा पर खर्च कर रही हैं. ग्रेटा ने मंगल ग्रह को लेकर एक तंज कसते हुए वीडियो शेयर किया है जिसका उद्देश्‍य केवल एक प्रतिशत के लिए है. उन्‍होंने सलाह दी कि इस ग्रुप को धरती को छोड़ देना चाहिए और 99 प्रतिशत लोगों को यहां पर छोड़ देना चाहिए ताकि वे जलवायु परिवर्तन की समस्‍या का समाधान कर सकें. वीडियो में तंज कसते हुए दिखाया गया है कि मंगल ग्रह एक ऐसी जगह है जिसकी जमीन को किसी ने टच नहीं किया है और वह लोगों का इंतजार कर रही है ताकि बिना जलवायु परिवर्तन की चिंता किए नए जीवन की शुरुआत की जा सके.बता दें

    कि नासा का परसवेरेंस रॉवर (Perseverance Rover) मंगल की सतह पर उतरने वाला है. इस रोवर पर नासा ने दो अरब 70 करोड़ डॉलर खर्च किया है. NASA ने मंगल पर अपना परसवेरेंस मिशन भेजा है जो ऐसी जानकारियां इकट्ठा करेगा और टेक्नॉलजी को टेस्ट करेगा जिनसे आने वाले समय में मंगल पर इंसानों को भेजने का तरीका खोजा जा सके. इसमें सबसे अहम होगा मंगल के वायुमंडल में ऑक्सिजन बनाने का तरीका खोजना. इस रोवर में MOXIE नाम की डिवाइस लगाई गई है जो वहां ऑक्सिजन पैदा करने की कोशिश करेगी.

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    ग्रेटा ने भारत में चल रहे किसान आंदोलन को समर्थन देते हुए उन्होंने एक 'टूलकिट' शेयर किया था. इस टूलकिट को (Toolkit Case) को लेकर दिल्ली पुलिस ने केस दर्ज किया. किसानों के प्रदर्शन से जुड़ी ‘टूलकिट’ को एडिट और शेयर करने के आरोप में क्लाइमेट एक्टिविस्ट दिशा रवि को बेंगलुरू से गिरफ्तार कर चुकी है. टूलकिट एक तरह का डॉक्यूमेंट होता है जिसमें किसी मुद्दे की जानकारी देने के लिए और उससे जुड़े कदम उठाने के लिए इसमें विस्तृत सुझाव होते हैं. आमतौर पर किसी बड़े अभियान या आंदोलन के दौरान उसमें हिस्सा लेने वाले वॉलंटिअर्स को इसमें दिशा-निर्देश दिए जाते हैं. इसका उद्देश्य खास वर्ग या टार्गेट ऑडियंस को जमीन पर काम करने के लिए गाइडेंस देना होता है.

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