अब ओली के मंत्री के विवादित बोल- चीन नहीं सिर्फ भारत के साथ है सीमा विवाद

अब ओली के मंत्री के विवादित बोल- चीन नहीं सिर्फ भारत के साथ है सीमा विवाद
नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली (फाइल फोटो)

India-Nepal Border Dispute: नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ग्यावली (Pradeep Gyawali) ने कहा है कि चीन (China) के साथ उनका कोई सीमा विवाद नहीं है, ये सिर्फ भारत के साथ है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 4, 2020, 7:54 AM IST
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काठमांडू. राजनीतिक संकट से जूझ रहे नेपाल (Nepal) की केपी शर्मा ओली (KP Sharma oli) सरकार के मंत्रियों का भी चीन प्रेम खुलकर सामने आने लगा है. अब नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ग्यावली (Pradeep Gyawali) ने कहा है कि चीन (China) के साथ उनका कोई सीमा विवाद नहीं है, ये सिर्फ भारत के साथ है. हालांकि नेपाल ने चीन, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के साथ मिलकर साउथ एशिया में एक नई ताकत स्थापित करने जैसी किसी योजना से साफ़ इनकार कर दिया.

बता दें कि नेपाल के अखबार अन्नपूर्णा पोस्ट ने बीते दिनों दावा किया था कि चीन ने नेपाल के रुई गुवान गांव पर गैरकानूनी तरीके से कब्जा जमाया हुआ है. चीन इस गांव को तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (टीएआर) का हिस्सा बताता है जबकि ये हमेशा से नेपाल का हिस्सा रहा है. नेपाल सरकार के आधिकारिक नक्शे में भी यह गांव नेपाल की सीमा के भीतर ही दिखाया गया है, लेकिन यहां से चीन ने नेपाल प्रशासन को भगा दिया है और इसे अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया है. हालांकि ग्यावली ने कहा है कि चीन के साथ सीमा को लेकर कोई विवाद नहीं है. सिर्फ '0 नंबर बाउंड्री मार्कर' को फाइनल किया जाना है क्योंकि यह चीन, नेपाल और भारत के बीच ट्राई-जंक्शन से शुरू होता है और भारत के साथ सीमा को लेकर विवाद है. उन्होंने कहा है कि जब इसका समाधान हो जाएगा, तब ट्राई-जंक्शन फाइनल होगा.





चीन हमारा भरोसेमंद साथी है
ग्यावली ने कहा है कि चीन के साथ कोई सीमा विवाद नहीं है, वह हमारा भरोसेमंद साथी है. 1960 में हुए सीमांकन के मुताबिक नेपाल के पिलर संख्या 1 से शुरू होते हैं. उन्होंने बताया है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ सीमा प्रबंधन समझौता साइन किया गया है. ग्यावली ने कहा है, 'हम कनेक्टिविटी लिंक के जरिए सबसे बड़े मार्केट्स से जुड़ना चाहते हैं.' गलवान वैली संघर्ष की तरफ इशारा करते हुए ग्यावली ने कहा है, 'हम क्षेत्रीय स्थिरता के समर्थन में हैं और पड़ोसियों के बीच बढ़ती समझ देखेंगे तो हम प्रतिबद्धता दिखाएंगे. वहीं, तनाव होने पर हमें चिंता होती है लेकिन हमारे चीन और भारत से अलग-अलग संबंध हैं. हम दोनों में तुलना नहीं करते हैं. हमारी स्वतंत्र राय है कि हम अपने पड़ोसियों के साथ अच्छे रिश्ते बनाएं.'

ओली-प्रचंड की बातचीत फिर बेनतीजा
नेपाल के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली और सत्तारूढ़ पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ ने अपने मतभेदों को दूर करने के लिए सोमवार को दो घंटे तक अनौपचारिक बातचीत की, लेकिन यह बेनतीजा रही. दोनों नेताओं ने रविवार को भी तीन घंटे तक मैराथन बैठक की थी, लेकिन इसमें भी सत्ता साझा करने संबंधी समझौते पर कोई सहमति नहीं बनी. प्रधानमंत्री के करीबी एक नेता ने कहा, 'रविवार को हुई बातचीत सकारात्मक थी और सोमवार को भी उसी दिशा में बात हुई.'





सोमवार को हुई बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ओली के साथ उनके विश्वासपात्र सुभाष नेबांग भी थे जो पार्टी के दोनों धड़ों के बीच मतभेदों के समाधान के लिए मध्यस्थ के रूप में काम कर रहे हैं. वहीं, प्रचंड के साथ वरिष्ठ नेता एवं पूर्व प्रधानमंत्री झलानाथ खनाल थे. सूत्रों ने बताया कि क्योंकि स्थायी समिति की बैठक अनिश्चिमकाल के लिए टल गई है, इसलिए दोनों नेता पार्टी की 45 सदस्यीय इकाई की बैठक की नयी तारीख तय करने का प्रयास कर रहे हैं. प्रधानमंत्री ओली ने स्थायी समिति की महत्वपूर्ण बैठक को 28 जुलाई को नौवीं बार टाल दिया था.

स्थाई समिति की बैठक होना बाकी
माई रिपब्लिका अखबार ने खबर दी कि ओली जहां मतभेदों के समाधान के लिए सचिवालय की बैठक बुलाने पर अड़ गए, वहीं प्रचंड ने कहा कि सचिवालय की बैठक बुलाना अनुचित होगा क्योंकि स्थायी समिति की बैठक 28 जुलाई को स्थगित कर दी गई जिसे अभी पूरा होना है. अखबार ने कहा, 'एनसीपी के दोनों शीर्ष नेताओं के बीच बैठक बेनतीजा रही क्योंकि दोनों पक्ष अपनी-अपनी मांगों पर अड़ गए.' इसने कहा, 'क्योंकि दोनों नेताओं के बीच इस बात पर मतभेद थे कि पहले सचिवालय की बैठक बुलाई जाए या स्थायी समिति की, इसलिए बैठक एक बार फिर बेनतीजा रही और मंगलवार को फिर बैठक करने पर सहमति बनी.'



ओली और प्रचंड के बीच हाल के सप्ताहों में मतभेद दूर करने के लिए कम से कम 10 बैठक हो चुकी हैं, लेकिन सभी बेनतीजा रहीं क्योंकि ओली ने प्रधानमंत्री पद और एनसीपी के सह-अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया. नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के शीर्ष नेताओं के बीच पिछले कुछ सप्ताह से आंतरिक कलह काफी बढ़ गई है. प्रचंड ने यह कहते हुए ओली के इस्तीफे की मांग की है कि उनकी भारत विरोधी टिप्पणियां न तो 'राजनीतिक रूप से सही हैं और न ही कूटनीतिक रूप से उचित.' कई शीर्ष नेता ओली की ‘निरंकुश’ शैली के खिलाफ हैं.
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