क्या आपस में सुलझेंगे मतभेद ? सोमवार को होगी ओली-प्रचंड की अहम बैठक

क्या आपस में सुलझेंगे मतभेद ? सोमवार को होगी ओली-प्रचंड की अहम बैठक
नेपाल के प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली और सत्तारूढ़ दल के कार्यकारी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल प्रचंड (फाइल फोटो)

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (NCP) के दो शीर्ष नेताओं के बीच यह बैठक प्रधानमंत्री ओली द्वारा 28 जुलाई को होने वाली पार्टी की स्थाई समिति की बैठक स्थगित किए जाने के छह दिन बाद हुई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 2, 2020, 10:28 PM IST
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काठमांडू. सत्ता की लड़ाई के कारण परेशानियों से घिरे नेपाल (Nepal) के प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली (PM KP Sharma Oli) और सत्तारूढ़ दल के कार्यकारी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल प्रचंड आपसी मतभेदों को सुलझाने के लिए सोमवार को फिर से मिलने पर राजी हो गए हैं. मीडिया में आयी खबरों के अनुसार, रविवार को करीब तीन घंटे चली बैठक में दोनों के आपसी मतभेद सुलझ नहीं पाये. माई रिपब्लिका की खबर के अनुसार, प्रधानमंत्री के प्रेस सलाहकार सूर्या थापा ने कहा, 'दोनों नेताओं के बीच सकारात्मक बातचीत हुई. इसे लेकर चर्चा हुई कि पार्टी के सचिवालय, स्थाई समिति या केन्द्रीय समिति की बैठक बुलायी जाए. बैठक में पार्टी की आमसभा बुलाने को लेकर भी चर्चा हुई.' थापा ने कहा, 'दोनों नेताओं में अभी सहमति बननी बाकी है.'

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के दो शीर्ष नेताओं के बीच यह बैठक प्रधानमंत्री ओली द्वारा 28 जुलाई को होने वाली पार्टी की स्थाई समिति की बैठक स्थगित किए जाने के छह दिन बाद हुई है.
अखबार के अनुसार, स्थाई समिति की बैठक को लेकर अनिश्चितता है क्योंकि दोनों शीर्ष नेताओं के बीच मतभेद अभी भी जारी है. रविवार को हुई बैठक में प्रधानमंत्री ओली के साथ उनके करीबी सुभाष नेमबांग भी आए थे. गौरतलब है कि नेमबांग ओली और प्रचंड के बीच मतभेदों को सुलझाने में मध्यस्थ का काम कर रहे हैं. वहीं प्रचंड के साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता झाला नाथ खनल भी थे.

ओली की गलतियां
वहीं दूसरी तरफ, नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली पर इस्तीफे के बढ़ते दबाव के बीच अब उन पर उन्ही की पार्टी ने बयान दिया था. दरअसल, नेपाल में सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी (NCP) के एक वरिष्ठ नेता नारायणकाजी श्रेष्ठ ने कहा कि ओली ने में ''कूटनीति" के स्थापित मानकों के विपरीत "चिढ़ाने" वाले भारत विरोधी बयान देकर तीन गलतियां की हैं. पिछले महीने, प्रधानमंत्री ओली ने आरोप लगाया था कि भारत उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के साथ मिलकर उन्हें सत्ता से बाहर करने की साजिश कर रहा है. उनका यह बयान नेपाल द्वारा एक नया नक्शा मंजूर करने के लिए एक विधेयक पारित करने के बाद आया, जिसमें नेपाल और भारत के बीच विवाद के केंद्र रहे इलाके लिपुलेख दर्रा, कालापानी और लिंपियाधुरा को नेपाल के क्षेत्र के तौर पर दिखाया गया था.



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अयोध्या को बताया नेपाल में
ओली ने उसके बाद जुलाई माह में यह दावा करके एक नया विवाद खड़ा कर दिया कि असली अयोध्या भारत में नहीं, बल्कि नेपाल में है और भगवान राम का जन्म दक्षिण नेपाल के थोरी में हुआ था. ओली की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल के प्रवक्ता एवं सेंट्रल सेक्रेटैरिएट के सदस्य नारायणकाजी श्रेष्ठ ने प्रधानमंत्री ओली के बयानों को ''कूटनीति" के स्थापित मानकों के विपरीत करार देते हुए कहा कि प्रधनमंत्री ओली ने भारत के खिलाफ चिढ़ाने वाले बयान देकर एक बहुत बड़ी गलती की, ऐसे समय में जब सीमा मुद्दे को बातचीत के जरिए सुलझाने की जरूरत है. प्रवक्ता ने आगे कहा, 'प्रधानमंत्री ओली द्वारा भारत के राष्ट्रीय चिह्न का उल्लेख करते हुए चिढ़ाने वाले बयान देकर कालापानी और लिपुलेख की विवादित भूमि पर दावा करना एक गलती थी.' उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ओली ने भारत के संबंध में तीन गलतियां की, हालांकि सरकार द्वारा एक नया नक्शा जारी करके कालापानी और अन्य क्षेत्रों पर किया गया दावा सराहनीय था.
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