चीन की दखल के बावजूद नेपाल में बवाल जारी, PM ओली आरोपों पर 10 दिन में देंगे जवाब

पीएम ओली ने जवाब देने के लिए 10 दिन का समय मांगा.
पीएम ओली ने जवाब देने के लिए 10 दिन का समय मांगा.

Nepal political crisis: नेपाल में जारी राजनीतिक संकट के बीच पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’(Pushpa Kamal Dahal ‘Prachanda’) के आरोपों के जवाब में प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली (KP Sharma Oli) ने अलग राजनीतिक दस्तावेज पेश करने के लिए 10 दिन का समय मांगा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 19, 2020, 8:31 AM IST
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काठमांडू. सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (सीपीएन) के केंद्रीय सचिवालय की बहुप्रतीक्षित महत्वपूर्ण बैठक बुधवार को हुई लेकिन गतिरोध दूर नहीं हो सका. पार्टी से विचार-विमर्श किए बिना सरकार चलाने के पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ (Pushpa Kamal Dahal ‘Prachanda’) के आरोपों के जवाब में प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली (KP Sharma Oli) ने अलग राजनीतिक दस्तावेज पेश करने के लिए 10 दिन का समय देने की मांग की. बता दें कि इससे पहले सरकार को संकट से उबारने के लिए चीन की राजदूत हाउ यांकी ने भी पीएम ओली से मुलाक़ात की थी.

प्रधानमंत्री ओली के बालुवातार स्थित आधिकारिक निवास पर जैसे ही बैठक शुरू हुई ओली ने सचिवालय के सदस्यों से कहा कि वह अगली बैठक में अलग राजनीतिक दस्तावेश पेश करेंगे और इसे तैयार करने के लिए 10 दिनों का समय देने के लिए कहा. सीपीएन के प्रवक्ता नारायणकाजी श्रेष्ठ ने इस बारे में बताया. उन्होंने कहा कि पार्टी के सचिवालय की अगली बैठक 28 नवंबर को होगी. बैठक में पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रचंड द्वारा दिए गए 19 पन्नों की राजनीतिक रिपोर्ट पर चर्चा होने की संभावना थी. सत्तारूढ़ दल के सूत्रों के मुताबिक प्रचंड ने ओली पर पार्टी से विचार-विमर्श किए बिना और पार्टी के नियम-कायदे के विपरीत सरकार चलाने का आरोप लगाया था.

प्रचंड नहीं है समझौते के मूड में
ओली और उनके प्रतिद्वंद्वी प्रचंड के बीच 31 अक्टूबर को बैठक में तथा सीपीएन में मतभेद सामने आने के बाद यह बैठक हुई. ओली ने मौजूदा सत्ता संघर्ष के समाधान के लिए केंद्रीय सचिवालय की बैठक बुलाने के प्रचंड के अनुरोध को भी ठुकरा दिया था. ओली और प्रचंड ने सत्ता को लेकर समझौते पर सहमत होने के बाद सितंबर में अपने मतभेद दूर किए थे जिससे पार्टी में महीनों से चला आ रहा गतिरोध खत्म हो गया था. सचिवालय के सभी नौ सदस्य इस अहम बैठक में मौजूद थे. प्रचंड की पहल पर इस बैठक का आयोजन हुआ.
सीपीएन की स्थायी कमेटी के एक सदस्य ने बताया कि प्रचंड ने अपनी राजनीतिक रिपोर्ट में कई मुद्दे उठाए हैं. इसमें भारत के रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (आर एंड एडब्ल्यू) के प्रमुख सामंत कुमार गोयल के साथ ओली की हालिया मुलाकात के संबंध में पार्टी सचिवालय को अवगत नहीं कराने का भी मामला है. इससे पहले ओली ने प्रचंड से रिपोर्ट वापस लेने का आग्रह करते हुए कहा था कि यह उनके लिए स्वीकार्य नहीं है. पार्टी सूत्रों ने बताया कि 21 अक्टूबर को गोयल और ओली की मुलाकात के बाद पार्टी में उभरे विवाद समेत कई मुद्दों पर दोनों नेताओं के बीच गतिरोध चल रहा है.



केंद्रीय समिति की बैठक बुलाई गयी
पार्टी ने तीन और 10 दिसंबर को स्थायी समिति और केंद्रीय समिति की बैठक भी बुलाने का फैसला किया है. बुधवार सुबह में ओली काठमांडू में शीतलनिवास में राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति विद्या भंडारी से मिलने गए. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, चीनी राजदूत होउ यांक्वी ओली से मिलने प्रधानमंत्री आवास गयी थीं और पार्टी के भीतर मतभेद की पृष्ठभूमि में उनसे राजनीतिक विचार-विमर्श किया. पार्टी के आंतरिक मतभेद तब सामने आ गये थे जब प्रचंड और पार्टी के वरिष्ठ नेता माधव कुमार नेपाल समेत कई और नेताओं ने पार्टी के अध्यक्ष और नेपाल के प्रधानमंत्री पद से ओली को इस्तीफा देने को कहा.



नेपाल के प्रधानमंत्री ने बगावती नेताओं पर उनकी सरकार को गिराने की साजिश रचने का आरोप लगाया था. सीपीएन के सूत्रों ने कहा कि आंतरिक कलह बढ़ने के कारण पार्टी संकट का सामना कर रही है और कभी भी इसमें फूट पड़ सकती है. सीपीएन को प्रतिनिधि सभा में दो तिहाई बहुमत प्राप्त है और यह सबसे बड़ी पार्टी है. हालांकि, दूसरी पांत के नेता ओली और प्रचंड के बीच मतभेदों को सुलझाने के लिए प्रयास कर रहे हैं.
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