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नेपाल ने दिया चीन को झटका, कहा- हमारे देश की राजनीति से रहें दूर

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली (फाइल फोटो)
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली (फाइल फोटो)

नेपाल ने चीन (China) को झटका देते हुए देश की राजनीति से दूर रहने की सलाह दी है. नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली (KP Sharma Oli) ने पिछले हफ्ते चीनी राजदूत होउ यान्की से कहा कि वह अन्य देशों से बिना किसी सहायता के अपनी पार्टी के भीतर चुनौतियों को संभालने में सक्षम हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 2, 2020, 5:11 PM IST
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काठमांडू. नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली (PM KP Sharma Oli) ने घरेलू राजनीति में चीन (China) के दखल से कन्नी काटना शुरू कर दिया है. उन्होंने काठमांडू में तैनात चीन के राजदूत हाओ यांकी से दो टूक कहा है कि वे किसी दूसरे देश की सहायता के बिना ही अपनी पार्टी के भीतर की चुनौतियों से निपट सकते हैं. बता दें कि नेपाल में पीएम ओली के खिलाफ सत्तारूढ़ नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के चेयरमैन पुष्प कमल दहल प्रचंड ने फिर से मोर्चा खोला हुआ है. पीएम ओली की छवि पिछले दो साल में भारत विरोध की रही है. देश का विवादित नक्शा संसद से पास करवाने के बाद भारत के साथ नेपाल के संबंध बेहद नाजुक दौर से गुजर रहे हैं. इस बीच भारत ने भी कालापानी, लिंपियाधुरा और लिपुलेख को लेकर जारी मतभेदों पर बातचीत के संकेत दिए हैं. वहीं, कुछ दिनों पहले ही भारतीय विदेश सचिव, सेना प्रमुख और खुफिया एजेंसी रॉ चीफ ने भी नेपाल का दौरा किया है.

चीनी राजनयिकों की नई पीढ़ी से ताल्लुक रखने वाली 'वुल्फ वॉरियर' हाओ की नेपाल के सत्‍ता गलियारों में जोरदार पकड़ है. उनकी कोशिश है कि किसी भी तरीके से नेपाल कम्‍युनिस्‍ट पार्टी को ओली के समर्थन में खड़ा रखा जाए जो इन भारत के खिलाफ लगातार कई फैसले ले चुके हैं. यही नहीं ओली सरकार ने चीनी राजदूत के इशारे पर अमेरिका से मिलने वाली 50 करोड़ डॉलर की सहायता को भी ठंडे बस्‍ते में डाल दिया है. पिछले दिनों अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ के बाद भी ओली सरकार इस फंड पर अब तक कोई फैसला नहीं ले पाई है.





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हाओ चीन की वुल्फ वॉरियर' राजनयिकों की नई पीढ़ी से ताल्लुक रखती हैं. चीनी राजनयिकों को यह नाम एक ब्लॉकबास्टर फिल्म के नाम पर दिया गया है जिसमें एक चीनी कमांडो अफ्रीका और दक्षिणपूर्व एशिया में बुरे 'अमेरिकियों' की हत्या करता है. राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीनी राजनयिक सख्त रुख ही अपनाते रहे हैं. सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स में एक संपादकीय में कहा गया था कि वे बीते दिनों की बात है जब दूसरे लोग चीन को नियंत्रित कर सकते थे. चीन के लोग अब नरम कूटनीतिक रुख से संतुष्ट नहीं हैं.
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